
भारत और चीन के बीच लंबे समय से ठप पड़ी हवाई कनेक्टिविटी अब धीरे–धीरे पटरी पर लौटती नजर आ रही है। हाल ही में नई दिल्ली और बीजिंग के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की घोषणा ने दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव का संकेत दिया है। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इन उड़ानों का संचालन Air China द्वारा किया जाएगा।
यू जिंग ने इस पहल को केवल यात्रा सुविधा तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे व्यापार, पर्यटन और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि यह निर्णय Shanghai Cooperation Organisation (SCO) और BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों के सदस्य देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क को मजबूत करने में भी सहायक होगा।
गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान सेवाएं वर्ष 2020 से बंद थीं। इसकी प्रमुख वजह पहले COVID-19 महामारी और उसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर बढ़ा सैन्य तनाव था। इन परिस्थितियों के कारण न केवल यात्रा बल्कि व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान–प्रदान भी प्रभावित हुआ था।
हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में धीरे–धीरे सुधार देखने को मिला है। इसी का परिणाम है कि हवाई सेवाओं को फिर से बहाल करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इससे पहले शंघाई और नई दिल्ली के बीच भी सीधी उड़ान सेवा शुरू की गई थी। फरवरी में Air India की एक उड़ान शंघाई के पुडोंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 230 यात्रियों को लेकर दिल्ली पहुंची थी, जो छह वर्षों के अंतराल के बाद एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।
इसके अलावा IndiGo भी चीन के विभिन्न शहरों के लिए अपनी उड़ान सेवाएं शुरू करने की तैयारी में है। इंडिगो पहले ही कोलकाता और दिल्ली से गुआंगझू के लिए उड़ानें संचालित कर रही है। वहीं चीन की एयरलाइन China Eastern Airlines ने भी शंघाई से दिल्ली के बीच अपनी सेवाएं फिर से शुरू कर दी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग और दिल्ली के बीच सीधी उड़ानों की बहाली से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। चीन भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, और हवाई संपर्क बेहतर होने से कारोबारी यात्राएं आसान होंगी। इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र में भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि दोनों देशों के नागरिक अब अधिक आसानी से एक–दूसरे के देश की यात्रा कर सकेंगे।
राजनयिक दृष्टिकोण से भी यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद इस तरह के सहयोगात्मक कदम यह दर्शाते हैं कि दोनों देश अपने संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हवाई सेवाओं की बहाली को “ट्रस्ट बिल्डिंग मेजर” यानी विश्वास बहाली के उपाय के रूप में भी देखा जा रहा है।
आने वाले समय में यदि इसी तरह सहयोग बढ़ता रहा, तो भारत और चीन के बीच अन्य क्षेत्रों—जैसे शिक्षा, सांस्कृतिक आदान–प्रदान और निवेश—में भी नए अवसर खुल सकते हैं। कुल मिलाकर, बीजिंग–दिल्ली सीधी उड़ानों की वापसी न केवल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है, बल्कि यह दोनों एशियाई शक्तियों के रिश्तों में सुधार की एक मजबूत शुरुआत भी मानी जा रही है।



