By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: ‘वयस्क हैं तो साथ रहने का अधिकार’: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़े को दी सुरक्षा, हरिद्वार पुलिस को सख्त निर्देश
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > ‘वयस्क हैं तो साथ रहने का अधिकार’: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़े को दी सुरक्षा, हरिद्वार पुलिस को सख्त निर्देश
उत्तराखंडफीचर्ड

‘वयस्क हैं तो साथ रहने का अधिकार’: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़े को दी सुरक्षा, हरिद्वार पुलिस को सख्त निर्देश

The Hill India News
Last updated: January 25, 2026 1:48 pm
The Hill India News
Published: January 25, 2026
Share
SHARE

नैनीताल/हरिद्वार: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक बार फिर व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) और अपनी मर्जी से जीवन जीने के अधिकार को सर्वोपरि माना है। माननीय न्यायालय ने हरिद्वार के एक प्रेमी जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि यदि दो वयस्क आपसी सहमति से साथ रहना चाहते हैं, तो न तो समाज और न ही परिवार उनके अधिकारों का हनन कर सकता है। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सुरक्षा प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं।

Contents
क्या है हरिद्वार का यह प्रेम प्रसंग?परिजनों से जान का खतरा और कोर्ट में गुहारसंवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा: ‘लता सिंह’ केस का हवालाहाईकोर्ट का पुलिस को कड़ा आदेशव्यक्तिगत स्वायत्तता की जीत

क्या है हरिद्वार का यह प्रेम प्रसंग?

पूरा मामला हरिद्वार जिले के पथरी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहाँ के रहने वाले एक युवक और युवती ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वे दोनों एक ही धर्म के हैं और लंबे समय से एक-दूसरे के साथ प्रेम संबंध में हैं। दोनों ने परिपक्वता का परिचय देते हुए जल्द ही विवाह के बंधन में बंधने का निर्णय लिया है।

हालांकि, समाज के रूढ़िवादी ढांचे और पारिवारिक विरोध के कारण उनके इस निर्णय में बाधा उत्पन्न हो गई। युवती के परिजनों ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और जोड़े पर अलग होने का दबाव बनाने लगे।

परिजनों से जान का खतरा और कोर्ट में गुहार

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनके परिवार वाले न केवल इस रिश्ते के खिलाफ हैं, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकियां भी दे रहे हैं। याचिका में आरोप लगाया गया कि उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता में अवैध रूप से हस्तक्षेप किया जा रहा है और वे डर के साये में जीने को मजबूर हैं।

सुनवाई के दौरान प्रेमी जोड़ा व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुआ। न्यायालय ने सबसे पहले उनकी पहचान की पुष्टि की और उनकी उम्र से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। कोर्ट ने पाया कि दोनों ही कानूनी रूप से बालिग (Adult) हैं और बिना किसी दबाव या जबरदस्ती के, स्वेच्छा से एक साथ रहने का निर्णय ले चुके हैं।

संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा: ‘लता सिंह’ केस का हवाला

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा ने मामले की सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक ‘लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है।

अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि जब दो वयस्क स्वेच्छा से साथ रहने का फैसला करते हैं, तो किसी भी तीसरे पक्ष (चाहे वे माता-पिता ही क्यों न हों) को उनके जीवन में व्यवधान डालने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट का पुलिस को कड़ा आदेश

न्यायालय ने हरिद्वार जिले के पथरी थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निर्देश जारी किए हैं:

  1. तत्काल सुरक्षा: याचिकाकर्ताओं को उनकी आवश्यकतानुसार उचित सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि उनके जीवन को कोई खतरा न हो।

  2. काउंसलिंग और हिदायत: विरोध कर रहे परिजनों को थाने बुलाकर कानून के दायरे में रहने की सख्त हिदायत दी जाए।

  3. कानूनी कार्रवाई: यदि परिवार की ओर से किसी भी प्रकार का उत्पीड़न या हिंसा की जाती है, तो पुलिस को उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।


व्यक्तिगत स्वायत्तता की जीत

उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक नजीर है जो आज भी परिवार के नाम पर युवाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का दमन करना चाहते हैं। यह आदेश न केवल एक जोड़े की जान बचाने वाला है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि कानून की नजर में ‘सहमति’ और ‘संवैधानिक अधिकार’ सर्वोपरि हैं।

You Might Also Like

उत्तराखण्ड : सतपाल महाराज , त्रिवेंद्र रावत मेरे घर आते जाते हैं, पर्यटन विभाग में नौकरी लगा दूंगा , और ठग लिए ₹96 लाख
दिल्ली दंगा मामला: उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज
डिजिटल युग में ऐतिहासिक कदम: Census 2027 की शुरुआत, पहली बार मिलेगी स्व-गणना की सुविधा
Rajkot fire incident: मुख्य आरोपी धवल ठक्कर को पुलिस ने किया गिरफ्तार, घटना के बाद से था फरार
संसद का मानसून सत्र आज से शुरू, क्या विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर, ट्रंप के दावे और बिहार SIR पर घेरेगा सरकार को?
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्डराजनीति

मांजलपुर उपचुनाव में BJP की शानदार जीत: सतीश पटेल ने 30 हजार से अधिक वोटों से कांग्रेस को हराया, गुजरात में कमल फिर खिला

The Hill India News
The Hill India News
August 3, 2026
ITR Refund का इंतजार खत्म कब होगा? जानिए इनकम टैक्स रिफंड की पूरी प्रक्रिया, कितने दिनों में मिलेगा पैसा और किन वजहों से हो सकती है देरी
पप्पू यादव के भगवा प्रदर्शन पर INDIA गठबंधन में दरार! सपा ने किया किनारा, राम मंदिर मुद्दे पर विपक्ष के अलग-अलग सुर आए सामने
NEET पेपर लीक आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ‘छात्रों को मिलेगा न्याय, लेकिन अपराधियों को नहीं मिलेगी कोई राहत’; FIR, पुलिस कार्रवाई और जांच पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
JPSC परीक्षा विवाद ने पकड़ा तूल: हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर, परीक्षा रद्द करने से लेकर CBI जांच तक उठीं बड़ी मांगें
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: क्या बदलेगा विरोध प्रदर्शन का केंद्र? केंद्र सरकार से मांगा जवाब
बृज भूषण शरण सिंह को बड़ी राहत: कोर्ट से बरी होने के बाद बोले— “अगर एक भी आरोप साबित होता तो खुद फांसी पर लटक जाता”
ऐतिहासिक फैसला! राष्ट्रपति मुर्मू ने एंटी-पेपर लीक कानून को दी मंजूरी, अब 2 महीने में जांच, 3 महीने में फैसला और 10 साल तक की जेल
गलत नंबर पर हो गया मोबाइल रिचार्ज? घबराएं नहीं! Airtel और Jio यूजर्स ऐसे वापस पा सकते हैं अपने पैसे, जानिए पूरा प्रोसेस
संसद के ‘भगवा प्रदर्शन’ पर कानूनी शिकंजा: राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?