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देशफीचर्ड

NCERT को नई पहचान—डीम्ड यूनिवर्सिटी बनकर शुरू करेगा कोर्स और कैंपस

Rajesh Dabral
Last updated: April 3, 2026 5:39 am
Rajesh Dabral
Published: April 3, 2026
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा दे दिया है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह दर्जा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) अधिनियम, 1956 की धारा 3 के तहत प्रदान किया गया है। इस फैसले के साथ ही NCERT अब देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डिप्लोमा, स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG), डॉक्टरेट और विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू कर सकेगा।

Contents
NCERT का बढ़ा दायरा, अब देगा डिग्री कोर्सछह घटक इकाइयों पर भी लागू होगा फैसलाऑफ-कैंपस और ऑफशोर सेंटर खोलने की अनुमतितीन साल की प्रक्रिया के बाद मिला दर्जाशिक्षा व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?NEP 2020 के विजन की ओर बड़ा कदम

यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के लक्ष्यों के अनुरूप माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, शोध-आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

NCERT का बढ़ा दायरा, अब देगा डिग्री कोर्स

डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद NCERT अब केवल पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएगा। अब यह संस्थान शिक्षक शिक्षा, शैक्षणिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर डिग्री और डिप्लोमा कोर्स शुरू कर सकेगा।

अधिसूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि NCERT को शोध कार्यक्रमों को बढ़ावा देने, डॉक्टोरल अध्ययन शुरू करने और अभिनव शैक्षणिक पाठ्यक्रम विकसित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। इससे देश में शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।

छह घटक इकाइयों पर भी लागू होगा फैसला

सरकार का यह फैसला केवल दिल्ली स्थित NCERT मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके छह प्रमुख घटक संस्थानों पर भी लागू होगा। ये संस्थान देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं और शिक्षक शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, अजमेर (राजस्थान)
  • क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल (मध्य प्रदेश)
  • क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भुवनेश्वर (ओडिशा)
  • क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, मैसूर (कर्नाटक)
  • पूर्वोत्तर क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, शिलांग (मेघालय)
  • पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल

इन सभी संस्थानों को अब एकीकृत रूप से ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का हिस्सा माना जाएगा, जिससे इनके शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

ऑफ-कैंपस और ऑफशोर सेंटर खोलने की अनुमति

इस नई मान्यता के तहत NCERT को देश और विदेश में ऑफ-कैंपस तथा ऑफशोर सेंटर खोलने की अनुमति भी दी गई है। हालांकि इसके लिए उसे UGC द्वारा निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। इससे भारतीय शिक्षा मॉडल को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने में मदद मिल सकती है।

तीन साल की प्रक्रिया के बाद मिला दर्जा

NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की प्रक्रिया लगभग तीन वर्षों तक चली। इसकी शुरुआत UGC पोर्टल पर आवेदन से हुई थी। इसके बाद अगस्त 2023 में ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ जारी किया गया। नवंबर 2025 में संस्थान ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे UGC की विशेषज्ञ समिति ने स्वीकार कर लिया।

अंततः 30 जनवरी 2026 को UGC की 595वीं बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसके बाद केंद्र सरकार ने औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी।

शिक्षा व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से देश में शिक्षक शिक्षा और शैक्षणिक अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी। NCERT के पास पहले से ही पाठ्यक्रम निर्माण और शैक्षिक अनुसंधान का व्यापक अनुभव है, ऐसे में अब डिग्री प्रोग्राम शुरू करने से यह संस्थान और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।

इसके अलावा, यह कदम भारत में शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में भी सहायक हो सकता है। खासतौर पर शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में यह बदलाव लंबे समय में सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

NEP 2020 के विजन की ओर बड़ा कदम

सरकार का यह फैसला NEP 2020 के उस विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों को अधिक स्वायत्तता देने और उन्हें बहु-विषयक (multidisciplinary) बनाने पर जोर दिया गया है।

NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने से न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़ेगी, बल्कि यह देश में शिक्षा सुधार की दिशा में एक मील का पत्थर भी साबित हो सकता है।


कुल मिलाकर, NCERT का यह नया दर्जा भारत की शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह संस्थान किस तरह अपने नए अधिकारों और जिम्मेदारियों का उपयोग करता है और शिक्षा क्षेत्र में किस तरह का बदलाव लाता है।

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