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उत्तराखंड: बेरीनाग तहसीलदार के साथ दफ्तर में बदसलूकी और धक्का-मुक्की, क्षेत्र पंचायत सदस्य गिरफ्तार; आक्रोशित कर्मियों का धरना शुरू

बेरीनाग (पिथौरागढ़)। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के बेरीनाग तहसील परिसर में गुरुवार को उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी के बीच तीखी झड़प हो गई। तहसीलदार वतन गुप्ता ने क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC Member) पर कार्यालय में घुसकर गाली-गलौज करने, सरकारी दस्तावेजों को फाड़ने और धक्का-मुक्की करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं इस घटना के विरोध में तहसील के समस्त कर्मचारियों ने कार्यबहिष्कार कर मुख्य गेट पर धरना शुरू कर दिया है।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

मिली जानकारी के अनुसार, घटना बृहस्पतिवार दोपहर लगभग 12 बजे की है। तहसीलदार वतन गुप्ता अपने कार्यालय में नियमित कार्य निपटा रहे थे। इसी दौरान बडेट बाफिला क्षेत्र के पंचायत सदस्य नीरज शाह अपने कुछ समर्थकों के साथ कक्ष में दाखिल हुए। आरोप है कि कक्ष में प्रवेश करते ही नीरज शाह मोबाइल से वीडियो बनाने लगे। जब तहसीलदार ने कार्यालय की मर्यादा का हवाला देते हुए वीडियो बनाने से मना किया, तो विवाद की स्थिति पैदा हो गई।

तहसीलदार वतन गुप्ता ने अपनी तहरीर में उल्लेख किया है कि मना करने पर नीरज शाह उग्र हो गए और उच्च स्वर में गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि उन्होंने मेज पर रखे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को नुकसान पहुँचाया और तहसीलदार के साथ धक्का-मुक्की करने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख कार्यालय में मौजूद सुरक्षा गार्डों ने हस्तक्षेप किया और आरोपी को कक्ष से बाहर निकाला, जिसके बाद भी वह परिसर में चिल्लाते हुए अभद्र व्यवहार करता रहा।

धाराओं के घेरे में जनप्रतिनिधि: पुलिस की कार्रवाई

तहसीलदार की ओर से दी गई लिखित तहरीर के आधार पर बेरीनाग पुलिस ने तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज किया है। कोतवाल नरेश कुमार गंगवार ने पुष्टि की है कि आरोपी नीरज शाह को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न सुसंगत धाराओं (पूर्ववर्ती धाराओं के संदर्भ में 11/26, 221/351(3)/352) के तहत मामला पंजीकृत किया है।

कोतवाल गंगवार ने बताया, “प्रशासनिक अधिकारी के साथ हुई इस घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया गया है। सरकारी कार्य में बाधा डालने और अधिकारी के साथ बदसलूकी करने के मामले में कानून सम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी।


तहसील कर्मियों का फूटा गुस्सा, न्याय की मांग पर अड़े कर्मचारी

इस घटना ने तहसील के राजस्व निरीक्षकों और अन्य कर्मचारियों में भारी रोष पैदा कर दिया है। घटना के तुरंत बाद सभी विभागों के कर्मचारी अपने कमरों से बाहर निकल आए और मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना है कि यदि निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही कानून के रक्षकों के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे, तो वे सुरक्षित माहौल में कार्य कैसे कर पाएंगे?

धरने में शामिल मुख्य चेहरे: आंदोलन का नेतृत्व करते हुए कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें कार्यस्थल पर पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन नहीं मिलता और आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी नजीर पेश नहीं की जाती, तब तक उनका कार्यबहिष्कार जारी रहेगा। प्रदर्शन करने वालों में तहसीलदार वतन गुप्ता के साथ रजिस्टार कानूनगो दीपक कुमार, पेशकार योगेश कार्की, राजस्व निरीक्षक जगदीश परिहार, युवराज गोस्वामी, पारस कन्याल, शैलेन्द्र सिंह, रक्षित, हेमंत कुमार, संजय खडायत, राहुल खाती, सूर्यप्रकाश पांडे और लक्ष्मी शंकर थावल सहित दर्जनों कर्मचारी शामिल रहे।


आरोपी पक्ष की सफाई: “जनता की समस्याओं को दबाने की कोशिश”

दूसरी ओर, गिरफ्तार किए गए क्षेत्र पंचायत सदस्य नीरज शाह ने इन सभी आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है। जेल जाने से पूर्व शाह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह क्षेत्र की सड़क, पेयजल और अन्य जनसमस्याओं को लेकर पिछले कई समय से पत्राचार कर रहे थे, लेकिन प्रशासन मौन बना हुआ था।

नीरज शाह का दावा है, “मैं जनता की आवाज लेकर तहसीलदार के पास गया था। मैंने पहले भी पत्र दिए थे जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब मैंने सवाल पूछे, तो तहसीलदार ने मेरा मोबाइल छीन लिया और सुरक्षाकर्मियों के जरिए मुझे जबरन बाहर निकाल दिया। मैंने खुद 112 डायल कर पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन उल्टा मुझे ही झूठे मुकदमे में फंसाया जा रहा है।”

प्रशासनिक तनाव और आगामी प्रभाव

बेरीनाग में उपजा यह बेरीनाग तहसीलदार विवाद अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां प्रशासनिक ढांचा अपनी गरिमा की रक्षा के लिए लामबंद है, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बढ़ता ‘ईगो क्लैश’ विकास कार्यों में बाधा बन सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचा, तो तहसील से जुड़े आम लोगों के प्रमाण पत्र, भूमि विवाद और अन्य आवश्यक कार्य बुरी तरह प्रभावित होंगे।

वर्तमान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और तहसील परिसर में पुलिस बल तैनात है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कर्मचारियों को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है और पुलिस जांच में दस्तावेजों के नुकसान की पुष्टि किस स्तर तक होती है।

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