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Gujarat Uniform Civil Code 2026: गुजरात विधानसभा में यूसीसी विधेयक को मिली मंजूरी; बहुविवाह पर रोक, उल्लंघन पर 7 साल की जेल

The Hill India News
Last updated: March 25, 2026 2:51 am
The Hill India News
Published: March 25, 2026
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गांधीनगर: भारतीय राजनीति और विधायी इतिहास में एक बड़ा अध्याय जोड़ते हुए गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को सात घंटे की मैराथन बहस के बाद ‘गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। इसके साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य धर्म, जाति और पंथ से ऊपर उठकर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।

Contents
ऐतिहासिक सुधार या चुनावी दांव?विधेयक के मुख्य प्रावधान: सख्त सजा और अनिवार्य पंजीकरणसीमाओं के पार भी लागू होगा कानूनविपक्ष का कड़ा प्रहार: ‘शरीयत में हस्तक्षेप’तुलनात्मक विश्लेषण: उत्तराखंड बनाम गुजरातकानूनी और सामाजिक निहितार्थआगे की राह

ऐतिहासिक सुधार या चुनावी दांव?

सदन में विधेयक पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे ‘समानता सुनिश्चित करने वाला ऐतिहासिक सुधार’ बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून गुजरात के नागरिकों की समान न्याय की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि यह विधेयक वर्ष 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर जल्दबाजी में लाया गया है और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है।

विधेयक के मुख्य प्रावधान: सख्त सजा और अनिवार्य पंजीकरण

Gujarat Uniform Civil Code 2026 के तहत कई ऐसे कड़े प्रावधान किए गए हैं जो भविष्य में सामाजिक ढांचे को गहराई से प्रभावित करेंगे:

  1. विवाह और पंजीकरण: अब राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। शादी के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण न कराने पर 10,000 रुपये का जुर्माना और तीन महीने तक की जेल हो सकती है।

  2. बहुविवाह पर पूर्ण रोक: बिल के कानून बनते ही राज्य में बहुविवाह (Polygamy) पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा। दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की कैद का प्रावधान है।

  3. जबरन विवाह पर कार्रवाई: यदि कोई विवाह धोखाधड़ी, दबाव या बलपूर्वक कराया जाता है, तो दोषियों को 7 साल की कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।

  4. लिव-इन रिलेशनशिप का विनियमन: युवाओं के बीच बढ़ते लिव-इन कल्चर को विनियमित करने के लिए अब इसका पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी की निजी स्वतंत्रता छीनना नहीं, बल्कि महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और अधिकार प्रदान करना है।

  5. उत्तराधिकार में समानता: पैतृक संपत्ति में अब बेटों और बेटियों को समान अधिकार प्राप्त होंगे, जो लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सीमाओं के पार भी लागू होगा कानून

इस विधेयक की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि यह केवल गुजरात की भौगोलिक सीमा के भीतर रहने वाले लोगों पर ही नहीं, बल्कि राज्य के बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी लागू होगा। हालांकि, सरकार ने संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने का ध्यान रखते हुए अनुसूचित जनजातियों (ST) और उन समूहों को इससे बाहर रखा है जिनके पारंपरिक और सांस्कृतिक अधिकार भारतीय संविधान के तहत संरक्षित हैं।

विपक्ष का कड़ा प्रहार: ‘शरीयत में हस्तक्षेप’

सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शैलेश परमार ने बिल को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की। वहीं, विधायक इमरान खेड़ावाला ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के निजी कानूनों (Personal Laws) और शरीयत में सीधा हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा, “निकाह और उत्तराधिकार हमारे लिए केवल नियम नहीं बल्कि धार्मिक आदेश हैं। हम इस बिल के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।”

विपक्षी दलों के शोर-शराबे और वॉकआउट के बीच सत्ता पक्ष ने संख्या बल और ध्वनि मत के आधार पर बिल को पारित करा लिया। भाजपा का तर्क है कि ‘एक देश, एक विधान’ के संकल्प की दिशा में यह गुजरात का बड़ा योगदान है।


तुलनात्मक विश्लेषण: उत्तराखंड बनाम गुजरात

विशेषता उत्तराखंड UCC (2024) गुजरात UCC (2026)
दर्जा प्रथम राज्य द्वितीय राज्य
ST समुदाय बाहर रखा गया बाहर रखा गया
लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य अनिवार्य
बहुविवाह सजा दंडनीय अपराध 7 साल तक की जेल
विवाह पंजीकरण अवधि 30 दिन 60 दिन

कानूनी और सामाजिक निहितार्थ

कानून के जानकारों का मानना है कि Gujarat Uniform Civil Code 2026 के लागू होने से व्यक्तिगत कानूनों के बीच का टकराव समाप्त होगा, लेकिन इसे लागू करना प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ी चुनौती होगी। विशेष रूप से लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को लेकर निजता (Privacy) के सवाल उठना लाजमी है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्तराधिकार में बेटियों को समान अधिकार देने के प्रावधान का स्वागत किया है।

आगे की राह

विधेयक अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे आधिकारिक गजट में प्रकाशित कर पूरे राज्य में प्रभावी कर दिया जाएगा। जहां भाजपा इसे अपनी बड़ी उपलब्धि मान रही है, वहीं मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा इसे कानूनी चुनौती देने की तैयारी ने आने वाले दिनों में बड़े कानूनी संघर्ष के संकेत दे दिए हैं।

गुजरात में UCC का पारित होना भारतीय राजनीति की दिशा बदलने वाला कदम है। यह कानून न केवल सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करने का दावा करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि न्याय की चौखट पर हर नागरिक बराबर हो। हालांकि, धार्मिक स्वतंत्रता और समान कानून के बीच का यह संतुलन आने वाले समय में देश की सर्वोच्च अदालतों में चर्चा का मुख्य विषय बनेगा।

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