
श्रीनगर/देहरादून। देश में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ी चिंता सामने आई है। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) के हेलीकॉप्टर की आज तकनीकी खराबी के कारण श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) के जीवीके (GVK) हेलीपैड पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। गनीमत रही कि पायलट की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया और राज्यपाल पूरी तरह सुरक्षित हैं।
इस घटना ने एक बार फिर वीवीआईपी उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले चॉपर्स के रखरखाव और तकनीकी जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले 48 घंटों के भीतर यह दूसरी ऐसी घटना है जब किसी बड़े संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के विमान या हेलीकॉप्टर में खराबी आई हो।
हवा में तकनीकी खराबी: श्रीनगर में हड़कंप
जानकारी के अनुसार, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत उड़ान भर रहे थे। उड़ान के कुछ ही समय बाद पायलट को इंजन या नेविगेशन सिस्टम में कुछ असामान्य संकेत मिले। किसी भी संभावित खतरे को भांपते हुए पायलट ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी।
श्रीनगर के जीवीके हेलीपैड पर सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एहतियात बरतते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा गया। लैंडिंग के तुरंत बाद सुरक्षा घेरे में राज्यपाल को श्रीनगर स्थित पुलिस गेस्ट हाउस ले जाया गया। पौड़ी पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि राज्यपाल पूरी तरह सुरक्षित हैं और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अब हेलीकॉप्टर की जांच कर रही है।
#WATCH | Uttarakhand | Due to a technical snag in the helicopter of Governor Lieutenant General Gurmit Singh (Retd), an emergency landing was carried out in Srinagar, Pauri Garhwal. The helicopter belongs to the Uttarakhand government.
According to information received from… pic.twitter.com/VYunB4KwuG
— ANI (@ANI) March 8, 2026
एक के बाद एक वीवीआईपी ‘स्केयर’: सुरक्षा पर उठते सवाल
हैरानी की बात यह है कि राज्यपाल के साथ हुई यह घटना कोई अकेली वारदात नहीं है। पिछले कुछ दिनों में देश के कई दिग्गजों को हवा में ऐसी ही डरावनी स्थितियों का सामना करना पड़ा है।
1. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के हेलीकॉप्टर में भरा धुआं
शनिवार को ही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के साथ लखनऊ में एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। डिप्टी सीएम लॉ मार्टिनियर ग्राउंड से कौशाम्बी के लिए रवाना हुए थे, लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद हेलीकॉप्टर के केबिन में अचानक धुआं भरने लगा। आनन-फानन में हेलीकॉप्टर की लखनऊ एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। प्राथमिक जांच में इसे शॉर्ट सर्किट का मामला माना जा रहा है।
2. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के विमान की बागडोगरा में लैंडिंग
इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ भी ऐसा ही वाक्या हुआ। वह भूटान की आधिकारिक यात्रा पर थीं, लेकिन अचानक मौसम के बिगड़ने और हवा के कम दबाव (Low Pressure) के कारण उनके विमान को पश्चिम बंगाल के बागडोगरा हवाई अड्डे पर आपात स्थिति में उतारना पड़ा। खराब मौसम के कारण उन्हें रात सिलीगुड़ी में ही बितानी पड़ी और स्थिति सामान्य होने पर ही वह आगे के लिए रवाना हो सकीं।
क्या पुराने हो रहे हैं वीवीआईपी चॉपर्स?
लगातार हो रही वीवीआईपी हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी की घटनाओं ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की चिंता बढ़ा दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यपाल और मंत्रियों के दौरों में इस्तेमाल होने वाले हेलीकॉप्टरों की ‘प्रि-फ्लाइट’ चेकिंग में कहीं न कहीं चूक हो रही है।
“जब मामला राज्यपाल या वित्त मंत्री जैसे उच्च पदों का हो, तो तकनीकी खराबी की गुंजाइश शून्य होनी चाहिए। हवा में धुआं भरना या अचानक तकनीकी खराबी आना एक गंभीर सुरक्षा चूक (Security Lapse) की ओर इशारा करता है।” – विमानन विशेषज्ञ
प्रोटोकॉल और आगे की कार्रवाई
उत्तराखंड के राज्यपाल के मामले में, प्रोटोकॉल के तहत अब एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। राज्यपाल फिलहाल पुलिस गेस्ट हाउस में विश्राम कर रहे हैं और उनके आगे के कार्यक्रम में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। श्रीनगर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक तकनीकी टीम ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ जारी नहीं करती, तब तक उस हेलीकॉप्टर का दोबारा इस्तेमाल नहीं होगा।
मुख्य बिंदु:
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घटनास्थल: जीवीके हेलीपैड, श्रीनगर।
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प्रभावित वीवीआईपी: लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), राज्यपाल उत्तराखंड।
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कारण: आकस्मिक तकनीकी खराबी।
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सुरक्षा स्थिति: सभी यात्री और चालक दल सुरक्षित।
जवाबदेही तय करने का समय
उत्तराखंड के राज्यपाल, यूपी के डिप्टी सीएम और केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई ये बैक-टू-बैक घटनाएं केवल इत्तेफाक नहीं हो सकतीं। यह देश के सुरक्षा ढांचे में एक चेतावनी है। क्या यह समय इन पुराने पड़ चुके हेलीकॉप्टरों के बेड़े को बदलने का है या फिर मेंटेनेंस के कड़े नियमों को लागू करने का? जनता और प्रशासन दोनों को इन सवालों के जवाब का इंतजार है।



