
वॉशिंगटन डीसी: दुनिया के सबसे शक्तिशाली मुल्क अमेरिका और उसके धुर विरोधी ईरान के बीच चल रहे दशकों पुराने तनाव में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज बयान जारी करते हुए घोषणा की है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष में ‘पूर्ण विजय’ हासिल कर ली है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान अब घुटनों पर है और एक ऐसी ऐतिहासिक संधि की ओर बढ़ रहा है, जो उसे भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगी।
‘ईरान की सैन्य शक्ति अब शून्य’: ट्रंप का कड़ा प्रहार
वॉशिंगटन में गृह सुरक्षा मंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में नजर आए। उन्होंने तेहरान की सैन्य क्षमताओं के पूरी तरह नष्ट होने का दावा करते हुए कहा कि अब ईरान के पास अमेरिका का मुकाबला करने के लिए कुछ भी शेष नहीं बचा है।
Trump on Iran के संदर्भ में बोलते हुए उन्होंने कहा, “वे अब डील करना चाहते हैं, और सच तो यह है कि उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प भी नहीं है। उनकी नौसेना (Navy) जा चुकी है, उनकी वायुसेना (Airforce) ध्वस्त हो चुकी है और उनकी संचार व्यवस्था (Communication System) पूरी तरह छिन्न-भिन्न है। हमने वह युद्ध जीत लिया है।” ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिकी लड़ाकू विमान तेहरान और ईरान के अन्य संवेदनशील हिस्सों के ऊपर निर्बाध रूप से उड़ान भर रहे हैं और ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम उन्हें रोकने में पूरी तरह विफल रहा है।
विनाश के मुहाने से लौटी बातचीत: बिजली संयंत्र का किस्सा
ट्रंप ने अपने संबोधन में एक बड़े सैन्य ऑपरेशन को रोकने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका ईरान के एक ऐसे बिजली संयंत्र (Power Plant) को निशाना बनाने वाला था, जो दुनिया के सबसे विशाल संयंत्रों में से एक है। ट्रंप ने कहा, “हम उसे गिराने ही वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर बातचीत की मेज सज गई और हमने इसे रोक दिया। वे पूरी तरह हार चुके हैं और उनकी सेना अब इतिहास बन चुकी है।”
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अब अमेरिका उस स्थिति में है जहाँ वह अपनी शर्तें मनवा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई डील के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए ताला लग जाएगा।
ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ और कीमती तोहफा
ट्रंप के भाषण का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ईरान के नेतृत्व में हुए बदलावों से जुड़ा था। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान की पुरानी कट्टरपंथी लीडरशिप अब दृश्य से बाहर है। ट्रंप के शब्दों में, “ईरान के पुराने सुप्रीम लीडर खामेनेई अब नहीं रहे। नए लीडर भी गंभीर रूप से घायल हैं। अब हम एक नई टीम के साथ बातचीत कर रहे हैं जो अधिक समझदारी दिखा रही है।“
इतना ही नहीं, ट्रंप ने एक रहस्यमयी ‘तोहफे’ का भी जिक्र किया जो कथित तौर पर ईरान ने अमेरिका को दिया है। उन्होंने बताया कि यह तोहफा तेल और गैस से जुड़ा है और इसका सीधा संबंध हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रवाह से है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिस पर ईरान अक्सर नियंत्रण की धमकी देता रहा है। ट्रंप ने इसे ‘रिजीम चेंज’ का संकेत बताया।
ट्रंप के बयान के बड़े मायने
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परमाणु हथियार पर पूर्ण प्रतिबंध: ट्रंप का दावा है कि अब ईरान कभी परमाणु बम नहीं बना पाएगा।
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सैन्य सर्वोच्चता: अमेरिकी विमानों का तेहरान के ऊपर उड़ान भरना ईरान की संप्रभुता के पतन का संकेत है।
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आर्थिक और सामरिक लाभ: तेल और गैस के क्षेत्र में ईरान का पीछे हटना वैश्विक बाजार पर बड़ा असर डालेगा।
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ईरान की आंतरिक स्थिति: नेतृत्व का घायल होना या बदलना मिडिल ईस्ट की पूरी राजनीति को बदल सकता है।
वैश्विक कूटनीति पर प्रभाव
ट्रंप का यह दावा यदि पूरी तरह सही साबित होता है, तो यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस पर बंटे हुए हैं। जहाँ कुछ इसे ट्रंप की ‘प्रेशर टैक्टिक्स’ (दबाव की राजनीति) का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि ईरान के भीतर चल रहे विद्रोह और अमेरिकी प्रतिबंधों ने वास्तव में वहां की सरकार को तोड़ दिया है।
ट्रंप ने अंत में यह भी जोड़ा कि वे ईरान पर पूरी तरह भरोसा नहीं करते, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ‘समझदारी’ ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब ‘बेस्ट पोजीशन’ में है और दुनिया जल्द ही एक नए और शांत मध्य पूर्व को देखेगी।
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान ने बीजिंग से लेकर मॉस्को और तेल अवीव तक हलचल पैदा कर दी है। यदि वास्तव में कोई नई परमाणु डील होने वाली है, तो यह वैश्विक सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह से नया आकार देगी। अब दुनिया की नजरें तेहरान से आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया और उस ‘नई टीम’ पर टिकी हैं, जिसका जिक्र ट्रंप ने अपने भाषण में किया है।



