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योगेश गौड़ा हत्याकांड: कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को ‘दोहरी उम्रकैद’, कोर्ट ने कहा- अंतिम सांस तक रहेंगे जेल में

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चले आ रहे बहुचर्चित योगेश गौड़ा हत्याकांड में न्याय का बड़ा फैसला आया है। बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक विनय कुलकर्णी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता योगेश गौड़ा की निर्मम हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह सजा केवल सामान्य उम्रकैद नहीं है, बल्कि दोषियों को अपनी अंतिम सांस तक सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

17 दोषियों को सजा: न्याय का ऐतिहासिक प्रहार

सांसदों और विधायकों (MP-MLA) से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत के न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने इस मामले में न केवल विनय कुलकर्णी, बल्कि 16 अन्य आरोपियों को भी हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी पाया। बुधवार को कोर्ट ने इन्हें दोषी करार दिया था, जिसके बाद शुक्रवार को सजा के बिंदु पर जिरह पूरी हुई और अंतिम फैसला सुनाया गया।

अदालत ने अपने फैसले में इस हत्याकांड को एक सुनियोजित और जघन्य अपराध माना। सीबीआई (CBI) की विशेष लोक अभियोजक हेमा ने बताया कि कोर्ट ने 16 मुख्य दोषियों को हत्या और साजिश दोनों ही धाराओं में ‘दोहरी उम्रकैद’ की सजा दी है।


जिम में हुई थी निर्मम हत्या: राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का खूनी खेल

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें साल 2016 से जुड़ी हैं। धारवाड़ जिला पंचायत के तत्कालीन सदस्य और उभरते हुए भाजपा नेता योगेश गौड़ा की 15 जून 2016 को धारवाड़ के सप्तपुर इलाके में स्थित एक जिम में हत्या कर दी गई थी। चश्मदीदों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, भाड़े के हमलावरों ने जिम के भीतर घुसकर गौड़ा पर तेज धारदार हथियारों से हमला किया था।

उस समय कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी और विनय कुलकर्णी कद्दावर मंत्री के पद पर आसीन थे। जांच में यह बात सामने आई कि कुलकर्णी, योगेश गौड़ा को अपना सबसे बड़ा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानते थे। गौड़ा का बढ़ता कद और क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता कुलकर्णी के लिए चुनौती बन गई थी, जिसे खत्म करने के लिए कथित तौर पर खूनी साजिश रची गई।


CBI जांच और ‘मास्टरमाइंड’ का खुलासा

शुरुआती दौर में इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी, जिस पर तत्कालीन भाजपा नेताओं ने जांच को प्रभावित करने और आरोपियों को बचाने के गंभीर आरोप लगाए थे। 2019 में जब कर्नाटक में भाजपा की सरकार आई, तब मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं और पीड़ित परिवार की मांग पर यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया।

CBI ने 2020 में अपनी पूरक चार्जशीट दाखिल की, जिसने पूरी राजनीति में भूचाल ला दिया। जांच एजेंसी ने पुख्ता सबूतों के आधार पर दावा किया कि विनय कुलकर्णी उम्रकैद सजा पाने वाले एकमात्र मास्टरमाइंड थे, जिन्होंने जेल में बंद अपराधियों और पेशेवर हमलावरों के साथ मिलकर इस हत्या की रूपरेखा तैयार की थी। जांच एजेंसी ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और गवाहों के बयानों के जरिए यह साबित किया कि हत्या के समय और उससे पहले कुलकर्णी लगातार संदिग्धों के संपर्क में थे।


अदालत में तीखी बहस: बचाव पक्ष बनाम सीबीआई

सजा सुनाए जाने से पहले कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। सीबीआई की ओर से पेश वकील हेमा ने अदालत से मांग की थी कि विनय कुलकर्णी और उनके सहयोगियों को ऐसी सजा दी जाए जिसमें किसी भी प्रकार की सरकारी छूट (Remission) की गुंजाइश न हो। उन्होंने इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी का अपराध बताया।

वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों ने कुलकर्णी की उम्र, उनके सामाजिक योगदान और पारिवारिक दायित्वों का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा की अपील की थी। हालांकि, जज भट ने अपराध की प्रकृति और लोकतंत्र में एक जनप्रतिनिधि द्वारा की गई इस आपराधिक साजिश को अत्यंत गंभीर मानते हुए बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया।


जुर्माना और मुआवजे का आदेश

अदालत ने केवल कारावास की सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि भारी आर्थिक दंड भी लगाया है। दोषियों पर कुल मिलाकर लगभग 12.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मृतक योगेश गौड़ा के बच्चों और उनके भाई गुरुनाथ गौड़ा को कुल 16 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

इस मामले में एक पुलिस अधिकारी, जिसे सबूतों को मिटाने और अपराधियों को संरक्षण देने का दोषी पाया गया था, उसे भी राहत नहीं मिली। उसे 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।


राजनीति के अपराधीकरण पर करारा तमाचा

विनय कुलकर्णी को मिली यह सजा न केवल पीड़ित परिवार के लिए एक लंबी कानूनी लड़ाई की जीत है, बल्कि यह उन बाहुबली नेताओं के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो सत्ता की हनक में कानून को हाथ में लेने का दुस्साहस करते हैं। विनय कुलकर्णी उम्रकैद सजा का यह फैसला भविष्य में राजनीतिक हत्याओं के मामलों में एक ‘नजीर’ की तरह काम करेगा।

फिलहाल, कांग्रेस विधायक के वकील इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन विशेष अदालत के इस सख्त रुख ने कर्नाटक की राजनीति में सुचिता और न्याय की उम्मीदों को एक नया जीवन दिया है।

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