
राजधानी दिल्ली के द्वारका जिले में एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने अवैध रूप से संचालित गोदाम पर छापा मारकर 65 गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। इस कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जो लंबे समय से गैस सिलेंडरों को ब्लैक में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ Essential Commodities Act के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई छावला थाना पुलिस और एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (AATS) की संयुक्त टीम द्वारा की गई। दरअसल, हाल ही में गैस आपूर्ति में संभावित बाधाओं और जमाखोरी की आशंका को देखते हुए द्वारका जिले में विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान AATS को गुप्त सूचना मिली कि नजफगढ़ इलाके में एक रिहायशी मकान को अवैध गोदाम में बदलकर गैस सिलेंडरों का भंडारण किया जा रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना देरी किए एक विशेष टीम का गठन किया और नजफगढ़ के कश्मीरी कॉलोनी स्थित एक मकान पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान मौके से कुल 65 एलपीजी सिलेंडर बरामद किए गए, जिनमें 57 कमर्शियल और 8 घरेलू सिलेंडर शामिल हैं। बरामद कमर्शियल सिलेंडरों में 38 इंडेन और 19 भारत ब्रांड के थे, जबकि घरेलू सिलेंडरों में 6 भारत और 2 इंडेन के सिलेंडर शामिल पाए गए।
पुलिस ने मौके से 52 वर्षीय आरोपी अशोक कुमार को गिरफ्तार किया है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा का रहने वाला है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी कम कीमत पर सिलेंडर जुटाकर उन्हें अपने अवैध गोदाम में जमा करता था और बाद में कैटरिंग कारोबारियों व स्थानीय लोगों को ऊंचे दामों पर बेचता था। इस तरह वह सरकारी दरों की अनदेखी कर अवैध मुनाफाखोरी में लगा हुआ था।
छापेमारी के दौरान पुलिस को गैस ट्रांसफर करने वाली मशीन और एक इलेक्ट्रॉनिक कांटा (वजन मशीन) भी बरामद हुआ है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी बड़े सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस भरकर भी अवैध कारोबार चला रहा था। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक है, क्योंकि बिना मानकों के गैस ट्रांसफर से हादसों का खतरा बना रहता है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 287 और 288 के तहत भी मामला दर्ज किया है, जो लापरवाही से खतरनाक कार्य करने और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित हैं। इसके अलावा, आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 7 के तहत भी कार्रवाई की गई है, जो आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त दंड का प्रावधान करती है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक बड़ा सप्लाई नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। जांच का फोकस इस बात पर है कि आरोपी को इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडर कहां से मिल रहे थे और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका शामिल है।
इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा। आम लोगों से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें इस तरह की कोई गतिविधि नजर आए तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।



