देहरादून: उत्तराखंड में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। अप्रैल के महीने में जहां चिलचिलाती धूप की उम्मीद की जा रही थी, वहीं बादलों की गड़गड़ाहट और ऊंचे हिमालयी शिखरों पर गिरती बर्फ ने नवंबर-दिसंबर जैसी सर्दी का अहसास करा दिया है। उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र का पूर्वानुमान एक बार फिर सटीक साबित हुआ है। विभाग द्वारा जारी किए गए ऑरेंज अलर्ट के बीच बुधवार, 8 अप्रैल को प्रदेश के सभी 13 जिलों में जमकर मेघ बरसे, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
उत्तरकाशी से लेकर ऊधम सिंह नगर तक, राज्य का कोई भी कोना इस बेमौसम बरसात से अछूता नहीं रहा। पहाड़ों में हो रही बर्फबारी और मैदानी इलाकों में शीतलहर के समान चलती हवाओं ने पारे को सामान्य से काफी नीचे धकेल दिया है।
चारधामों में बर्फ की चादर, मैदानी इलाकों में ‘वॉटर लॉगिंग’
पर्वतीय क्षेत्रों में रात से ही शुरू हुआ बारिश का सिलसिला बुधवार सुबह भी जारी रहा। विश्व प्रसिद्ध चारधाम—गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ—में ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है। बर्फबारी के चलते इन धामों में तापमान शून्य के करीब पहुंच गया है।
दूसरी ओर, मैदानी जिलों जैसे हरिद्वार, देहरादून और ऊधम सिंह नगर में सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश ने गर्मी को पूरी तरह गायब कर दिया है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में अप्रैल के प्रथम पखवाड़े में ऐसी भीषण ठंड और लगातार होने वाली बारिश पहले कभी नहीं देखी। उत्तरकाशी जिले के ऊंचाई वाले गांवों में ग्रामीण दोबारा अंगीठी और गर्म कपड़ों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं।
तापमान में ऐतिहासिक गिरावट: 6 डिग्री तक लुढ़का पारा
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट आने की संभावना है। वर्तमान में जो बारिश हो रही है, उसने न केवल वातावरण को ठंडा किया है, बल्कि धूल और प्रदूषण से भी राहत दी है। हालांकि, यह राहत किसानों के लिए आफत बनकर आई है, क्योंकि इस समय गेहूं की फसल तैयार खड़ी है और बारिश-ओलावृष्टि उसे भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
13 अप्रैल तक कैसा रहेगा मौसम? विभाग की नई चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र ने आगामी 13 अप्रैल तक का विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के मुताबिक, राहत की खबर यह है कि कल यानी 9 अप्रैल से मौसम के पैटर्न में थोड़ा बदलाव आएगा, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है।
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9 अप्रैल (गुरुवार): पहाड़ी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में हल्की से मध्यम बारिश और 3000 मीटर से ऊंचे स्थानों पर बर्फबारी की संभावना है। हालांकि, मैदानी इलाकों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।
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10 से 13 अप्रैल: इस दौरान भी पहाड़ों में छिटपुट बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की फाहें गिरना जारी रह सकता है।
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पारे की वापसी: मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 13 अप्रैल के बाद मौसम एक बार फिर करवट लेगा और अगले 3-4 दिनों में अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी, जिससे दोबारा गर्मी का अहसास होगा।
पर्यटकों के लिए एडवाइजरी और सुरक्षा के इंतजाम
बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने पहाड़ी रास्तों पर यात्रा कर रहे पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों (Landslide Zones) में सतर्कता बरतने को कहा गया है। चारधाम यात्रा की तैयारियों में जुटे अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि बर्फबारी के कारण रास्तों में होने वाली बाधा को तुरंत दूर किया जाए ताकि स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों को असुविधा न हो।
अप्रैल के महीने में उत्तराखंड का यह ‘विंटर मोड’ चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ की बार-बार सक्रियता इस मौसमी बदलाव का मुख्य कारण है। फिलहाल, उत्तराखंड में बारिश का दौर जारी है और लोग इस अनचाही ठंड का सामना कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों तक पर्वतीय क्षेत्रों में सफर करने वालों को मौसम की पल-पल की अपडेट लेकर ही घर से निकलना चाहिए।



