
तेलंगाना की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें सीधे चुनौती दे डाली है। रेवंत रेड्डी ने कहा कि अगर वह केसीआर से विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं छीन पाए, तो वह अपना नाम बदल लेंगे। इस बयान ने तेलंगाना की सियासत को और गर्म कर दिया है और आने वाले समय में राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
हैदराबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान रेवंत रेड्डी ने केसीआर के कार्यकाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया कालेश्वरम प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह परियोजना महज तीन साल के भीतर ही कमजोर पड़ गई और अब ‘कुलेश्वरम’ बन चुकी है। उनके अनुसार इस परियोजना के नाम पर भारी पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं और जनता के पैसे की बर्बादी की गई।
रेवंत रेड्डी ने केसीआर को खुली चुनौती देते हुए कहा कि 2029 का चुनाव उनके और केसीआर के बीच सीधी लड़ाई होगा। उन्होंने कहा, “अगर मैं तुमसे विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं छीन पाया, तो मैं अपना नाम बदल लूंगा।” इस बयान के जरिए उन्होंने न सिर्फ अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश की, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं में भी जोश भरने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार किसानों और गरीबों के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में किसानों के लिए कर्ज माफी योजना के तहत 2 लाख रुपये तक के कर्ज माफ किए गए हैं। इस योजना के तहत 25 लाख से अधिक किसानों के खातों में करीब 22,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। इसके अलावा ‘रैतु भरोसा’ योजना के तहत भी किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार गरीबों को बेहतर गुणवत्ता का चावल उपलब्ध करा रही है। उनके अनुसार, राज्य में लगभग 3.5 करोड़ लोगों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या पहले कभी गरीबों को इस स्तर का राशन देने की पहल की गई थी।
दूसरी ओर, के. चंद्रशेखर राव ने भी रेवंत रेड्डी के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना में फिर से भारत राष्ट्र समिति (BRS) की सरकार बनेगी। केसीआर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने झूठे वादों के सहारे सत्ता हासिल की और अब राज्य को अव्यवस्था की ओर धकेल दिया है।
केसीआर ने कहा कि मौजूदा सरकार जनता के लिए कोई ठोस काम नहीं कर रही है और केवल उनकी आलोचना में लगी हुई है। उन्होंने ‘Hydra’ परियोजना को लेकर भी सरकार पर हमला बोला और कहा कि सरकार इसे सही तरीके से लागू करने में विफल रही है। केसीआर ने ऐलान किया कि जैसे ही BRS सत्ता में लौटेगी, सबसे पहला काम इस परियोजना को समाप्त करना होगा।
इस बीच, राजनीतिक हलकों में पार्टी बदलने वाले नेताओं को लेकर भी बयानबाज़ी तेज हो गई है। रेवंत रेड्डी ने पूर्व नेता जीवन रेड्डी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जीवन रेड्डी ने वर्षों तक कांग्रेस से लाभ उठाने के बाद पार्टी छोड़ दी और विरोधी खेमे में शामिल हो गए।
तेलंगाना की राजनीति में यह टकराव आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर माहौल तैयार कर रहा है। एक ओर रेवंत रेड्डी अपनी सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं के जरिए जनता का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केसीआर अपनी वापसी का दावा करते हुए कांग्रेस सरकार की नाकामियों को उजागर कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2029 का चुनाव तेलंगाना में बेहद दिलचस्प और कड़ा मुकाबला साबित हो सकता है। दोनों ही नेता अपनी-अपनी रणनीति के तहत जनता को साधने में जुटे हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह सियासी जंग और भी तेज होने की पूरी संभावना है।



