
देहरादून | 21 मार्च 2026 चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर जहाँ पूरा देश शक्ति की उपासना में लीन है, वहीं उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जिला प्रशासन ने ‘नारी शक्ति’ को सशक्त करने की एक अनूठी मिसाल पेश की है। शनिवार को कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित ‘नंदा-सुनंदा’ कार्यक्रम के 14वें संस्करण में जिलाधिकारी सविन बंसल ने 10 ऐसी बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित किया, जिनकी पढ़ाई आर्थिक तंगी या पारिवारिक आपदा के कारण छूट गई थी।
जिलाधिकारी ने इन बालिकाओं को देवी स्वरूप मानते हुए उनकी शिक्षा के लिए 2.03 लाख रुपये के चेक वितरित किए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गनिर्देशन में संचालित यह पहल अब तक जनपद की 136 से अधिक असहाय और जरूरतमंद बालिकाओं के जीवन में उजाला भर चुकी है।
जब जिला प्रशासन बना ‘अभिभावक’: इन बेटियों के सपनों को मिले पंख
इस कार्यक्रम में उन मार्मिक कहानियों को सुना गया, जहाँ नियति ने बच्चों की शिक्षा पर ग्रहण लगा दिया था, लेकिन जिला प्रशासन की सक्रियता ने उन्हें टूटने से बचा लिया।
1. पिता के साये के बाद शिक्षा पर संकट
बनियावाला की आराध्या सिंह (कक्षा 4), सुद्धोवाला की मान्यता ठाकुर (कक्षा 10), सहस्रधारा की माही चौहान, और पटेलनगर की सोफिया अल्वी जैसी कई बेटियों के सिर से पिता का साया उठने के बाद उनकी पढ़ाई बंद होने की कगार पर थी। मान्यता ठाकुर के परिवार में 5 भाई-बहन हैं और बड़ी बहन दिव्यांग है। ऐसे कठिन समय में नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट इन बेटियों के लिए ढाल बनकर खड़ा हुआ।
2. असाध्य रोगों और सामाजिक कुरीतियों से संघर्ष
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हृदय रोग और कैंसर का दंश: ओगल भट्टा की नंदनी और नंदिता की मां हृदय रोग से ग्रसित हैं, जिनके उपचार में सारा जमा-पूंजी खर्च हो गई और 9 महीने की फीस न भरने के कारण उनकी शिक्षा बाधित थी। वहीं, हर्रावाला की त्रिशा की मां की मृत्यु कैंसर से हुई, जिसके बाद पिता आर्थिक रूप से टूट चुके थे। प्रशासन ने इन दोनों परिवारों की बेटियों की जिम्मेदारी उठाई।
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नशे के विरुद्ध नियति की जंग: डालनवाला की नियति वासुदेव के पिता नशे की लत के कारण पुनर्वास केंद्र में हैं। घर की स्थिति दयनीय होने पर उनकी कक्षा 6 की पढ़ाई रुक गई थी, जिसे अब फिर से शुरू कर दिया गया है।
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उच्च शिक्षा के लिए हर्षिता को सहारा: रायवाला की हर्षिता के लिए बीकॉम की पढ़ाई जारी रखना असंभव हो गया था, लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें भी इस योजना के तहत कवर कर उच्च शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया।
मुख्यमंत्री का संकल्प: शिक्षा के हर ‘गैप’ को भरना प्राथमिकता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट संकल्प है कि जनमानस के विकास और शिक्षा की योजनाओं के क्रियान्वयन में धरातल पर जो भी कमियां (गैप) रह जाती हैं, उन्हें जिला प्रशासन अपने स्तर पर भरे।
“प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा का उद्देश्य केवल आर्थिक चेक बांटना नहीं है, बल्कि उन होनहार बालिकाओं के भविष्य की नींव मजबूत करना है जिनमें आगे बढ़ने की ललक है। यदि हम एक बेटी को सशक्त करते हैं, तो पूरा कुल और समाज सशक्त होता है।” – सविन बंसल, जिलाधिकारी, देहरादून
136 बालिकाओं के लिए उम्मीद की किरण बना ‘नंदा-सुनंदा’ मॉडल
देहरादून जिला प्रशासन का यह प्रोजेक्ट अब राज्य में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित हो रहा है। जिलाधिकारी ने चयन समिति और ग्राउंड लेवल पर कार्य कर रही टीम की सराहना की, जो घर-घर जाकर ऐसी बेटियों को चिह्नित करती है जो परिस्थितियों के कारण स्कूल नहीं जा पा रही हैं।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बालिकाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि प्रशासन उनकी आगे की पढ़ाई में भी मदद जारी रखेगा। उन्होंने सफल होने के बाद इन बेटियों से समाज के अन्य जरूरतमंदों की मदद करने की अपेक्षा भी की। वहीं, नगर पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार ने आश्वासन दिया कि पुलिस प्रशासन भी इन परिवारों की सुरक्षा और सहायता के लिए सदैव तत्पर है।
अभिभावकों की आंखों में आंसू और सरकार का आभार
सभागार में मौजूद अभिभावकों के लिए यह भावुक क्षण था। अपनी बेटियों को पुनः स्कूल जाते देख माता-पिता ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया। अभिभावकों का कहना था कि जहां उम्मीदें खत्म हो गई थीं, वहां ‘नंदा-सुनंदा’ योजना ने उनके बच्चों को नया जीवन दिया है।
इस अवसर पर मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार और जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित कई गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।
सशक्त बेटी, समृद्ध उत्तराखंड
नवरात्र के दौरान कन्या पूजन की परंपरा को प्रशासनिक कर्तव्य के साथ जोड़कर जिलाधिकारी ने एक नई परिपाटी शुरू की है। नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट न केवल 136 बालिकाओं के सपनों को उड़ान दे रहा है, बल्कि यह समाज के संपन्न वर्गों को भी प्रेरित कर रहा है कि वे आगे आएं और शिक्षा की मशाल को बुझने न दें।



