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मिडिल ईस्ट में महाजंग: होर्मुज स्ट्रेट बनेगा ‘बैटलग्राउंड’? ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार, कहा- ‘नक्शे से मिटाने का भ्रम छोड़ दें’

तेहरान/वॉशिंगटन/यरूशलेम: मिडिल ईस्ट (पश्चिमी एशिया) में जारी भीषण संघर्ष आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है। युद्ध की यह आग अब केवल इजरायल और हमास या हिजबुल्लाह तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें दुनिया की दो महाशक्तियां—अमेरिका और ईरान—सीधे तौर पर आमने-सामने आ गई हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा कहे जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर मचे घमासान ने तीसरे विश्व युद्ध की आहट तेज कर दी है।

नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 48 घंटे की ‘डेडलाइन’ के जवाब में ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उसके बिजली संयंत्रों या बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर देगा।

ट्रंप की ’48 घंटे’ की चेतावनी और ईरान का कड़ा रुख

हालिया तनाव तब शुरू हुआ जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अल्टीमेटम दिया कि वह अगले 48 घंटों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को सुचारू रूप से खोल दे। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने ऐसा नहीं किया, तो अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण बिजली संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर उन्हें ‘नष्ट’ कर देगा।

इस धमकी के जवाब में ईरान के तेवर और कड़े हो गए हैं। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने दो टूक कहा है कि यदि अमेरिका अपनी धमकी पर अमल करता है, तो ईरान न केवल स्ट्रेट को बंद करेगा, बल्कि क्षेत्र में मौजूद उन सभी रणनीतिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाएगा जो पश्चिमी देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

विदेश मंत्री अराघची का ‘X’ पर प्रहार: “स्ट्रेट बंद नहीं है”

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से अमेरिका-इजरायल को संबोधित किया। अराघची ने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान ने जलमार्ग को बाधित किया है।

उन्होंने लिखा:

“होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं है। अगर जहाज वहां से गुजरने में हिचकिचा रहे हैं, तो इसकी वजह वह युद्ध है जिसे आपने (अमेरिका और इजरायल) शुरू किया है, ईरान ने नहीं। बीमा कंपनियां युद्ध के जोखिम से डरी हुई हैं। कोई भी बीमा कंपनी या कोई भी ईरानी नागरिक अब आपकी धमकियों से दबने वाला नहीं है।”

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में यह भी जोड़ा कि समुद्र में बढ़ते खतरों और किसी भी संभावित व्यवधान के लिए सीधे तौर पर वाशिंगटन और यरूशलेम जिम्मेदार हैं।

राष्ट्रपति पेजेश्कियन का कड़ा संदेश: “ईरान पीछे नहीं हटेगा”

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी ट्रंप प्रशासन को सीधे तौर पर ललकारा है। उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि ईरान को नक्शे से मिटाने का विचार केवल एक ‘भ्रम’ है। पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट उन लोगों को छोड़कर सभी के लिए खुला है जो ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं।

उन्होंने अपनी पोस्ट में जोर देते हुए कहा, “धमकियां और आतंक केवल हमारी एकता को मजबूत करते हैं। हम युद्ध के मैदान में इन बेबुनियाद धमकियों का दृढ़ता से सामना करेंगे।” उनके इस बयान से साफ है कि कूटनीति के रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं और अब मुकाबला ‘मैदान-ए-जंग’ में तय होगा।

इजरायल में हाहाकार: घायलों की संख्या 4600 के पार

इस महाजंग के बीच इजरायल के भीतर हालात बदतर होते जा रहे हैं। इजरायली स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह के साथ और ईरान के साथ सीधे टकराव में अब तक 4,697 लोग घायल हो चुके हैं।

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार:

  • कुल घायलों में से 124 लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।

  • इनमें से 14 मरीजों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

  • इजरायली बुनियादी ढांचे को भी रॉकेट हमलों से भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है।

होर्मुज स्ट्रेट का महत्व: क्यों डरी है पूरी दुनिया?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% से 25% इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। यदि ईरान अपनी धमकी पर अमल करते हुए इसे बंद करता है, तो:

  1. कच्चे तेल की कीमतें: वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें रातों-रात 150-200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

  2. वैश्विक मंदी: ईंधन की कमी से दुनिया भर में सप्लाई चेन टूट जाएगी, जिससे विनाशकारी महंगाई और मंदी आ सकती है।

  3. सैन्य टकराव: इसे खोलने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान पर सीधा हमला कर सकते हैं, जो एक पूर्ण विकसित क्षेत्रीय युद्ध को जन्म देगा।

मिडिल ईस्ट जंग अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां से वापसी का रास्ता कठिन नजर आता है। एक तरफ ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति है, तो दूसरी तरफ ईरान का अस्तित्व बचाने का संघर्ष। अगले 48 घंटे न केवल ईरान और अमेरिका के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की शांति और अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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