कंधमाल (ओडिशा): ओडिशा के कंधमाल जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने राज्य के शिक्षा विभाग, सरकारी हॉस्टल प्रबंधन और बाल सुरक्षा दावों की कलई खोलकर रख दी है। जिले के फिरिंगिया ब्लॉक स्थित एक सरकारी हाई स्कूल के हॉस्टल में रहने वाली 9वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा के मां बनने की खबर ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला न केवल एक नाबालिग के शोषण की कहानी है, बल्कि उस प्रशासनिक तंत्र की विफलता का भी प्रमाण है जो छात्राओं की सुरक्षा का दम भरता है।
नेदीपदर हाई स्कूल: आखिर कहां हुई चूक?
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना नेदीपदर हाई स्कूल की है। पीड़िता इसी स्कूल में पढ़ाई करती थी और स्कूल परिसर में स्थित सरकारी हॉस्टल में रहती थी। बताया जा रहा है कि पिछले साल स्कूल की छुट्टियों के दौरान जब छात्रा अपने पैतृक गांव गई हुई थी, तभी वह अपने इलाके के एक स्थानीय युवक के संपर्क में आई। आरोपों के अनुसार, इसी दौरान युवक ने छात्रा के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई।
छुट्टियां खत्म होने के बाद, छात्रा सामान्य रूप से स्कूल के हॉस्टल में वापस लौट आई। यहीं से स्कूल प्रशासन और हॉस्टल वार्डन की वह लापरवाही शुरू होती है, जिसे अब जिले के उच्च अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है।
महीनों तक हॉस्टल में रही गर्भवती छात्रा, प्रशासन को भनक तक नहीं
इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि वह नाबालिग छात्रा महीनों तक हॉस्टल में ही रही। वह प्रतिदिन कक्षाओं में उपस्थित रही, स्कूल की अन्य गतिविधियों में भाग लिया और हॉस्टल के नियमों का पालन करती रही। सवाल यह उठ रहा है कि क्या महीनों तक न तो वार्डन, न ही स्कूल के शिक्षकों और न ही मेट्रन (परिचारिका) ने छात्रा की शारीरिक स्थिति में आ रहे बदलावों पर गौर किया?
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह रहा कि जब छात्रा की शारीरिक स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो गई, तब जाकर स्कूल अधिकारियों की नींद टूटी। आनन-फानन में मामले को दबाने या जिम्मेदारी से बचने के लिए परिवार को सूचित किया गया और छात्रा को घर भेज दिया गया।
1 मार्च 2026: प्रसव के बाद छात्रा की हालत नाजुक
घर भेजे जाने के बाद, 1 मार्च 2026 को छात्रा ने अपने निवास पर एक बच्चे को जन्म दिया। कम उम्र में प्रसव (Childbirth) होने के कारण नाबालिग छात्रा की शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। वर्तमान में वह जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही है और स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम उसकी निगरानी कर रही है।
पुलिसिया कार्रवाई: ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा
घटना के सार्वजनिक होने और अभिभावकों के आक्रोश के बाद, स्कूल के प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) और छात्रा के परिजनों ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पोक्सो (POCSO) एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
कंधमाल पुलिस ने जांच के लिए दो अलग-अलग टीमें गठित की हैं:
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आरोपी की तलाश: पुलिस उस युवक की तलाश कर रही है जिसने नाबालिग को हवस का शिकार बनाया।
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प्रशासनिक जवाबदेही: पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि हॉस्टल के भीतर इतने महीनों तक यह बात कैसे छिपी रही। क्या इसमें हॉस्टल कर्मियों की मिलीभगत थी या यह केवल घोर लापरवाही का मामला है?
जिला कल्याण अधिकारी का सख्त रुख
कंधमाल के जिला कल्याण अधिकारी (DWO) रबी नारायण मिश्रा ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर हॉस्टल प्रबंधन की विफलता है। उन्होंने कहा, “प्रशासन ने मामले की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं। हम यह पता लगा रहे हैं कि हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं की नियमित स्वास्थ्य जांच (Health Check-up) क्यों नहीं की गई। यदि वार्डन, शिक्षक या किसी भी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई या लापरवाही सिद्ध हुई, तो उनकी सेवा समाप्ति के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।”
सरकारी हॉस्टलों की सुरक्षा पर सुलगते सवाल
इस घटना ने ओडिशा के दूरदराज के क्षेत्रों में चल रहे सरकारी हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
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नियमित स्वास्थ्य जांच का अभाव: क्या छात्राओं की मासिक या त्रैमासिक स्वास्थ्य जांच नहीं की जाती?
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वार्डन की भूमिका: एक हॉस्टल वार्डन का कर्तव्य केवल उपस्थिति दर्ज करना नहीं, बल्कि छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा की निगरानी करना भी है। क्या वे अपना कर्तव्य निभाने में विफल रहे?
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कागजी सुरक्षा: क्या सरकारी हॉस्टलों में सुरक्षा नियम केवल फाइलों तक ही सीमित हैं?
इंसाफ की उम्मीद
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। एक तरफ हम ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे सुरक्षित माने जाने वाले शिक्षण संस्थानों में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। फिलहाल पूरा जिला इस घटना की निंदा कर रहा है और लोग आरोपी युवक के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कंधमाल प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती पीड़िता को बेहतर इलाज मुहैया कराना और उसे न्याय दिलाना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद उम्मीद की जा रही है कि कुछ बड़े नामों पर गाज गिर सकती है।



