देहरादून: उत्तराखंड के मैदानी और तराई क्षेत्रों में सूरज के तीखे तेवरों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य में बढ़ती तपिश और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा संभावित हीटवेव (लू) की चेतावनी के बाद, उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए एक विस्तृत और सख्त ‘हीटवेव एक्शन प्लान’ जारी किया है।
इसी क्रम में, राजधानी देहरादून में पारे की उछाल को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। देहरादून के जिलाधिकारी और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष सविन बंसल ने भीषण गर्मी के मद्देनजर जिले के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित करने का आदेश जारी किया है।
शिक्षा महानिदेशक का सख्त रुख: सुरक्षा सर्वोपरि
महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि बच्चों की सेहत और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि ग्रीष्मकाल के दौरान छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी भी स्कूल स्तर पर इन नियमों की अनदेखी पाई गई, तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। दरअसल, हाल ही में हुई विभागीय बैठक में हीटवेव से निपटने की रणनीतियों पर मंथन किया गया था, जिसके बाद यह उत्तराखंड स्कूल हीटवेव गाइडलाइंस लागू की गई हैं।
वॉटर बेल: अब हर घंटे पानी पिएंगे बच्चे
शिक्षा विभाग ने एक अभिनव पहल करते हुए सभी स्कूलों में ‘वॉटर बेल’ (Water Bell) की व्यवस्था अनिवार्य कर दी है। इसके तहत स्कूल अवधि के दौरान नियमित अंतराल पर घंटी बजाई जाएगी, जो छात्रों को पानी पीने की याद दिलाएगी। विभाग का मानना है कि छोटे बच्चे अक्सर पढ़ाई या खेलकूद की धुन में पानी पीना भूल जाते हैं, जिससे वे डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) का शिकार हो सकते हैं। इस नियम का उद्देश्य बच्चों के शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा को बनाए रखना है। साथ ही, स्कूलों को परिसर में स्वच्छ और शीतल पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूलों के समय में बदलाव और फर्स्ट एड की सुविधा
बढ़ते तापमान को देखते हुए विभाग ने स्कूल प्रबंधन को लचीलापन भी प्रदान किया है। अत्यधिक गर्मी वाले क्षेत्रों में स्कूल सुबह की पाली (मॉर्निंग शिफ्ट) में संचालित किए जा सकते हैं। इसके अलावा, आदेश में कक्षाओं के भीतर उचित वेंटिलेशन और पंखों की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
आपातकालीन स्थिति के लिए दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि:
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प्रत्येक विद्यालय में ‘फर्स्ट एड किट’ (प्राथमिक उपचार) हमेशा तैयार रहनी चाहिए।
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ओआरएस (ORS) के पैकेट और हीट स्ट्रोक से बचाव की आवश्यक दवाइयां उपलब्ध होनी चाहिए।
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किसी भी छात्र की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल प्राथमिक सहायता देकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाने का प्रोटोकॉल तैयार रखना होगा।
खेलकूद पर पाबंदी और जागरूकता अभियान
नई गाइडलाइंस के अनुसार, दोपहर के समय जब सूर्य की किरणें सबसे तीव्र होती हैं, उस दौरान किसी भी प्रकार की बाहरी गतिविधि या खेलकूद पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि वे असेंबली (प्रार्थना सभा) का समय भी कम करें या उसे छायादार स्थान पर आयोजित करें।
इसके साथ ही, बच्चों और अभिभावकों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए विशेष सत्र आयोजित करने को कहा गया है। इसमें छात्रों को सिखाया जाएगा कि वे धूप में निकलते समय सिर ढककर रखें, हल्के सूती कपड़े पहनें और लू के लक्षण (जैसे चक्कर आना या सिरदर्द) महसूस होने पर तुरंत सूचित करें।
तैयार होगा ‘स्कूल स्तर हीटवेव एक्शन प्लान’
राज्य सरकार ने अब हर स्कूल को अपना व्यक्तिगत ‘हीटवेव एक्शन प्लान’ तैयार करने को कहा है। इस योजना में आपातकालीन संपर्क नंबरों की सूची, स्थानीय डॉक्टरों के नाम और संकट के समय छात्रों की सुरक्षित निकासी या सहायता की पूरी रूपरेखा शामिल होगी। छुट्टी के बाद बच्चों को अकेले भेजने के बजाय समूह में भेजने की सलाह दी गई है, ताकि रास्ते में किसी भी अप्रिय स्थिति में वे एक-दूसरे की मदद कर सकें या बड़ों को सूचित कर सकें।
विशेषज्ञों की राय और सरकारी मुस्तैदी
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तापमान परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। ऐसे में उत्तराखंड स्कूल हीटवेव गाइडलाइंस का पालन करना न केवल अनिवार्य है बल्कि जीवन रक्षक भी है। प्रशासन की यह सक्रियता दर्शाती है कि सरकार जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न हो रहे खतरों के प्रति गंभीर है।
आने वाले दिनों में यदि पारे का ग्राफ और ऊपर जाता है, तो शिक्षा विभाग ग्रीष्मकालीन अवकाश को समय से पहले घोषित करने या ऑनलाइन कक्षाओं के विकल्प पर भी विचार कर सकता है। फिलहाल, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की टीमें जमीनी स्तर पर इन निर्देशों के अनुपालन की निगरानी कर रही हैं।
उत्तराखंड सरकार का यह कदम प्रदेश के हजारों छात्रों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक सुरक्षा कवच की तरह है। अब जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधनों और अभिभावकों की है कि वे इन नियमों का अक्षरशः पालन करें ताकि ‘देवभूमि’ के भविष्य को इस भीषण तपिश से बचाया जा सके।


