देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर बड़ा दावा किया है। रावत का कहना है कि उत्तराखंड में राजनीतिक परिस्थितियां बदल रही हैं और आने वाले समय में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि भारतीय जनता पार्टी के वोट प्रतिशत में कुछ कमी आती है और उसका लाभ कांग्रेस को मिलता है, तो दोनों दलों के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है।
हरक सिंह रावत ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि वह कई दशकों से उत्तराखंड की राजनीति और यहां के सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को करीब से देखते आए हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में जनता के बीच बदलाव की भावना दिखाई दे रही है और कांग्रेस को इसका राजनीतिक फायदा मिल सकता है।
कांग्रेस के वोट प्रतिशत को लेकर रावत का दावा
हरक सिंह रावत ने कांग्रेस के संभावित वोट प्रतिशत को लेकर भी अपना आकलन सामने रखा। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर कांग्रेस का वोट प्रतिशत करीब 34 प्रतिशत के आसपास पहुंचने का अनुमान जताया।
रावत का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट प्रतिशत का अंतर काफी महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन अब यह अंतर कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के वोट प्रतिशत में लगभग साढ़े तीन से साढ़े चार प्रतिशत तक की गिरावट आती है और इसका फायदा कांग्रेस को मिलता है, तो प्रदेश में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।
हालांकि, यह फिलहाल हरक सिंह रावत का राजनीतिक आकलन है और चुनाव में अभी समय बाकी है। ऐसे में वास्तविक चुनावी नतीजे जनता के अंतिम फैसले और उस समय के राजनीतिक माहौल पर निर्भर करेंगे।
2017 और 2022 का भी किया जिक्र
हरक सिंह रावत ने उत्तराखंड के पिछले विधानसभा चुनावों के आंकड़ों और दोनों प्रमुख दलों के प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने माना कि वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के वोट प्रतिशत के बीच उल्लेखनीय अंतर रहा था। लेकिन उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में तस्वीर पहले जैसी नहीं दिखाई दे रही है।
रावत के मुताबिक, आने वाले महीनों में यदि कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत करती है और भाजपा के वोट प्रतिशत में कमी आती है, तो दोनों दलों के बीच मुकाबला और कड़ा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव से पहले के तीन-चार महीने राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं और इस दौरान मतदाताओं का रुझान कई बार तेजी से बदलता है।
महेंद्र भट्ट पर भी हरक सिंह का तीखा हमला
राजनीतिक बयानबाजी के दौरान हरक सिंह रावत ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पर भी निशाना साधा। उन्होंने महेंद्र भट्ट के राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह वर्ष 1997 में मंत्री हुआ करते थे, तब महेंद्र भट्ट उनके समर्थन में नारे लगाया करते थे।
रावत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि महेंद्र भट्ट फिलहाल “ख्वाब में जी रहे हैं।” उनके इस बयान को उत्तराखंड की सियासत में एक और राजनीतिक तंज के तौर पर देखा जा रहा है। हरक सिंह रावत इससे पहले भी भाजपा नेताओं और प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर कई बार सवाल उठाते रहे हैं।
उन्होंने अपने छात्र राजनीति के दिनों को याद करते हुए कहा कि उस दौर में राजनीतिक विरोध और समर्थन का अलग माहौल था। उन्होंने बताया कि जब वह एबीवीपी में महामंत्री थे, तब एनएसयूआई के कार्यकर्ता उनके खिलाफ नारे लगाया करते थे। रावत ने कहा कि राजनीति में विरोध होना लोकतंत्र का हिस्सा है और उन्हें उस समय भी इस तरह के विरोध से परेशानी नहीं होती थी।
“जो कभी विरोध में नारे लगाते थे, आज मेरे चेले हैं”
हरक सिंह रावत ने अपने बयान में छात्र राजनीति के पुराने दौर और आज की परिस्थितियों के बीच तुलना भी की। उन्होंने कहा कि उस समय जो युवा उनके खिलाफ नारे लगाया करते थे, उनमें से कुछ आज उनके राजनीतिक संपर्क में हैं और वह उन्हें अपने पुराने राजनीतिक दौर से जोड़कर देखते हैं।
रावत के इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि वह अपने लंबे राजनीतिक अनुभव को मौजूदा चुनावी परिस्थितियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने उत्तराखंड की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और जनता के मूड को समझने का उन्हें लंबा अनुभव है।
पौड़ी, चमोली और उत्तरकाशी में महसूस किया बदलाव
कांग्रेस नेता ने अपने दावे के समर्थन में जमीनी स्तर पर लोगों से मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पौड़ी, चमोली और उत्तरकाशी सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाने के दौरान उन्हें लोगों के बीच राजनीतिक बदलाव का एहसास हुआ है।
रावत के मुताबिक, वह लगातार जनता के बीच जाकर राजनीतिक परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि लोगों के रुझान में बदलाव दिखाई दे रहा है और इसका असर आने वाले चुनाव में देखने को मिल सकता है।
हालांकि, उत्तराखंड की राजनीति में क्षेत्रीय समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। पहाड़ी जिलों, मैदानी क्षेत्रों, युवाओं, कर्मचारियों, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच मुद्दे अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में किसी एक क्षेत्र या सीमित जनसंपर्क के आधार पर पूरे प्रदेश का चुनावी रुझान तय करना जल्दबाजी भी हो सकती है।
चुनाव से पहले तीन-चार महीने होंगे अहम
हरक सिंह रावत ने खुद भी माना कि अभी चुनाव में समय बाकी है। उन्होंने कहा कि अगले तीन-चार महीनों में राजनीतिक परिस्थितियां काफी बदल सकती हैं। यही वजह है कि उनका मौजूदा आकलन अंतिम तस्वीर नहीं है, बल्कि वर्तमान राजनीतिक माहौल को देखकर लगाया गया अनुमान है।
उत्तराखंड में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही चुनावी तैयारियों को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में नेताओं के बयान भी लगातार राजनीतिक माहौल को गर्म कर रहे हैं। कांग्रेस जहां सरकार के खिलाफ मुद्दे तलाश रही है, वहीं भाजपा अपने संगठन और सरकार के कामकाज के आधार पर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है।
हरक सिंह रावत का ताजा बयान इसी राजनीतिक खींचतान के बीच आया है। उन्होंने एक तरफ कांग्रेस के लिए बेहतर संभावनाओं का दावा किया है, तो दूसरी तरफ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पर व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी भी की है।
फिलहाल हरक सिंह रावत के दावे ने उत्तराखंड की सियासत में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी और भाजपा के वोट में संभावित गिरावट का उनका आकलन कितना सही साबित होता है, इसका फैसला चुनाव के दौरान ही होगा। लेकिन इतना साफ है कि विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में राजनीतिक तापमान बढ़ने लगा है और आने वाले महीनों में दोनों प्रमुख दलों के बीच बयानबाजी और सियासी मुकाबला और तेज होने की संभावना है।
