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डिजिटल दहशत का ‘मास्टरमाइंड’ गिरफ्तार: दिल्ली पुलिस ने मैसूर से दबोचा, 1000+ फर्जी ईमेल भेजकर हिलाया था देश

The Hill India News
Last updated: March 30, 2026 3:07 am
The Hill India News
Published: March 30, 2026
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नई दिल्ली/मैसूर: देश की सुरक्षा एजेंसियों की नाक में दम करने वाले और अदालतों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक में बम की फर्जी धमकियां भेजकर अफरा-तफरी मचाने वाले शातिर आरोपी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई रंग लाई है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल और साइबर विंग ने एक संयुक्त ऑपरेशन के तहत 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस को कर्नाटक के मैसूर स्थित उसके किराए के मकान से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों (High Courts), प्रमुख संस्थानों और संवेदनशील सरकारी कार्यालयों को 1000 से अधिक ‘होक्स’ (फर्जी) धमकी भरे ईमेल और मैसेज भेजे थे।

Contents
मैसूर के किराए के कमरे से रची गई ‘होक्स’ साजिश‘लॉ’ का अधूरा ज्ञान और बेरोजगारी का ‘खतरनाक’ मिश्रणअंतरराष्ट्रीय साजिश का ‘छलावा’: पाकिस्तान-बलूचिस्तान कनेक्शनदिल्ली पुलिस की तकनीक आधारित जांचसुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना ‘डिजिटल टेररिज्म’क्या होगी कानूनी कार्रवाई?

मैसूर के किराए के कमरे से रची गई ‘होक्स’ साजिश

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, श्रीनिवास लुईस पिछले काफी समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। वह तकनीकी रूप से काफी चालाक था और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट्स और आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक करते हुए आखिरकार उसे मैसूर के एक गुमनाम से इलाके में लोकेट किया।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए हैं, जिनका उपयोग वह इन फर्जी संदेशों को भेजने के लिए करता था। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि आरोपी का मकसद केवल सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना और सार्वजनिक स्थानों पर डर का माहौल पैदा करना था।

‘लॉ’ का अधूरा ज्ञान और बेरोजगारी का ‘खतरनाक’ मिश्रण

पूछताछ के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी श्रीनिवास लुईस कानून (Law) की पढ़ाई कर रहा था। हालांकि, वह अपनी डिग्री पूरी नहीं कर सका और वर्तमान में बेरोजगार था। पुलिस का मानना है कि पढ़ाई में असफलता और लंबे समय से बेरोजगारी के कारण वह मानसिक दबाव में था।

अदालतों के प्रति उसके भीतर पनपे ‘निगेटिव’ दृष्टिकोण के कारण उसने न्यायपालिका और सरकारी संस्थानों को अपना प्राथमिक निशाना बनाया। वह कानून की उन्हीं बारीकियों का इस्तेमाल जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए कर रहा था, जो उसने अपनी अधूरी पढ़ाई के दौरान सीखी थीं।

अंतरराष्ट्रीय साजिश का ‘छलावा’: पाकिस्तान-बलूचिस्तान कनेक्शन

इस मामले में सबसे गंभीर मोड़ तब आया जब जांच में पता चला कि आरोपी ने इन ईमेलों को भेजने के लिए पाकिस्तान और बलूचिस्तान से जुड़े फर्जी नामों और कीवर्ड्स का इस्तेमाल किया था।

  • गुमराह करने की रणनीति: उसने जानबूझकर विदेशी सर्वरों और ऐसे नामों का प्रयोग किया जिससे जांच एजेंसियों को लगे कि यह कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश है।

  • जांच को भटकाना: पाकिस्तान और बलूचिस्तान के नाम का इस्तेमाल करने के पीछे उसका मकसद भारतीय खुफिया एजेंसियों का ध्यान भटकाना और मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील बनाना था।

  • सुरक्षा प्रोटोकॉल का दुरुपयोग: उसके एक ईमेल के बाद कई बार हाई कोर्ट्स और एयरपोर्ट्स पर घंटों तक ‘सर्च ऑपरेशन’ चलाने पड़े, जिससे देश के संसाधनों और समय की भारी बर्बादी हुई।

दिल्ली पुलिस की तकनीक आधारित जांच

यह दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई पूरी तरह से डेटा और डिजिटल फॉरेंसिक पर आधारित थी। आरोपी ने अलग-अलग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) और एन्क्रिप्टेड ईमेल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया था ताकि उसकी पहचान छिपी रहे। लेकिन दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ (IFSO) यूनिट ने अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए उन डिजिटल लेयर्स को तोड़ा और सीधे आरोपी के ठिकाने तक जा पहुँची।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना ‘डिजिटल टेररिज्म’

हाल के महीनों में देशभर के स्कूलों, अस्पतालों और अदालतों को मिलने वाले फर्जी ईमेल की बाढ़ आ गई है। श्रीनिवास लुईस जैसे ‘लोन वुल्फ’ (अकेले काम करने वाले) अपराधी सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। एक ईमेल से न केवल हजारों लोग प्रभावित होते हैं, बल्कि पूरी सुरक्षा मशीनरी को काम छोड़कर ‘होक्स’ की जांच में जुटना पड़ता है।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि श्रीनिवास से पूछताछ में कई अन्य महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वह किसी डार्क वेब (Dark Web) कम्युनिटी का हिस्सा था या वह केवल अकेले ही इस सनक को अंजाम दे रहा था।

क्या होगी कानूनी कार्रवाई?

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। सरकारी संस्थानों को धमकाने, सार्वजनिक शांति भंग करने और फर्जी सूचनाएं फैलाने के आरोप में उसे लंबी सजा हो सकती है। दिल्ली पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ला रही है, जहां उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

श्रीनिवास लुईस की गिरफ्तारी उन लोगों के लिए एक सख्त संदेश है जो इंटरनेट की दुनिया को अपनी ढाल बनाकर कानून के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं। दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, कानून के हाथ अपराधी तक पहुँच ही जाते हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो ताकि भविष्य में कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए न कर सके।

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