
देहरादून, 16 नवंबर। भारत की प्रसिद्ध पर्वतारोही और पद्मभूषण से सम्मानित बछेंद्री पाल ने एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 10 लाख रुपये का महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राज्य महिला उद्यमिता परिषद की उपाध्यक्ष विनोद उनियाल ने शनिवार को यह चेक मुख्यमंत्री को औपचारिक रूप से सौंपा। पल भर में यह खबर पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई, क्योंकि यह योगदान केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि एक प्रेरणा और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक भी है।
बछेंद्री पाल—पहाड़ों से लेकर मानवीय संवेदना तक की ऊँचाई छूती हस्ती
बछेंद्री पाल का नाम भारतीय पर्वतारोहण इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। वर्ष 1984 में माउंट एवरेस्ट पर कदम रखकर भारत की पहली महिला पर्वतारोही बनने वाली बछेंद्री पाल केवल खेल जगत की आइकन नहीं हैं, बल्कि सामाजिक सेवा, महिला सशक्तीकरण और नेतृत्व की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं।
आपदा के समय वह हमेशा स्वेच्छा से आगे आती रही हैं—चाहे उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदाएँ हों, चरम मौसम में फंसे लोग हों, या किसी सामाजिक संस्था की सहायता का प्रश्न। उनका यह नवीनतम योगदान इस परंपरा को और मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री राहत कोष—आपदा और आपात स्थिति में जीवन का सहारा
मुख्यमंत्री राहत कोष राज्य सरकार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए—
- प्राकृतिक आपदा में प्रभावित लोगों,
- गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नागरिकों,
- आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों,
- आपातकालीन परिस्थितियों में जरूरतमंदों
को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में आई अनेक आपदाओं—बाढ़, बादल फटने, भूस्खलन—ने इस कोष की महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया है।
इसलिए बछेंद्री पाल जैसा व्यक्तित्व जब सहायता के रूप में आगे आता है, तो यह न केवल आर्थिक सहयोग होता है, बल्कि सरकार और समाज दोनों के लिए एक प्रेरक संदेश होता है कि आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा—“सेवा और सहयोग समाज को जोड़ते हैं”
चेक प्राप्त करते समय मुख्यमंत्री ने बछेंद्री पाल के योगदान की सराहना करते हुए कहा:
“संकट की घड़ी में सेवा और सहयोग ही समाज को जोड़ते हैं। यह योगदान न सिर्फ ज़रूरतमंदों की सहायता करेगा, बल्कि असंख्य लोगों को जनहित के कार्यों के प्रति प्रेरित भी करेगा।”
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में प्रशासनिक और सामुदायिक स्तर पर आपदा प्रबंधन को और मजबूत किया जा रहा है, और ऐसे योगदान से राहत कार्यों में गति मिलती है।
विनोद उनियाल—महिला उद्यमिता और सामाजिक जिम्मेदारी का सुशोभित चेहरा
राज्य महिला उद्यमिता परिषद की उपाध्यक्ष विनोद उनियाल, जो इस चेक को सौंपने पहुंचीं, ने कहा कि समाज में प्रतिष्ठित हस्तियों द्वारा किया गया योगदान महिलाओं, युवाओं और उद्यमियों को सक्रिय रूप से जनकल्याण के कार्यों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है।
उनके अनुसार, “बछेंद्री पाल का यह कदम उत्तराखंड की बेटियों और पहाड़ी महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि सफलता के साथ संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है।”
आपदा प्रभावित परिवारों के लिए आशा की किरण
उत्तराखंड एक भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। यहां की पर्वतीय परिस्थितियाँ अक्सर प्राकृतिक आपदाओं का कारण बनती हैं—जैसे:
- अचानक बाढ़
- बादल फटना
- भूस्खलन
- पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क अवरोध
इन परिस्थितियों में प्रभावित परिवारों को त्वरित सहायता की आवश्यकता होती है, जिसके लिए राहत कोष का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज के अन्य सक्षम वर्ग और उद्योग जगत भी इस दिशा में आगे आएं, तो राज्य की आपदा प्रबंधन नीति को और मजबूत किया जा सकता है।
बछेंद्री पाल का यह कदम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
बछेंद्री पाल का सामाजिक दृष्टिकोण—चोटी पर पहुँचकर भी ज़मीनी जुड़ाव बरकरार
पर्वतारोहण के क्षेत्र में कई रिकॉर्ड बनाने वाली बछेंद्री पाल ने अपने करियर में देश-विदेश में कई अभियानों का नेतृत्व किया।
लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि—
- उन्होंने महिलाओं को पर्वतारोहण और रोमांचक गतिविधियों में प्रशिक्षित किया,
- ग्रामीण और पहाड़ी युवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए,
- और कई सामाजिक अभियानों में स्वयं भाग लिया।
उनका यह सामाजिक योगदान दर्शाता है कि वह केवल पर्वतारोही नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायी व्यक्तित्व हैं।
संकट के समय मिलकर चलने की आवश्यकता
देश और राज्य आज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं—आर्थिक, पर्यावरणीय, और सामाजिक। ऐसे समय पर प्रतिष्ठित हस्तियों द्वारा दिया गया सहयोग यह संदेश देता है कि समाज को सामूहिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, “कठिन समय में सरकार और समाज दोनों को एक साथ खड़े होने की आवश्यकता है। यही उत्तराखंड की परंपरा भी है—हर आपदा में एकजुट होकर सामना करना।”
आगे बढ़ने का संदेश
बछेंद्री पाल का यह योगदान केवल एक बार का आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि यह एक प्रेरक अध्याय है जो बताता है कि—
- बड़े लक्ष्य हासिल करने वाले लोग बड़े दिल भी रखते हैं,
- सफलता का असली अर्थ समाज को लौटाना है,
- और संवेदनशीलता ही किसी भी सभ्य समाज की आधारशिला है।
राज्य सरकार ने भी इस कदम को “सकारात्मक सामाजिक सहभागिता” का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।
एक पर्वतारोही जिसने समाज के दिल भी जीते
पर्वतों पर फतह करने की कहानी तो बछेंद्री पाल ने 40 साल पहले दुनिया को दिखा दी थी। अब एक बार फिर उन्होंने यह साबित कर दिया कि समाज की सेवा हर उपलब्धि से ऊपर है।
मुख्यमंत्री राहत कोष में 10 लाख रुपये का यह योगदान उत्तराखंड के आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राहत की सांस है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा।



