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घरेलू LPG संकट पर बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त: केंद्र और निजी फर्म को नोटिस जारी, सोमवार तक मांगा जवाब

The Hill India News
Last updated: March 13, 2026 3:37 am
The Hill India News
Published: March 13, 2026
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नागपुर। ईरान युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर उपजे ऊर्जा संकट (Energy Crisis) का असर अब भारतीय रसोई और अदालती गलियारों तक पहुँच गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने घरेलू कुकिंग गैस सिलेंडर की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग वाली एक याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) तथा एक निजी ऊर्जा फर्म, ‘कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड’ को नोटिस जारी किया है।

Contents
याचिका की मुख्य दलीलें: घरेलू बाजार बनाम विदेशी मुनाफा“घरेलू बाजार हमारी प्राथमिकता नहीं” – कंपनी का कथित जवाबहाई कोर्ट की टिप्पणी: सरकारी पॉलिसी का हो सख्ती से पालनमंत्रालय की जिम्मेदारी और कानूनी प्रावधानसंकट की जड़: ईरान युद्ध और वैश्विक परिदृश्यन्यायपालिका से उम्मीद

न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आगामी सोमवार तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह याचिका छह एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा दायर की गई है, जिन्होंने दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद निजी कंपनियां घरेलू बाजार के बजाय निर्यात को प्राथमिकता दे रही हैं।

याचिका की मुख्य दलीलें: घरेलू बाजार बनाम विदेशी मुनाफा

वकील श्याम दीवानी और साहिल दीवानी के माध्यम से दायर इस याचिका में बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ईरान में जारी युद्ध की स्थिति ने वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे एलपीजी उत्पादन में भारी रुकावट आई है।

पिटीशन में कहा गया है कि स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए घरेलू LPG सिलेंडर की सप्लाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का दावा है कि नागपुर स्थित कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड इन निर्देशों का उल्लंघन कर रही है।

“घरेलू बाजार हमारी प्राथमिकता नहीं” – कंपनी का कथित जवाब

पिटीशनर्स ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने कंपनी को कई बार प्रतिवेदन (Representations) दिए कि वह अपना निर्यात रोके और स्थानीय मांग को पूरा करे। याचिका के अनुसार, कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड ने उन्हें कथित तौर पर यह कहकर टाल दिया कि वे घरेलू बाजार को प्राथमिकता नहीं दे सकते क्योंकि उन्हें अपनी ‘एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी’ के तहत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करना है।

डिस्ट्रीब्यूटर्स का आरोप है कि कंपनी सरकारी नीतियों को ताक पर रखकर मुनाफे के लिए गैस का निर्यात कर रही है, जिससे महाराष्ट्र के कई जिलों में एलपीजी की किल्लत पैदा हो गई है।


हाई कोर्ट की टिप्पणी: सरकारी पॉलिसी का हो सख्ती से पालन

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि घरेलू LPG सिलेंडर की सप्लाई को प्राथमिकता देने की सरकार की नीति का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में आम नागरिकों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

विदित हो कि ये छह डिस्ट्रीब्यूटर्स कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम से भारी मात्रा में गैस खरीदते हैं और बाद में नागपुर सहित महाराष्ट्र के अन्य जिलों में घरों, होटलों, लघु उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आपूर्ति करते हैं। आपूर्ति में बाधा आने से इन सभी क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

मंत्रालय की जिम्मेदारी और कानूनी प्रावधान

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के पास एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के संबंध में नियम बनाने और निर्देश जारी करने की पूर्ण शक्ति है। मंत्रालय का प्राथमिक उत्तरदायित्व देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई निजी फर्म संकट के समय सरकारी निर्देशों की अवहेलना करती है, तो उस पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। अब सबकी नजरें सोमवार को होने वाली सुनवाई पर हैं, जहाँ केंद्र सरकार और निजी फर्म को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।


संकट की जड़: ईरान युद्ध और वैश्विक परिदृश्य

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्ष ने तेल और गैस के बाज़ारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। ईरान जैसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में सरकार का प्रयास होता है कि घरेलू रिज़र्व का उपयोग पहले अपने नागरिकों के लिए किया जाए। लेकिन निजी कंपनियों का ‘निर्यात-केंद्रित’ रवैया इस रणनीति में बाधा बन रहा है।

न्यायपालिका से उम्मीद

छह डिस्ट्रीब्यूटर्स की यह अर्जी केवल एक व्यापारिक विवाद नहीं है, बल्कि यह उस बड़े संकट का संकेत है जो अंतरराष्ट्रीय युद्धों के कारण आम आदमी की रसोई तक पहुँच जाता है। बॉम्बे हाई कोर्ट का हस्तक्षेप यह सुनिश्चित कर सकता है कि कॉर्पोरेट मुनाफे से पहले नागरिक सुविधाओं को रखा जाए।

अगली सुनवाई में यदि कोर्ट के आदेश सख्त रहते हैं, तो इसका असर न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश की एलपीजी वितरण व्यवस्था पर पड़ेगा और निजी रिफाइनरियों के लिए एक कड़ा संदेश जाएगा।

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