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असम CM की पत्नी पर आरोप विवाद में पवन खेड़ा की बढ़ी मुश्किलें, गुवाहाटी HC से झटका लगने के बाद अब ‘सुप्रीम’ शरण में कांग्रेस नेता

The Hill India News
Last updated: April 27, 2026 2:19 am
The Hill India News
Published: April 27, 2026
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नई दिल्ली/गुवाहाटी: भारतीय राजनीति में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर अब अदालती गलियारों में एक नई कानूनी जंग का रूप ले चुका है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा से जुड़े एक विवादास्पद मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुवाहाटी उच्च न्यायालय (Guwahati HC) द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद, खेड़ा ने अब राहत की उम्मीद में देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है।

Contents
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने क्यों कहा ‘हिरासत में पूछताछ जरूरी’?क्या है पूरा विवाद? (विस्तृत पृष्ठभूमि)कानूनी दांव-पेंच: तेलंगाना से असम और अब दिल्ली‘जाली दस्तावेज’—जांच का मुख्य केंद्रसियासी सरगर्मी और कांग्रेस का रुखसुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने क्यों कहा ‘हिरासत में पूछताछ जरूरी’?

पवन खेड़ा के लिए सबसे बड़ा झटका गुवाहाटी उच्च न्यायालय के उस फैसले से आया, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया गया। न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जाली दस्तावेजों को रखने और उनके इस्तेमाल से जुड़े गंभीर आरोप शामिल हैं।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले की तह तक जाने और सच्चाई का पता लगाने के लिए आरोपी से ‘हिरासत में पूछताछ’ (Custodial Interrogation) आवश्यक हो सकती है। कोर्ट ने यह भी अंदेशा जताया कि कांग्रेस नेता जांच प्रक्रिया से बचने या उसमें देरी करने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए उन्हें अग्रिम सुरक्षा प्रदान करना न्यायसंगत नहीं होगा।

क्या है पूरा विवाद? (विस्तृत पृष्ठभूमि)

इस कानूनी विवाद की जड़ें पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए उन गंभीर आरोपों में हैं, जो सीधे तौर पर असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा की व्यक्तिगत और व्यावसायिक साख पर सवाल उठाते हैं। खेड़ा ने एक प्रेस वार्ता के दौरान सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि रिनिकी भुयान सरमा के पास एक से अधिक (मल्टीपल) पासपोर्ट हैं और उन्होंने विदेशों में अघोषित संपत्तियां अर्जित कर रखी हैं।

खेड़ा के इन आरोपों ने असम में सियासी तूफान खड़ा कर दिया। भाजपा ने इसे निराधार और चरित्र हनन की राजनीति करार दिया। इसके बाद, मुख्यमंत्री की पत्नी की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर असम पुलिस ने 6 अप्रैल को पवन खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज बनाने और मानहानि जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

कानूनी दांव-पेंच: तेलंगाना से असम और अब दिल्ली

पवन खेड़ा के लिए यह कानूनी सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शुरुआत में, खेड़ा ने अपने हैदराबाद स्थित आवासीय पते का हवाला देते हुए तेलंगाना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। वहां उन्हें 10 अप्रैल को अंतरिम राहत मिल गई थी, लेकिन मामला तब और पेचीदा हो गया जब सर्वोच्च न्यायालय ने उस राहत पर रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने तब खेड़ा को निर्देश दिया था कि वे उचित क्षेत्राधिकार के तहत असम की संबंधित अदालत में ही अपनी याचिका दायर करें।

अब जब गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से साफ इनकार कर दिया है, तो उनके पास एकमात्र कानूनी विकल्प सुप्रीम कोर्ट ही बचा है। खेड़ा की दलील है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर पूरी तरह से ‘राजनीतिक बदले की भावना’ से प्रेरित है और इसका उद्देश्य केवल उनकी आवाज को दबाना है।

‘जाली दस्तावेज’—जांच का मुख्य केंद्र

असम पुलिस का दावा है कि खेड़ा ने जिन दस्तावेजों के आधार पर मुख्यमंत्री की पत्नी पर आरोप लगाए, वे प्रथम दृष्टया संदिग्ध या फर्जी प्रतीत होते हैं। पुलिस का तर्क है कि बिना किसी ठोस आधार के इतने उच्च स्तर के पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ भ्रामक सूचनाएं फैलाना सामाजिक और कानूनी रूप से गंभीर अपराध है। इसी आधार पर पवन खेड़ा सुप्रीम कोर्ट अग्रिम जमानत याचिका में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शीर्ष अदालत उन्हें कोई अंतरिम सुरक्षा प्रदान करती है या उन्हें जांच का सामना करने के लिए असम पुलिस के समक्ष पेश होना पड़ेगा।

सियासी सरगर्मी और कांग्रेस का रुख

कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को लोकतंत्र पर हमला और विपक्ष की घेराबंदी बता रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जब भी विपक्ष भ्रष्टाचार या सत्तापक्ष के करीबियों के व्यावसायिक हितों पर सवाल उठाता है, तो सरकारी तंत्र का उपयोग करके उन्हें डराने की कोशिश की जाती है। वहीं, असम सरकार का रुख स्पष्ट है कि कानून सबके लिए बराबर है और किसी को भी जाली दस्तावेजों के सहारे किसी की छवि धूमिल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

आगामी दिनों में होने वाली सुनवाई पवन खेड़ा के राजनीतिक करियर और उनकी निजी स्वतंत्रता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यदि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिलती है, तो असम पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर सकती है। राष्ट्रीय स्तर के बड़े मीडिया हाउस इस मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम कानूनी मर्यादा के चश्मे से देख रहे हैं। फिलहाल, पूरा राजनीतिक गलियारा दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक इस ‘सुप्रीम’ फैसले का इंतजार कर रहा है।

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TAGGED:Assam Police FIR Pawan Khera.Congress leader legal disputeGuwahati High Court verdict Pawan KheraHimanta Biswa Sarma vs Pawan KheraRiniki Bhuyan Sarma defamation case
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