By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: नई दिल्ली : ग्रामीण भारत में 95 प्रतिशत भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > दिल्ली > नई दिल्ली : ग्रामीण भारत में 95 प्रतिशत भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण
दिल्लीदेश

नई दिल्ली : ग्रामीण भारत में 95 प्रतिशत भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण

The Hill India News
Last updated: October 26, 2024 3:59 pm
The Hill India News
Published: October 26, 2024
Share
SHARE

ग्रामीण भारत भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण और भूमि स्वामित्व के प्रबंधन का आधुनिकीकरण के साथ एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह पहल भूमि प्रशासन में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाती है, लाखों ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाती है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में इस बदलाव के महत्व पर बल दिया, जिससे जटिल कागजी कार्रवाई और स्वामित्व विवाद संबंधित लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि 2016 के बाद से ग्रामीण भारत में लगभग 95 प्रतिशत भूमि अभिलेखों का का डिजिटलीकरण किया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुलभ भूमि स्वामित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।

भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण करने की आवश्यकता

भारत में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण ने विवादों, धोखाधड़ी और अक्षम मैनुअल प्रक्रियाओं जैसी पारंपरिक चुनौतियों का समाधान करके भूमि प्रबंधन में परिवर्तन लाया है। अब, स्वामित्व की जानकारी आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध है,जो पारदर्शिता को बढ़ावा देती है और अवैध अतिक्रमण को कमी लाती है। डिजीटल अभिलेख विवादों के निपटान को सरल बनाते हैं, अदालत के बोझ को कम करते हैं और भूमि अधिकारों तक पहुंच में सुधार लाते हुए वंचित समुदायों को सशक्त बनाते हैं। भू-स्थानिक मानचित्रण के साथ एकीकरण भूमि प्रबंधन को बढ़ावा देता है, सटीक सर्वेक्षण एवं योजनाओं को सक्षम बनाता है। भूमि अधिग्रहण या आपदाओं के दौरान, डिजिटल अभिलेख उचित और समय पर मुआवजा सुनिश्चित करते हैं। कुल मिलाकर, इस बदलाव से भारत में ज्यादा पारदर्शी, सुलभ और कुशल भूमि शासन प्रणाली का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी)

डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी), जिसे पहले राष्ट्रीय भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम के नाम से जाना जाता था, केंद्र सरकार से पूर्ण वित्त पोषित होता है और अप्रैल 2016 में केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में इसका पुनर्गठन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य एक एकीकृत भूमि सूचना प्रबंधन प्रणाली विकसित करके एक आधुनिक एवं पारदर्शी भूमि अभिलेख प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना है। इस प्रणाली का उद्देश्य वास्तविक समय पर भूमि की जानकारी प्रदान करना, भूमि उपयोग को अनुकूलित करना, भूस्वामियों एवं संभावित खरीदारों को लाभ पहुंचाना, नीति-निर्माण का समर्थन करना, भूमि विवादों में कमी लाना, धोखाधड़ी वाले लेनदेन को रोकना, कार्यालयों में व्यक्तिगत भ्रमण को समाप्त करना और विभिन्न संगठनों के साथ डेटा साझा को सक्षम बनाना है।

उपलब्धियां:

डीआईएलआरएमपी के अंतर्गत महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लगभग 95 प्रतिशत भूमि अभिलेखों को कम्प्यूटरीकृत किया गया है, जिसमें 6.26 लाख से ज्यादा गांव शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भूकर मानचित्रों का डिजिटलीकरण 68.02 प्रतिशक तक हो चुका है। इसके अतिरिक्त, 87 प्रतिशत उप-पंजीयक कार्यालयों (एसआरओ) को भूमि रिकॉर्ड के साथ एकीकृत किया गया है। सरकार ने भूमि अभिलेखों के साथ आधार-आधारित एकीकरण और राजस्व अदालतों के कम्प्यूटरीकरण जैसी नई सुविधाओं को जोड़ते हुए डीआईएलआरएमपी को 2025-26 तक बढ़ा दिया है।

डीआईएलआरएमपी के अंतर्गत प्रमुख पहल

  • विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन):

यूएलपीआईएन या “भू-आधार” प्रत्येक भूमि पार्सल के लिए उसके भू-निर्देशांक के आधार पर 14 अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक कोड प्रदान करता है। 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यान्वित, यह अचल संपत्ति के लेनदेन को सुव्यवस्थित करने, संपत्ति विवादों का समाधान करने और आपदा प्रबंधन प्रयासों में सुधार लाने में मदद करता है।

  • राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस):

एनजीडीआरएस या ई-पंजीकरण पूरे देश में विलेख/दस्तावेज़ पंजीकरण के लिए एक समान प्रक्रिया प्रदान करता है, जिससे ऑनलाइन प्रवेश, भुगतान, अपॉइंटमेंट और दस्तावेज़ खोज की अनुमति मिलती है। अब तक, 18 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने इस प्रणाली अपनाया है और 12 अन्य राष्ट्रीय पोर्टल के साथ डेटा साझा कर रहे हैं।

  • ई-कोर्ट एकीकरण:

भूमि अभिलेखों को ई-कोर्ट से जोड़ने का उद्देश्य न्यायपालिका को प्रामाणिक भूमि जानकारी प्रदान करना, मामलों का तेजी से समाधान में सहायता प्रदान करना और भूमि विवादों में कमी लाना है। 26 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एकीकरण को मंजूरी प्रदान की गई है।

  • भूमि अभिलेखों का अनुवाद:

भूमि अभिलेखों तक पहुंचने में भाषा की समस्याओं का समाधान करने के लिए, इस कार्यक्रम में भारतीय संविधान की अनुसूची VIII में सूचीबद्ध 22 भाषाओं में से किसी में भूमि अभिलेखों का अनुवाद उपलब्ध है। यह 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पहले से ही प्रयोग में है।

  • भूमि सम्मान:

इस पहल के अंतर्गत, 16 राज्यों के 168 जिलों ने भूमि रिकॉर्ड कम्प्यूटरीकरण और मानचित्र डिजिटलीकरण सहित कार्यक्रम के मुख्य घटकों के 99 प्रतिशत से अधिक को पूरा करने के लिए “प्लेटिनम ग्रेडिंग” प्राप्त की है।

निष्कर्ष

भारत सरकार भूमि शासन में एक परिवर्तनकारी बदलाव ला रही है, जो भूमि जानकारी में पारदर्शिता एवं पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। भू-स्थानिक मानचित्रण और अद्वितीय भूमि पार्सल पहचान जैसी आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाकर, यह पहल भूमि अभिलेखों के प्रबंधन के लिए एक ज्यादा संगठित एवं कुशल दृष्टिकोण स्थापित करना चाहती है। यह परिवर्तन वंचित समुदायों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें स्वामित्व के सुरक्षित एवं सुलभ प्रमाण के साथ सशक्त बनाता है जो कि आर्थिक विकास एवं स्थिरता के लिए एक आवश्यक कारक होते हैं। जैसे-जैसे भूमि अभिलेख स्पष्ट और ज्यादा सुलभ होते जाते हैं, वे एक ज्यादा समावेशी एवं न्यायसंगत समाज का मार्ग प्रशस्त करते हैं, जहां प्रत्येक व्यक्ति अपने सही स्थान का दावा कर सकता है और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान दे सकता है।

 

You Might Also Like

दिल्ली के CM पद पर रहेंगे या हटेंगे केजरीवाल, सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई में ये बोले न्यायमूर्ति
विपक्ष पर चिल्ला-चिल्लाकर मेरा गला बैठ गया” – केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद गतिरोध पर साधा निशाना
पोर्ट ब्लेयर: सैनिकों के कल्याण के लिए सरकार हमेशा तैयार है, ठीक उसी तरह जैसे वे देश की सुरक्षा के लिए तैयार हैं: रक्षा मंत्री
सावधान! दिल्ली में फर्जी नौसेना अधिकारी बनकर महिला से दोस्ती, फिर यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग; यूपी का आरोपी गिरफ्तार
आंध्र प्रदेश: हावड़ा-चेन्नई लाइन पर आपस में टकराई दो ट्रेनें, 10 की मौत 30 से ज्यादा घायल
TAGGED:Digitizationland recordsNew Delhirural India.
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर नैनीताल जिला प्रशासन का बड़ा प्रहार; डीएम का सख्त आदेश- अतिरिक्त शुल्क लौटाएं या एडजस्ट करें, उल्लंघन पर 5 लाख तक जुर्माना

The Hill India News
The Hill India News
June 27, 2026
अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च व पुनीत कार्य, जनभागीदारी से इसे राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन बनाना आवश्यक: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा
फीफा वर्ल्ड कप 2026: डेम्बेले की खौफनाक हैट्रिक से फ्रांस ने नॉर्वे को उड़ाया, सेनेगल ने इराक को 5-0 से रौंदकर जिंदा रखीं उम्मीदें
अलीगढ़ में AIMIM नेता का खौफनाक एलान, BJP नेता नाजिया इलाही की जुबान काटने वाले को 1 लाख का इनाम
रुड़की में मामा की बेटी से लव मैरिज की खौफनाक सजा, सगे मामा ने बीच बाजार भांजे को चाकुओं से गोदकर मार डाला
मध्य भारत को पार कर यूपी-उत्तराखंड की ओर बढ़ा मानसून, मुंबई में भारी आफत का ‘ऑरेंज अलर्ट’, दिल्ली-NCR में भी बदलेगा मौसम
वेनेजुएला में कुछ ही मिनटों में आए दो शक्तिशाली भूकंप, राजधानी काराकास में इमारतें जमींदोज, सुनामी का हाई अलर्ट
हरिद्वार में बड़ा हादसा टला: BHEL क्षेत्र में नर्सिंग छात्राओं से भरी कॉलेज बस का CNG सिलेंडर लीक, मची अफरा-तफरी
डिजिटल गवर्नेंस की ओर देहरादून के बढ़ते कदम: सरकारी दफ्तरों को पूरी तरह ‘पेपरलेस’ बनाने की तैयारी, अफसरों को मिला ई-ऑफिस का व्यावहारिक पाठ
उत्तराखंड में हाई अलर्ट: चारधाम समेत धार्मिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकी, अभेद्य किले में तब्दील हुए केदारनाथ-बदरीनाथ; सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?