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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड: बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों पर सख्ती, बिना अनुमति कार्यक्रम करने पर ₹50,000 तक जुर्माना

Rajesh Dabral
Last updated: April 2, 2026 11:43 am
Rajesh Dabral
Published: April 2, 2026
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चमोली: उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बदरीनाथ धाम में इस वर्ष से धार्मिक आयोजनों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। नगर पंचायत बदरीनाथ ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन—जैसे भागवत कथा, भंडारा या अन्य विशेष कार्यक्रम—कराने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर अधिकतम 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

व्यवस्था सुधारने के लिए उठाया गया कदम

हर साल चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें से कई बिना अनुमति के होते थे। इससे क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं सामने आती थीं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए नगर पंचायत ने यह नया नियम लागू करने का निर्णय लिया है।

प्रशासन का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य तीर्थ क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखना, भीड़ को नियंत्रित करना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अब किसी भी आयोजन के लिए पहले से आवेदन करना होगा और अनुमति मिलने के बाद ही कार्यक्रम आयोजित किया जा सकेगा।

तीन नई उपविधियों का गठन

नगर पंचायत ने व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तीन नई उपविधियां भी तैयार की हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्न बिंदु शामिल हैं:

  1. मांसाहार पर पूर्ण प्रतिबंध:
    बदरीनाथ क्षेत्र में मांसाहार के परिवहन और उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय धार्मिक आस्था और क्षेत्र की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
  2. झुग्गी-झोपड़ी और अस्थायी निर्माण पर नियंत्रण:
    अब कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के अस्थायी आवास या झुग्गी-झोपड़ी नहीं बना सकेगा। यदि किसी को निर्माण करना है, तो पहले नगर पंचायत से अनुमति लेनी होगी। साथ ही शौचालय निर्माण को अनिवार्य किया गया है।
  3. स्वच्छता और व्यवस्था के नियम:
    सभी आयोजनों में स्वच्छता के सख्त मानकों का पालन करना होगा। इसके तहत कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई और सार्वजनिक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

यूजर चार्ज और सुविधाओं पर जोर

नगर पंचायत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुमति लेने के साथ-साथ आयोजकों को यूजर चार्ज भी देना होगा। इस राशि का उपयोग क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं विकसित करने के लिए किया जाएगा। इसमें अस्थायी और स्थायी शौचालयों का निर्माण, सफाई व्यवस्था और अन्य जरूरी सेवाएं शामिल हैं।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

ज्योतिर्मठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि इन उपविधियों को गजट नोटिफिकेशन के बाद पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। वहीं नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सुनील पुरोहित ने कहा कि पिछले वर्षों में कुछ लोग मांसाहार के साथ पकड़े गए थे, जिसके बाद यह सख्त निर्णय लिया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चारधाम यात्रा की तैयारियां तेज

इस साल चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे, इसके बाद 21 अप्रैल को केदारनाथ और 22 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

यात्रा सीजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक आयोजन करते हैं, इसलिए प्रशासन पहले से ही तैयारियों में जुट गया है। नए नियमों के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यात्रा सुचारू रूप से संपन्न हो और किसी प्रकार की अव्यवस्था न फैले।

क्या होगा असर?

इन नए नियमों का सीधा असर उन श्रद्धालुओं और आयोजकों पर पड़ेगा, जो बिना अनुमति के कार्यक्रम आयोजित करते थे। अब उन्हें पहले से योजना बनाकर अनुमति लेनी होगी। इससे एक ओर जहां प्रशासन को व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर तीर्थ स्थल की स्वच्छता और पवित्रता भी बनी रहेगी।

हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो सकती है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह कदम सभी के हित में उठाया गया है और इससे यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

 

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