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कैंची धाम में उमड़ा आस्था का महाकुंभ: हनुमान जयंती पर 25 हजार भक्तों ने टेका बाबा नीम करौली के दर पर मत्था

नैनीताल। देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में स्थित विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में मंगलवार को हनुमान जयंती के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। बाबा नीम करौली महाराज के इस पावन दरबार में सुबह की पहली किरण के साथ ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी पहुंचे बाबा के अनुयायियों ने कतारबद्ध होकर अपने आराध्य के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।

भक्ति के रंग में रंगा कैंची धाम

हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में कैंची धाम का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस विशेष अवसर पर करीब 25 हजार से अधिक भक्तों ने मंदिर में उपस्थिति दर्ज कराई। बाबा नीम करौली महाराज, जिन्हें स्वयं हनुमान जी का अवतार माना जाता है, उनके प्रति भक्तों की अटूट आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर सड़क तक कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं।

सुबह की आरती के साथ ही संपूर्ण परिसर ‘जय बाबा नीम करौली’ और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। मंदिर के भीतर और बाहर श्रद्धालु भजन-कीर्तन में लीन नजर आए। विदेशी पर्यटकों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को वैश्विक स्वरूप प्रदान किया, जो बाबा की शिक्षाओं और उनके चमत्कारों के प्रति दुनिया भर में बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है।

प्रशासनिक चुस्ती और सुव्यवस्थित दर्शन

भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कैंची धाम की संकरी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) एक बड़ी चुनौती थी, जिसे पुलिस बल की मुस्तैदी ने सरल बना दिया। श्रद्धालुओं को छोटे-छोटे जत्थों में मंदिर के भीतर प्रवेश दिया गया, ताकि किसी भी प्रकार की भगदड़ या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।

यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए भवाली-अल्मोड़ा हाईवे पर विशेष पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और विश्राम की भी समुचित व्यवस्था की थी, जिससे भीषण गर्मी के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।


नैनीताल: सरोवर नगरी में गूंजा हनुमान चालीसा

हनुमान जन्मोत्सव का उत्साह केवल कैंची धाम तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी सरोवर नगरी नैनीताल भक्ति के रंग में डूबी नजर आई। नगर के ऐतिहासिक मां नैना देवी मंदिर और हनुमानगढ़ी धाम में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था।

नैना देवी मंदिर में भव्य आयोजन: नैना देवी मंदिर परिसर में प्रातः काल सामूहिक हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया गया। विद्वान पुरोहितों के सानिध्य में आयोजित इस पूजन में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। पाठ के समापन के पश्चात हनुमान जी को 101 किलो लड्डुओं का भोग लगाया गया, जिसे बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।

भंडारे और सेवा कार्य: हनुमान भक्त संगठन की ओर से नगर के प्रसिद्ध चाट पार्क में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यहाँ सैकड़ों लोगों ने पूरी-सब्जी और हलवे का प्रसाद ग्रहण किया। सेवा का यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। इसके अतिरिक्त, कैपिटल सिनेमा के समीप स्थित विशाल भगवा ध्वज को भी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत बदला गया, जो शहर के मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।

आस्था और पर्यटन का अद्भुत मेल

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में बाबा नीम करौली के प्रति युवाओं और वैश्विक हस्तियों के जुड़ाव के कारण कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। हनुमान जयंती जैसे पर्वों पर यह भीड़ न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करती है।

देर शाम तक कैंची धाम और नैनीताल के अन्य मंदिरों में दीपोत्सव और विशेष आरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं के चेहरे पर बाबा के दर्शन की तृप्ति और हनुमान जी के प्रति समर्पण का भाव साफ झलक रहा था। वास्तव में, इस वर्ष की हनुमान जयंती नैनीताल के इतिहास में भक्ति और व्यवस्था के समन्वय की एक नई मिसाल पेश कर गई।

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