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उत्तर प्रदेश : लखनऊ में नए जोन गठन पर रोक, नगर निगम के अधिकार राज्य सरकार द्वारा फ्रीज

लखनऊ में नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित नए जोनों के गठन पर फिलहाल रोक लग गई है। यह फैसला किसी स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के निर्देशों के चलते लिया गया है। दरअसल, गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार जनगणना प्रक्रिया के मद्देनजर देशभर में प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में बदलाव पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। इसी कारण लखनऊ नगर निगम भी नए जोन बनाने की अपनी योजना को फिलहाल लागू नहीं कर पाएगा।

नगर निगम की ओर से शहर के बेहतर प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को सुधारने के उद्देश्य से जोन की संख्या बढ़ाने पर मंथन किया जा रहा था। वर्तमान में शहर में आठ जोन हैं, जिन्हें बढ़ाकर एक दर्जन तक करने की योजना बनाई जा रही थी। इस प्रस्ताव का मकसद प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और तेजी से सेवा उपलब्ध कराना था। हालांकि, अब यह योजना कम से कम जून 2027 तक के लिए टल गई है।

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार 1 जनवरी 2026 से प्रशासनिक सीमाओं को फ्रीज कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि इस अवधि के दौरान किसी भी वार्ड, जोन या अन्य प्रशासनिक इकाई की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। यह कदम जनगणना के सुचारू संचालन के लिए उठाया गया है, ताकि डेटा संग्रह में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पहले से तैयार सूची के आधार पर ही शहरी क्षेत्रों में संपत्तियों की गणना और लिस्टिंग की जाएगी।

इस फैसले का सीधा असर लखनऊ नगर निगम की उस योजना पर पड़ा है, जिसमें शहर के दोनों किनारों—विशेष रूप से गोमती नदी के आसपास के क्षेत्रों—को संतुलित रूप से जोनों में बांटने का प्रस्ताव था। योजना के तहत वार्डों को इस तरह व्यवस्थित करने की तैयारी थी कि प्रशासनिक कार्यों में समानता और सुविधा बनी रहे। साथ ही, क्षेत्रफल और जनसंख्या के आधार पर जोनों का पुनर्गठन किया जाना था।

सुषमा खर्कवाल ने इस मुद्दे पर कहा कि नगर निगम का उद्देश्य केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और जनता को बेहतर सुविधाएं देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वार्डों की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा था, बल्कि केवल जोनों की संख्या बढ़ाने की योजना थी, जो पूरी तरह एक आंतरिक प्रक्रिया है। लेकिन केंद्र सरकार के निर्देशों के चलते फिलहाल इसे रोकना पड़ा है।

वहीं, नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि जनगणना के कारण यह रोक अनिवार्य है और सभी प्रशासनिक इकाइयों को इसका पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही यह प्रतिबंध हटेगा, नगर निगम अपनी योजना को फिर से लागू करने पर विचार करेगा।

लखनऊ में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के चलते प्रशासनिक दबाव भी बढ़ रहा है। नगर निगम के सर्वे के अनुसार, शहर में भवनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले जहां लगभग 8.4 लाख भवन दर्ज थे, वहीं अब नए जुड़े गांवों के साथ यह संख्या बढ़कर करीब 9.5 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में जोनों की संख्या बढ़ाना समय की जरूरत माना जा रहा था।

फिलहाल, नगर निगम को जनगणना प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना होगा। इसके बाद ही नए जोनों के गठन की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जा सकेगा। तब तक शहर का प्रशासन मौजूदा आठ जोनों के आधार पर ही संचालित किया जाएगा।

 

 

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