देहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हाल ही में हुए रिटायर्ड ब्रिगेडियर हत्याकांड ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस घटना के बाद बैकफुट पर आई उत्तराखंड पुलिस अब पूरी तरह से आक्रामक मोड में है। अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन प्रहार उत्तराखंड पुलिस के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित हो रहा है। इसी अभियान के तहत दून पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए बिहार के कुख्यात ‘कल्लू गैंग’ के एक लाख रुपये के इनामी अपराधी राजा साहनी को गिरफ्तार किया है।
पकड़ा गया अपराधी न केवल शातिर है, बल्कि छह महीने पहले ओडिशा की कटक जेल को तोड़कर फरार होकर पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। उसकी गिरफ्तारी के बाद से सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई है।
खुफिया इनपुट और हाई-प्रोफाइल घेराबंदी
इस ऑपरेशन की पटकथा तब शुरू हुई जब ओडिशा पुलिस ने देहरादून पुलिस के साथ एक बेहद गोपनीय इनपुट साझा किया। सूचना के मुताबिक, ओडिशा के जिला कारागार कटक से जेल ब्रेक कर फरार हुआ एक लाख का इनामी अपराधी राजा साहनी ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट क्षेत्र में सक्रिय है। वह स्वर्ण रंग (गोल्डन) की स्विफ्ट डिजायर कार में घूम रहा था और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने या सुरक्षित ठिकाना ढूंढने की फिराक में था।
एसएसपी देहरादून ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ‘एक्शन प्लान’ तैयार किया। ऑपरेशन प्रहार उत्तराखंड पुलिस के तहत क्षेत्राधिकारी ऋषिकेश के नेतृत्व में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया, जिसमें ओडिशा पुलिस के अधिकारियों को भी शामिल किया गया।
सीसीटीवी और जाल: सुमन पार्क के पास हुआ अंत
पुलिस की संयुक्त टीम ने ऋषिकेश के चप्पे-चप्पे को खंगालना शुरू किया। दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और स्थानीय मुखबिरों के तंत्र को सक्रिय किया गया। अंततः पुलिस को संदिग्ध कार संख्या (PB-10-DN-0508) का पता चला। पुलिस ने बिना समय गंवाए नटराज चौक से टिहरी जाने वाले मार्ग पर घेराबंदी की।
जैसे ही संदिग्ध कार सुमन पार्क के पास पहुंची, पुलिस की टीम ने उसे चारों ओर से घेर लिया। कार की पिछली सीट पर बैठे व्यक्ति की पहचान जैसे ही राजा साहनी के रूप में हुई, पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधी को संभलने तक का मौका नहीं दिया।
कौन है राजा साहनी और क्या है इसका काला इतिहास?
गिरफ्तार आरोपी राजा साहनी पुत्र महेश साहनी, मूल रूप से बिहार के बेगूसराय जिले के लोदिया नगर (थाना मीरगंज) का निवासी है। वह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय ‘कल्लू गैंग’ का एक सक्रिय और खतरनाक सदस्य है।
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जेल ब्रेक कांड: राजा साहनी कटक की जिला कारागार में न्यायिक अभिरक्षा में बंद था, लेकिन अक्टूबर 2025 में वह फिल्मी अंदाज में जेल तोड़कर फरार होने में कामयाब रहा।
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इनाम की घोषणा: जेल से फरार होने के बाद ओडिशा पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया था।
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आपराधिक रिकॉर्ड: आरोपी के खिलाफ ओडिशा के विभिन्न थानों में गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। इनमें थाना चौदवार (कटक) में मु.अ.सं. 594/25 (धारा 262, 3(5) BNS) और थाना पानीकोईली (जजपुर) में मु.अ.सं. 07/25 (धारा 109, 310(3), 61(2)(A) BNS) प्रमुख हैं।
अंतरराज्यीय जांच के दायरे में ‘कल्लू गैंग’
प्रारंभिक पूछताछ में राजा साहनी ने स्वीकार किया है कि वह न केवल बिहार और ओडिशा, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी वारदातों को अंजाम दे चुका है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है कि जेल से भागने के बाद उसे किन लोगों ने पनाह दी और क्या उत्तराखंड में उसका कोई लोकल नेटवर्क सक्रिय था? ऑपरेशन प्रहार उत्तराखंड पुलिस के माध्यम से अब उन सफेदपोशों और मददगारों पर भी नजर रखी जा रही है जो बाहरी अपराधियों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराते हैं।
एसएसपी का बयान: अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं
देहरादून पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि रिटायर्ड ब्रिगेडियर हत्याकांड के बाद से ही जिला पुलिस हाई अलर्ट पर है। ‘ऑपरेशन प्रहार’ का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी करना नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों से आकर उत्तराखंड की शांति भंग करने वाले अपराधियों में खौफ पैदा करना है। एसएसपी ने साफ किया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों पर संदिग्धों की जांच और तेज की जाएगी।
राजा साहनी की गिरफ्तारी उत्तराखंड पुलिस की पेशेवर कार्यक्षमता और अंतरराज्यीय समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। हालांकि, कटक जेल जैसी हाई-सिक्योरिटी जेल से फरार होकर एक अपराधी का महीनों तक खुलेआम घूमना सुरक्षा तंत्र पर सवाल भी खड़े करता है। फिलहाल, राजा साहनी से पूछताछ जारी है और उम्मीद है कि कल्लू गैंग के कई अन्य बड़े राज भी जल्द ही बेपर्दा होंगे।
ऑपरेशन प्रहार उत्तराखंड पुलिस की इस बड़ी जीत ने देवभूमि की जनता को सुरक्षा का एक कड़ा संदेश दिया है।



