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ईरान का अमेरिकी एयरबेस पर हमला, ट्रंप का ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर बड़ा बयान और भारत की ‘हाई-लेवल’ तैयारी

नई दिल्ली/वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में बारूद की गंध अब पूरी दुनिया को डरा रही है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी इस भीषण जंग का आज 29वां दिन है। युद्ध के मैदान से आ रही खबरें न केवल सैन्य टकराव का संकेत दे रही हैं, बल्कि कूटनीतिक गलियारों में भी हड़कंप मचा हुआ है। जहाँ एक ओर ईरान ने सऊदी अरब स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस महायुद्ध की तपिश अब भारत की दहलीज तक महसूस की जा रही है, जिसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आंतरिक सुरक्षा और तैयारियों का मोर्चा खुद संभाल लिया है।

ट्रंप का ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर विवादित बयान और सीजफायर की सुगबुगाहट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। युद्ध के बीच एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दुनिया के सबसे संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कह दिया। हालांकि, उन्होंने तत्काल अपनी गलती सुधारते हुए इसे ‘हॉर्मुज’ कहा, लेकिन साथ ही अहंकारपूर्ण लहजे में यह भी जोड़ दिया कि उनसे ऐसी गलतियां नहीं होतीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अनजाने में दिया गया शब्द नहीं, बल्कि इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पर अमेरिकी प्रभुत्व दिखाने की एक कोशिश हो सकती है। इसी बीच, ट्रंप ने सीजफायर (युद्धविराम) के लिए बैठक करने के संकेत भी दिए हैं। सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान इस तनाव को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है और एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करवा सकता है, हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर इस पर सहमति नहीं जताई है।

ईरान का भीषण प्रहार: प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हमला

युद्ध के 29वें दिन ईरान ने अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। ईरान ने दावा किया है कि इजरायल और अमेरिका ने उसके परमाणु केंद्रों को निशाना बनाने की कोशिश की है। इसके जवाब में ईरान ने सऊदी अरब स्थित अमेरिका के प्रेंस सुल्तान एयरबेस पर बड़ा हमला बोल दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस हमले में अमेरिका के कई सैनिक घायल हुए हैं और कई लड़ाकू विमानों के क्षतिग्रस्त होने की भी खबर है। ईरान की इस कार्रवाई ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। इजरायल ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो वह उसके परमाणु ठिकानों को जमींदोज कर देगा, जिसके बाद से ही यह जवाबी हमलों का सिलसिला तेज हुआ है।

भारत में ‘वॉर रूम’ जैसी हलचल: पीएम मोदी ने की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक

पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और वहां रहने वाले लाखों भारतीयों पर पड़ना तय है। इसी गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नरों के साथ एक समीक्षा बैठक की।

बैठक में पीएम मोदी ने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:

  1. आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain): युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से निपटने की रणनीति।

  2. भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर उनके सुरक्षित रेस्क्यू (निकासी) की योजना।

  3. सतर्कता और तैयारी: प्रधानमंत्री ने बदलते वैश्विक परिवेश में राज्यों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।

पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए इनपुट की सराहना की और कहा कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प के बीच हमें इन बाहरी चुनौतियों से मिलकर लड़ना होगा।

आगे की राह: क्या टलेगा महायुद्ध?

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहना कठिन है कि शांति कब बहाल होगी। एक तरफ ईरान की आक्रामकता और दूसरी तरफ इजरायल-अमेरिका का अटूट गठबंधन इस युद्ध को ‘विश्व युद्ध’ की दिशा में धकेल रहा है। यदि पाकिस्तान की मध्यस्थता काम करती है और ट्रंप सीजफायर टेबल पर बैठते हैं, तो शायद दुनिया एक बड़ी तबाही से बच जाए। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।

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