
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार राज्य में पारदर्शी, त्वरित और सुलभ न्याय व्यवस्था स्थापित करने के लिए संकल्पबद्ध है। बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में बार एसोसिएशन देहरादून के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान न केवल राज्य सरकार के सफल कार्यकाल पर चर्चा हुई, बल्कि उत्तराखंड की न्यायिक अधोसंरचना (Judicial Infrastructure) को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने पर भी गंभीर मंथन हुआ।
सरकार के चार वर्ष: सुशासन और न्याय का समन्वय
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रदेश में सफलतापूर्वक चार वर्ष पूर्ण करने पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अधिवक्ताओं ने कहा कि इन चार वर्षों में राज्य ने न केवल आर्थिक और पर्यटन के क्षेत्र में प्रगति की है, बल्कि न्यायिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी सरकार का दृष्टिकोण ‘प्रो-पीपल’ रहा है। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अधिवक्ताओं के हितों का संरक्षण और न्यायालय परिसरों में सुविधाओं का विस्तार अभूतपूर्व रहा है।
नई आपराधिक संहिताएं: न्याय की नई दिशा
बैठक का एक मुख्य केंद्र बिंदु केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नई आपराधिक संहिताएं (भारतीय न्याय संहिता आदि) रहीं। मुख्यमंत्री धामी और प्रतिनिधिमंडल के बीच इनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा, “नई आपराधिक संहिताओं का उद्देश्य दंड के बजाय न्याय पर केंद्रित होना है। इन कानूनों के लागू होने से हमारी न्याय प्रणाली अधिक सुदृढ़, त्वरित और जनोन्मुखी बनेगी। इस परिवर्तनकारी दौर में अधिवक्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे समाज और न्यायपालिका के बीच की सबसे मजबूत कड़ी हैं।” उन्होंने जोर दिया कि न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए ‘बार’ और ‘बेंच’ के बीच बेहतर समन्वय अनिवार्य है।
डिजिटल न्याय और ई-कोर्ट: भविष्य की तैयारी
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को ‘डिजिटल इंडिया’ की तर्ज पर ‘डिजिटल न्याय’ का केंद्र बनाने का रोडमैप साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार न्यायिक अधोसंरचना के विकास के लिए निरंतर निवेश कर रही है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:
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न्यायालयों का आधुनिकीकरण: प्रदेश के जिला और तहसील स्तर के न्यायालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।
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ई-कोर्ट प्रणाली: तकनीकी बाधाओं को दूर कर ई-कोर्ट और वर्चुअल सुनवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों को न्याय के लिए भटकना न पड़े।
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लाइब्रेरी और संसाधन: अधिवक्ताओं के लिए बार भवनों के निर्माण के साथ-साथ वहां अत्याधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
अधिवक्ता कल्याण: सरकार की प्राथमिकता
अधिवक्ताओं की मांगों और सुझावों पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आश्वस्त किया कि उनके कल्याण हेतु चलाई जा रही योजनाओं को और अधिक विस्तार दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और आमजन को सस्ता व सुलभ न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि बार संगठनों द्वारा दिए गए सुझावों को नीतिगत स्तर पर प्राथमिकता दी जाएगी।
एक सशक्त उत्तराखंड का संकल्प
भेंट के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह से सरकार ने जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की पहल की है, उससे आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास और गहरा हुआ है। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ उनकी सरकार उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में हर वर्ग को साथ लेकर चल रही है, जिसमें विधिक क्षेत्र के विशेषज्ञों का सहयोग अत्यंत सराहनीय है।
इस अवसर पर बार एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी और कई प्रतिष्ठित अधिवक्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के विजन को राज्य के विकास के लिए एक नई ऊर्जा बताया।



