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उत्तराखंड: 12 साल की कायरा भंडारी, जूनियर ही नहीं, सीनियर खिलाड़ियों को भी दे रही कड़ी टक्कर

The Hill India News
Last updated: April 18, 2026 8:03 am
The Hill India News
Published: April 18, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड की 12 वर्षीय टेबल टेनिस खिलाड़ी कायरा भंडारी इन दिनों अपने शानदार प्रदर्शन को लेकर चर्चा में हैं। बेहद कम उम्र में उन्होंने जिस तरह से खेल के तीनों वर्ग—सब जूनियर, जूनियर और सीनियर—में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, वह न सिर्फ राज्य बल्कि देशभर के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

कायरा भंडारी का नाम उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गया है, जो उम्र से कहीं आगे जाकर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। आमतौर पर खिलाड़ी अपने आयु वर्ग तक ही सीमित रहते हैं, लेकिन कायरा ने इस परंपरा को तोड़ते हुए सीनियर खिलाड़ियों के खिलाफ भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यही वजह है कि खेल विशेषज्ञ भी उनके उज्ज्वल भविष्य की बात कर रहे हैं।

हाल ही में देहरादून के परेड ग्राउंड स्थित मल्टीपरपज हॉल में आयोजित 87वीं इंटर स्टेट टेबल टेनिस चैंपियनशिप में कायरा ने उत्तराखंड टीम का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतियोगिता में भाग लेना ही अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन कायरा ने यहां भी अपने खेल से सबका ध्यान खींचा। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में वह पहले ही तीन गोल्ड मेडल, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज जीत चुकी हैं, जो उनकी निरंतर मेहनत और प्रतिभा को दर्शाता है।

कायरा की खेल यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टेबल टेनिस से नहीं, बल्कि लॉन टेनिस से की थी। महज 6 साल की उम्र में उन्होंने लॉन टेनिस खेलना शुरू किया और करीब दो साल तक इस खेल से जुड़ी रहीं। हालांकि, समय के साथ उनकी रुचि बदल गई और उन्होंने टेबल टेनिस को अपनाने का फैसला किया। यह फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

कायरा के पिता ने उन्हें टेबल टेनिस खेलने की सलाह दी थी। 8 साल की उम्र से उन्होंने इस खेल में नियमित अभ्यास शुरू किया और आज उसी मेहनत का परिणाम है कि वह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में राज्य का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उनकी सफलता के पीछे परिवार का अहम योगदान रहा है, जिसने हर कदम पर उनका साथ दिया।

कायरा का दैनिक रूटीन भी बेहद अनुशासित है। वह रोजाना 6 से 8 घंटे तक अभ्यास करती हैं, जो किसी भी पेशेवर खिलाड़ी के लिए जरूरी माना जाता है। इसके साथ ही वह अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देती हैं। स्कूल की क्लास मिस न हो, इसके लिए वह ऑनलाइन पढ़ाई का सहारा लेती हैं। इस तरह उन्होंने खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाकर रखा है।

वर्तमान में कायरा देहरादून के पैसिफिक टेबल टेनिस सेंटर में प्रशिक्षण ले रही हैं, जहां उन्हें भारतीय टेबल टेनिस टीम के कोच पराग अग्रवाल मार्गदर्शन दे रहे हैं। पिछले डेढ़ साल से वह उनकी देखरेख में अभ्यास कर रही हैं। कोच का मानना है कि कायरा में अपार संभावनाएं हैं और वह आने वाले एक-दो वर्षों में भारतीय टीम में अपनी जगह बना सकती हैं।

कायरा की मां लतिका भंडारी ने भी अपनी बेटी के करियर को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए अपना करियर तक छोड़ दिया और पूरी तरह उसके साथ जुड़ गईं। वह न केवल कायरा की ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का ध्यान रखती हैं, बल्कि उनके न्यूट्रिशन, फिटनेस और फिजियोथेरेपी पर भी विशेष ध्यान देती हैं।

लतिका भंडारी बताती हैं कि कोरोना काल के दौरान जब स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई हो रही थी, उसी समय उन्होंने कायरा को खेल के प्रति और अधिक प्रेरित किया। उन्होंने महसूस किया कि टेबल टेनिस ऐसा खेल है जो न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी खिलाड़ी को मजबूत बनाता है। यही कारण है कि उन्होंने कायरा को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए पूरा समर्थन दिया।

कायरा के परिवार का खेल से पुराना संबंध भी रहा है। उनके दादा भी खेल गतिविधियों से जुड़े रहे हैं, जिसका असर उनके अंदर बचपन से ही दिखाई देता है। परिवार का मानना है कि बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए, ताकि वे अपने पसंदीदा क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

आज कायरा भंडारी न केवल उत्तराखंड की उभरती हुई खिलाड़ी हैं, बल्कि वह देश के भविष्य की उम्मीद भी बन चुकी हैं। उनका लक्ष्य है कि वह अंडर-15 वर्ग में पहुंचते ही भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करें। इसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं और अपने खेल को हर दिन बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं।

अगर कायरा इसी तरह मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ती रहीं, तो वह दिन दूर नहीं जब वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करती नजर आएंगी। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, परिवार का समर्थन और कड़ी मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

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