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The Hill India > Blog > दिल्ली > दिल्ली हाई कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की दलील: “मैं अपना केस खुद लड़ूंगा”, सुनवाई अगले सोमवार तक टली
दिल्लीफीचर्ड

दिल्ली हाई कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की दलील: “मैं अपना केस खुद लड़ूंगा”, सुनवाई अगले सोमवार तक टली

The Hill India News
Last updated: April 6, 2026 10:37 am
The Hill India News
Published: April 6, 2026
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नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल से जुड़े कथित आबकारी नीति घोटाले के मामले में आज दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान एक अहम मोड़ देखने को मिला। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल पहली बार अपने मामले में खुद कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह अपना केस स्वयं लड़ना चाहते हैं। इस दौरान अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और केजरीवाल के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।

सुनवाई की शुरुआत लंच के बाद हुई, जब केजरीवाल अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल के साथ अदालत में मौजूद थे। कोर्ट परिसर में दोनों पहली कतार में बैठे नजर आए। इससे पहले दिन में केजरीवाल दिल्ली हाई कोर्ट के लिए रवाना हुए थे और पहले से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वह अपने केस की पैरवी खुद करेंगे।

खुद पैरवी को लेकर उठा विवाद

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल के खुद केस लड़ने के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने अदालत से कहा कि यह उनकी याचिका है और इस तरह की स्थिति में यह स्पष्ट होना चाहिए कि दलील कौन पेश करेगा। मेहता ने यह भी कहा कि अगर केजरीवाल खुद पेश हो रहे हैं, तो उन्हें पूरी जिरह खुद ही करनी चाहिए, या फिर उनके वकील को यह जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

मेहता ने अप्रत्यक्ष रूप से केजरीवाल पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि कुछ लोग आरोप लगाकर अपना करियर बनाते हैं। उनके इस बयान के बाद कोर्ट में माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें शांतिपूर्वक सुनीं।

कोर्ट का रुख और अगली सुनवाई

मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फिलहाल कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की और मामले को अगले सप्ताह तक स्थगित कर दिया। अब इस केस की अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी।

इस दौरान केजरीवाल ने अदालत से एक और महत्वपूर्ण मांग की। उन्होंने अनुरोध किया कि उनके मामले को किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर किया जाए। हालांकि इस पर अदालत ने तुरंत कोई निर्णय नहीं दिया और कहा कि इस पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।

आबकारी नीति केस का पूरा मामला

यह पूरा विवाद दिल्ली की नई आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसे लागू करने के बाद विपक्ष और जांच एजेंसियों ने इसमें कथित अनियमितताओं और घोटाले के आरोप लगाए थे। इस मामले में आम आदमी पार्टी के कई नेताओं पर भी जांच चल रही है और केजरीवाल का नाम भी इसी सिलसिले में सामने आया है।

केजरीवाल लगातार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार और विपक्षी दल उन्हें और उनकी पार्टी को बदनाम करने के लिए इस तरह के मामलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां इसे एक गंभीर आर्थिक अनियमितता का मामला बता रही हैं।

खुद केस लड़ने का फैसला क्यों अहम?

किसी बड़े राजनीतिक नेता द्वारा अदालत में खुद अपनी पैरवी करना एक असामान्य कदम माना जाता है। आमतौर पर ऐसे मामलों में वरिष्ठ वकीलों की टीम अदालत में दलील पेश करती है। लेकिन केजरीवाल का यह फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वह सीधे अपनी बात अदालत के सामने रख पाएंगे और अपने पक्ष को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं। हालांकि, यह रणनीति जोखिम भरी भी हो सकती है, क्योंकि अदालत में कानूनी बारीकियों को समझना और सही तरीके से प्रस्तुत करना बेहद जरूरी होता है।

अन्य नेताओं का उदाहरण

हाल के समय में कुछ अन्य नेताओं ने भी अदालत में खुद पेश होकर अपनी दलीलें रखी हैं। उदाहरण के तौर पर ममता बनर्जी ने भी एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में खुद अपनी बात रखी थी। ऐसे उदाहरण यह दिखाते हैं कि बड़े नेता अब कानूनी लड़ाइयों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

अब सभी की नजरें अगले सोमवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केजरीवाल अपने केस को खुद लड़ने के फैसले पर कायम रहते हैं और अदालत उनके ट्रांसफर आवेदन पर क्या रुख अपनाती है। इस मामले का असर न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में यह केस दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर तब जब चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा है। फिलहाल, अदालत की अगली तारीख तक इस मामले में कोई बड़ा फैसला नहीं आया है, लेकिन आज की सुनवाई ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मामला और भी ज्यादा चर्चा में रहने वाला है।

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