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उत्तराखंड: हरीश रावत की नाराजगी के बीच बढ़ी हलचल, यशपाल आर्य ने की मुलाकात—कांग्रेस में सियासी तापमान तेज

The Hill India News
Last updated: April 6, 2026 10:11 am
The Hill India News
Published: April 6, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों खासा गरमाई हुई है, और इसके केंद्र में हैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत । उनके 15 दिन के ‘राजनीतिक अवकाश’ ने न सिर्फ पार्टी के भीतर हलचल मचा दी है, बल्कि सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलों को भी जन्म दे दिया है। इसी बीच सोमवार को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य  का हरीश रावत के आवास पर पहुंचना इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

दरअसल, 27 मार्च से हरीश रावत ने खुद को 15 दिनों के लिए सक्रिय राजनीति से अलग रखने का ऐलान किया था। हालांकि इसे उन्होंने औपचारिक रूप से ‘राजनीतिक अवकाश’ बताया, लेकिन पार्टी के भीतर और बाहर इसे उनकी नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि रामनगर के स्थानीय नेता संजय नेगी को कांग्रेस में शामिल कराने की उनकी कोशिश को हाईकमान से मंजूरी न मिलने के कारण वे असंतुष्ट हैं। यही असंतोष अब एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में सामने आ रहा है।

हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली चेहरों में से एक रहे हैं। उन्होंने राज्य में पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में उनकी नाराजगी को हल्के में नहीं लिया जा रहा। कांग्रेस के कई नेता मानते हैं कि रावत की अनदेखी पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है, खासकर तब जब 2027 के विधानसभा चुनाव दूर नहीं हैं।

इस पूरे विवाद को उस समय और हवा मिली जब पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने सार्वजनिक तौर पर हरीश रावत के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि रावत जैसे नेता को नाराज करके कांग्रेस उत्तराखंड में सत्ता में वापसी का सपना नहीं देख सकती। कुंजवाल के इस बयान ने साफ कर दिया कि पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग हरीश रावत के साथ खड़ा है।

हालांकि, इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए। वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने कुंजवाल के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के बिना पार्टी खत्म नहीं होती और किसी को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि उसके बिना जीत संभव नहीं है। हरक सिंह रावत के इस बयान ने पार्टी के भीतर विवाद को और गहरा कर दिया।

हरक सिंह के बयान पर हरीश रावत के समर्थक भी आक्रामक हो गए। खासकर विधायक हरीश  धामी ने खुलकर विरोध जताते हुए उनके बयान की कड़ी आलोचना की। इतना ही नहीं, उन्होंने समर्थकों से सामूहिक इस्तीफे तक की बात कह डाली, जिससे पार्टी में हड़कंप मच गया। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी बीच, एक और घटनाक्रम ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया। बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री खजान दास की हरीश रावत से मुलाकात चर्चा का विषय बन गई। इस मुलाकात के बाद यह अटकलें भी लगने लगीं कि क्या हरीश रावत कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेने वाले हैं, या फिर वे पार्टी बदलने की दिशा में सोच रहे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इसे महज शिष्टाचार भेंट बताया गया और इन अटकलों को खारिज कर दिया गया।

इन सब घटनाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। जब पार्टी एक बड़े संकट से जूझ रही है, तब शीर्ष नेतृत्व की खामोशी को लेकर कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

ऐसे माहौल में सोमवार को Yashpal Arya का हरीश रावत से मिलना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मुलाकात के बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच प्रदेश के समसामयिक मुद्दों, जनहित से जुड़े विषयों और उत्तराखंड के विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने इसे एक सकारात्मक और सार्थक संवाद बताया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसके जरिए पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को सुलझाने की कोशिश की गई है। यशपाल आर्या का यह कदम संकेत देता है कि कांग्रेस नेतृत्व अब स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय हो रहा है।

फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि हरीश रावत का ‘राजनीतिक अवकाश’ समाप्त होने के बाद वे क्या रुख अपनाते हैं। क्या उनकी नाराजगी दूर होगी, या फिर उत्तराखंड कांग्रेस में यह विवाद और गहराएगा—यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। लेकिन इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है, और कांग्रेस के लिए यह समय एकजुटता दिखाने की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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