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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड: दून बार एसोसिएशन बनाम डीएम विवाद गहराया, सिविल कोर्ट तक पहुंची हड़ताल; अधिवक्ता मांगों पर अड़े

The Hill India News
Last updated: April 8, 2026 12:01 pm
The Hill India News
Published: April 8, 2026
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देहरादून: दून बार एसोसिएशन और जिलाधिकारी (डीएम) के बीच चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। पहले जहां अधिवक्ताओं ने राजस्व न्यायालयों और रजिस्ट्रार कार्यालयों का बहिष्कार किया था, वहीं अब सिविल कोर्ट के कार्यों से भी दूरी बना ली गई है। इस फैसले के चलते न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचने वाले आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कई मामलों में फरियादी बिना सुनवाई के ही वापस लौटने को मजबूर हैं।

दरअसल, यह पूरा विवाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा के खिलाफ जिलाधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई से शुरू हुआ। अधिवक्ताओं का आरोप है कि जिलाधिकारी ने बिना उचित प्रक्रिया के वरिष्ठ वकील के खिलाफ कदम उठाया, जो न केवल अधिवक्ता समुदाय का अपमान है बल्कि न्यायिक गरिमा के भी खिलाफ है। इसी के विरोध में बार एसोसिएशन ने पहले सीमित स्तर पर विरोध शुरू किया, लेकिन अब यह आंदोलन व्यापक हड़ताल में बदल चुका है।

बार एसोसिएशन की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जब तक मुख्यमंत्री से सीधी वार्ता नहीं होती और जिलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। एसोसिएशन ने साफ किया है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि पूरे अधिवक्ता समाज के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।

अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के अधीन आने वाले राजस्व न्यायालयों और तहसीलों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि दाखिल-खारिज, विरासत और अन्य राजस्व संबंधी मामलों की फाइलें महीनों तक लंबित रहती हैं, लेकिन प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। इसके अलावा एडीएम (एफ) जैसे न्यायालयों में सुनवाई के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है, जिससे आम जनता को न्याय मिलने में देरी हो रही है।

गौरतलब है कि 4 अप्रैल को हुई बैठक में बार एसोसिएशन ने पहले ही जिलाधिकारी न्यायालय के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया था। इसके तहत 7 अप्रैल तक राजस्व न्यायालयों और रजिस्ट्रार कार्यालयों का कामकाज ठप कर दिया गया था। लेकिन हालात में सुधार न होने और प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल न होने के कारण अधिवक्ताओं ने अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है।

इस विवाद की जड़ 25 मार्च की एक घटना है, जब कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में ‘मैसेज दून वैली बनाम सरकार’ वाद की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा ने न्यायालय की कार्यवाही पर कुछ टिप्पणियां की थीं। जिलाधिकारी ने इसे न्यायालय की गरिमा के खिलाफ और पेशेवर आचरण का उल्लंघन मानते हुए गंभीरता से लिया। इसके बाद प्रशासन ने इस मामले को प्रोफेशनल मिसकंडक्ट की श्रेणी में डालते हुए अनुशासन समिति को भेज दिया और जांच के दौरान अधिवक्ता के प्रैक्टिस अधिकारों के निलंबन पर भी विचार करने का अनुरोध किया।

इस कार्रवाई से नाराज बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुकरेती ने कहा कि प्रेमचंद शर्मा सात बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं और एक वरिष्ठ एवं सम्मानित अधिवक्ता हैं। यदि उन्होंने कोई टिप्पणी की थी, तो जिलाधिकारी को सीधे कार्रवाई करने के बजाय बार एसोसिएशन को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी, ताकि संगठन स्तर पर इस मामले को सुलझाया जा सकता।

वर्तमान स्थिति में यह विवाद केवल प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच टकराव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। अदालतों में कामकाज ठप होने से न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो रही है और लोगों को अपने मामलों के निपटारे के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

अब सभी की नजरें राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की पहल पर टिकी हैं। यदि जल्द ही इस विवाद का समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में न्यायिक व्यवस्था पर इसका और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

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