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उत्तराखंडफीचर्ड

Uttarakhand: कांग्रेस पार्टी ने गैस संकट पर दी अपनी प्रतिक्रिया, गणेश गोदियाल ने कहा-सरकार का विभागों के साथ तालमेल की कमी 

The Hill India News
Last updated: March 13, 2026 2:33 am
The Hill India News
Published: March 13, 2026
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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में इन दिनों रसोई गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की संभावित किल्लत को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। राज्य के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने इस मुद्दे पर एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जहां कांग्रेस इसे केंद्र सरकार की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की विफलता बता रही है, वहीं भाजपा ने इसे विपक्ष द्वारा फैलाया गया ‘भ्रम’ करार दिया है।

Contents
कूटनीति के मोर्चे पर विफल रही सरकार: गणेश गोदियालविपक्ष फैला रहा है भ्रम, देश में नहीं है कोई किल्लत: महेंद्र भट्टअंतरराष्ट्रीय संकट और घरेलू सियासतक्या है जमीनी हकीकत?जनता के बीच सस्पेंस बरकरार

कूटनीति के मोर्चे पर विफल रही सरकार: गणेश गोदियाल

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने गैस संकट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश और केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब होते हुए गोदियाल ने कहा कि वर्तमान में सरकारी विभागों के बीच तालमेल का घोर अभाव दिख रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “सरकार के भीतर ‘अपनी डफली अपना राग’ वाली स्थिति बनी हुई है। कोई भी विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।”

गोदियाल ने आने वाले समय के लिए चेतावनी देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के मद्देनजर पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत और अधिक गहरा सकती है। उन्होंने भारत सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “ईरान जैसे देशों ने अन्य राष्ट्रों को अपने पैसेज (मार्ग) से जो सहूलियतें दी हैं, वैसी कूटनीतिक सफलता भारत हासिल नहीं कर पाया। हमारी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति अब उतनी प्रभावी नहीं रही जितनी पहले हुआ करती थी। यदि सरकार ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया होता, तो आज देश को इस संकट के मुहाने पर खड़ा न होना पड़ता।”

विपक्ष फैला रहा है भ्रम, देश में नहीं है कोई किल्लत: महेंद्र भट्ट

दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भट्ट ने विपक्ष पर जनता के बीच डर और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण पूरा विश्व एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देश भी पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति में कमी और कीमतों में उछाल का सामना कर रहे हैं।

महेंद्र भट्ट ने मोदी सरकार की पीठ थपथपाते हुए कहा, “यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी रणनीतिक तैयारी का ही परिणाम है कि दुनिया भर में मचे हाहाकार के बावजूद भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की वैसी किल्लत नहीं है जैसी पड़ोसी देशों में देखी जा रही है। कांग्रेस और विपक्ष के नेता इस वैश्विक संकट का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से महंगाई और कमी की झूठी खबरें फैलाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।”


अंतरराष्ट्रीय संकट और घरेलू सियासत

वर्तमान में जारी गैस संकट और तेल की कीमतों को लेकर हो रही यह राजनीति दरअसल आने वाले समय की चुनौतियों का संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी देशों में अस्थिरता ने वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना अनिवार्य हो गया है।

क्या है जमीनी हकीकत?

देहरादून समेत उत्तराखंड के कई जिलों में पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडरों की बुकिंग और डिलीवरी में देरी की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, प्रशासन इसे तकनीकी कारणों और मांग-आपूर्ति के बीच का मामूली अंतर बता रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसे ‘गैस संकट’ का नाम देकर सरकार को बैकफुट पर धकेलने की रणनीति अपनाई है।

गणेश गोदियाल का कहना है कि सरकार को पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए तत्काल ठोस वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू करना चाहिए। वहीं, भाजपा का तर्क है कि सरकार पहले से ही सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है और वर्तमान संकट केवल क्षणिक है।

जनता के बीच सस्पेंस बरकरार

इस राजनीतिक खींचतान के बीच आम जनता असमंजस में है। महंगाई की मार झेल रहे मध्यम और निम्न वर्ग के लिए रसोई गैस की उपलब्धता एक संवेदनशील मुद्दा है। जहां कांग्रेस कूटनीतिक मोर्चे पर सरकार को घेरकर अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही है, वहीं भाजपा ‘वैश्विक संकट’ का हवाला देकर अपनी ढाल तैयार कर रही है।

अब देखना यह होगा कि क्या आने वाले दिनों में आपूर्ति सामान्य होती है या फिर यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा चुनावी हथियार बनेगा।

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