
देहरादून (ब्यूरो): देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड की शांत वादियों में हाल के दिनों में हुई जघन्य आपराधिक घटनाओं ने न केवल आम जनता को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सूबे की सियासत में भी उबाल ला दिया है। राजधानी देहरादून में बेलगाम होते अपराधियों और चरमराती कानून व्यवस्था के खिलाफ रविवार को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सड़कों पर उतरकर अपनी ताकत दिखाई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और यूथ कांग्रेस उपाध्यक्ष विनीत प्रसाद भट्ट ‘बंटू’ के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश मुख्यालय से लेकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) तक एक विशाल मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया।
मशालों की रोशनी में सरकार के खिलाफ हुंकार
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत, रविवार शाम बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता और दिग्गज नेता राजपुर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय में एकत्रित हुए। जैसे ही सूरज ढला, हाथों में जलती मशालें और जुबां पर ‘सरकार विरोधी’ नारों के साथ कांग्रेसियों का रेला पुलिस मुख्यालय की ओर चल पड़ा। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मुख्यमंत्री के नाक के नीचे अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस केवल मूकदर्शक बनी हुई है।
इस देहरादून कानून व्यवस्था कांग्रेस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि अपराधों पर अंकुश नहीं लगा, तो यह मशाल की चिंगारी पूरे प्रदेश में एक बड़े जन-आंदोलन की आग बन जाएगी।

‘खौफ के साये में राजधानी’: गणेश गोदियाल का तीखा हमला
जुलूस के समापन पर पुलिस मुख्यालय के समीप कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आंकड़ों और घटनाओं का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर तीखे बाण छोड़े। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने के भीतर देहरादून ने वह मंजर देखे हैं, जिसकी कल्पना कभी शांत ‘देवभूमि’ में नहीं की गई थी।
“उत्तराखंड को दुनिया शांति के लिए जानती थी, लेकिन आज देहरादून की पहचान ‘क्राइम कैपिटल’ के रूप में होने लगी है। दिनदहाड़े हत्याएं हो रही हैं, व्यापारियों को निशाना बनाया जा रहा है और महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। क्या यही वह सुशासन है जिसका वादा सरकार ने किया था?” — गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
गोदियाल ने जोर देकर कहा कि अपराधियों के मन से पुलिस का इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन केवल वीआईपी मूवमेंट में व्यस्त है, जबकि आम आदमी असुरक्षा के वातावरण में जीने को मजबूर है।
इन घटनाओं ने दहलाया देहरादून: कांग्रेस ने गिनाईं नाकामियां
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने हालिया कुछ ऐसी घटनाओं का जिक्र किया जिन्होंने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है:
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ब्रिगेडियर की हत्या: 30 मार्च को सुबह की सैर पर निकले रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की सरेराह हत्या ने सुरक्षा दावों को ध्वस्त कर दिया।
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तिब्बती बाजार हत्याकांड: पुलिस मुख्यालय से महज 200 मीटर की दूरी पर एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जो पुलिस की मुस्तैदी पर बड़ा सवालिया निशान है।
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मॉल में व्यवसायी की हत्या: राजपुर रोड स्थित एक प्रतिष्ठित मॉल में दिनदहाड़े व्यवसायी की हत्या ने व्यापारियों के भीतर दहशत पैदा कर दी है।
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युवती की गला रेतकर हत्या: कोतवाली क्षेत्र में एक युवती की नृशंस हत्या ने महिला सुरक्षा के दावों को बेनकाब कर दिया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इन अधिकांश मामलों में मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं, जो जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रशासनिक तंत्र और खुफिया विभाग पर सवाल
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि देहरादून कानून व्यवस्था कांग्रेस प्रदर्शन केवल एक सियासी स्टंट नहीं है, बल्कि यह जनता के भीतर पनप रहे गुस्से का प्रतिबिंब है। राजधानी में जिस तरह से पुलिस मुख्यालय और संवेदनशील इलाकों के पास मर्डर हो रहे हैं, उसने खुफिया विभाग (एलआईयू) की विफलता को भी उजागर किया है। कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि पुलिस अपनी कार्यशैली में सुधार करे और अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाए।
यूथ कांग्रेस का तेवर: ‘अब चुप नहीं बैठेंगे’
यूथ कांग्रेस उपाध्यक्ष विनीत प्रसाद भट्ट ‘बंटू’ ने कहा कि युवा वर्ग आज सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजधानी की कानून व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। उन्होंने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि अगले कुछ दिनों में सभी लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं हुआ और दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो कांग्रेस कार्यकर्ता जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे।

सरकार के लिए बड़ी चुनौती
इस मशाल जुलूस के जरिए कांग्रेस ने न केवल अपनी एकजुटता दिखाई है, बल्कि आगामी निकाय और अन्य चुनावों के लिए कानून व्यवस्था को एक बड़ा मुद्दा बनाने के संकेत भी दे दिए हैं। अब गेंद सरकार और पुलिस प्रशासन के पाले में है। क्या पुलिस इन अनसुलझी गुत्थियों को सुलझाकर जनता में विश्वास बहाल कर पाएगी? या फिर राजधानी में बढ़ता यह ‘क्राइम ग्राफ’ सरकार के लिए गले की हड्डी बन जाएगा?
आने वाले दिन उत्तराखंड की राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर शांत बैठने के मूड में कतई नहीं है।



