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पद्म पुरस्कार 2026: बस कंडक्टर से ‘किताबों के राजा’ तक, मिलिए उन 45 गुमनाम नायकों से जिन्होंने फर्श से अर्श तक बदली देश की तस्वीर

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार की सूची की सबसे बड़ी विशेषता ‘गुमनाम नायकों’ (Unsung Heroes) का दबदबा है। पुरस्कार पाने वालों में ऐसे 45 लोग शामिल हैं, जो चकाचौंध से दूर, देश के दूर-दराज के इलाकों में अपनी निस्वार्थ सेवा से मौन क्रांति ला रहे हैं।

इनमें विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क पुस्तकालय बनाने वाले एक पूर्व बस परिचालक से लेकर दुर्लभ लोक वाद्ययंत्रों को जीवित रखने वाले 90 वर्षीय बुजुर्ग कलाकार तक शामिल हैं। सरकार ने इस चयन के जरिए एक बार फिर साबित किया है कि अब पद्म पुरस्कार ‘पहुंच’ का नहीं, बल्कि ‘परिश्रम’ का सम्मान बन चुके हैं।


अंके गौड़ा: एक बस कंडक्टर जिसने दुनिया को दी ‘ज्ञान की राजधानी’

इस वर्ष के पद्म श्री सम्मानों में सबसे चर्चित नाम कर्नाटक के अंके गौड़ा का है। कभी सड़क परिवहन निगम में बस परिचालक (कंडक्टर) के रूप में काम करने वाले अंके गौड़ा ने वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े विश्वविद्यालय नहीं कर पाए।

उन्होंने ‘पुस्तक माने’ नाम से दुनिया का सबसे बड़ा निःशुल्क पुस्तकालय स्थापित किया है। उनके संग्रह में 20 अलग-अलग भाषाओं की 20 लाख से अधिक पुस्तकें और अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियां (Manuscripts) मौजूद हैं। उनके पुस्तकालय में आज देश-दुनिया के शोधार्थी पहुँचते हैं। एक साधारण नौकरी करने वाले व्यक्ति का पुस्तकों के प्रति यह अटूट प्रेम आज दुनिया के लिए मिसाल बन गया है।

90 साल की उम्र और लोक कला का जज्बा

कला की श्रेणी में इस बार एक ऐसे 90 वर्षीय बुजुर्ग वाद्ययंत्र वादक को चुना गया है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन एक लुप्तप्राय लोक वाद्ययंत्र को समर्पित कर दिया। आधुनिकता की दौड़ में जहाँ पारंपरिक संगीत दम तोड़ रहा था, वहीं इस गुमनाम नायक ने न केवल उस वाद्ययंत्र को बजाना जारी रखा, बल्कि नई पीढ़ी को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया। सरकार का यह कदम देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बचाने वाले योद्धाओं का सम्मान है।

समाज के ‘रीयल हीरो’: 45 गुमनाम नायकों की गाथा

पद्म श्री 2026 की सूची में शामिल ये 45 गुमनाम नायक विभिन्न क्षेत्रों से आते हैं:

  1. शिक्षा का प्रसार: वह लोग जो झुग्गी-झोपड़ियों और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

  2. पर्यावरण संरक्षण: वे ‘ग्रीन योद्धा’ जिन्होंने बंजर पहाड़ियों को जंगलों में तब्दील कर दिया।

  3. स्वास्थ्य सेवा: वे डॉक्टर जो दूरस्थ गांवों में बिना किसी फीस के दशकों से इलाज कर रहे हैं।

  4. कृषि नवाचार: जैविक खेती और जल संरक्षण के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले किसान।

[Image Suggestion: A collage showing Anke Gowda with books and folk artists receiving awards]

पुरस्कारों के चयन में ‘पीपल्स पद्म’ का विजन

गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पद्म पुरस्कारों की पूरी प्रक्रिया को ‘पीपल्स पद्म’ (People’s Padma) में बदल दिया गया है। पहले ये पुरस्कार केवल लुटियंस दिल्ली और प्रभावशाली लोगों तक सीमित माने जाते थे, लेकिन अब ऑनलाइन नामांकन और जमीनी स्तर की छानबीन के बाद उन लोगों को खोजा जा रहा है जो प्रचार से दूर रहते हैं।

इस बार भी चयन का आधार व्यक्ति की पदवी या पहचान नहीं, बल्कि उसके काम का ‘सोशल इम्पैक्ट’ (सामाजिक प्रभाव) रहा है।


नए भारत का नया सम्मान

पद्म पुरस्कारों की यह सूची केवल नामों की फेहरिस्त नहीं है, बल्कि यह उन संघर्षों की स्वीकृति है जिन्हें अब तक अनदेखा किया गया था। अंके गौड़ा जैसे लोग हमें सिखाते हैं कि संसाधन कम होने के बावजूद बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इन 45 गुमनाम नायकों को सलाम, जिन्होंने अपनी मेहनत से देश के गौरव को नई ऊंचाइयां दी हैं।

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