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इजरायल के लिए ईरान से भी बड़ा खतरा क्यों बना हिज्बुल्लाह? सीजफायर के बावजूद लेबनान पर हमलों की 7 बड़ी वजहें

मिडिल ईस्ट में हालिया तनाव के बीच एक दिलचस्प और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर की सहमति बनने के बावजूद लेबनान में हिंसा थमती नजर नहीं आ रही है। इजरायल ने लेबनान में स्थित हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर इजरायल, ईरान जैसे शक्तिशाली देश की बजाय हिज्बुल्लाह को ज्यादा खतरनाक क्यों मान रहा है?

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका जवाब केवल सैन्य ताकत में नहीं बल्कि रणनीतिक स्थिति, युद्ध शैली और तत्काल खतरे की प्रकृति में छिपा हुआ है। आइए विस्तार से समझते हैं वे 7 प्रमुख कारण, जिनकी वजह से हिज्बुल्लाह इजरायल के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

1. भौगोलिक नजदीकी बनाम दूरी का फर्क
इजरायल और ईरान के बीच लगभग 1000 किलोमीटर की दूरी है। इस दूरी के कारण यदि ईरान हमला करता है तो इजरायल के पास प्रतिक्रिया देने और तैयारी का समय होता है। लेकिन हिज्बुल्लाह सीधे लेबनान-इजरायल सीमा पर मौजूद है। इसका मतलब है कि उत्तरी इजरायल के शहरों पर हमले का खतरा हर समय बना रहता है और चेतावनी का समय बेहद कम होता है।

2. रॉकेट और मिसाइलों का विशाल भंडार
हिज्बुल्लाह को दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-राज्य सैन्य संगठनों में गिना जाता है। अनुमान है कि उसके पास 1.2 लाख से 2 लाख तक रॉकेट और मिसाइलें हो सकती हैं। भले ही हालिया संघर्षों में उसे कुछ नुकसान हुआ हो, लेकिन उसकी मारक क्षमता अभी भी बेहद खतरनाक है। इतनी बड़ी संख्या में हथियार किसी भी समय बड़े पैमाने पर हमला करने की क्षमता देते हैं।

3. युद्ध की अलग और खतरनाक रणनीति
ईरान जहां सीमित लेकिन शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइलों पर निर्भर करता है, वहीं हिज्बुल्लाह “स्वार्म अटैक” यानी एक साथ बड़ी संख्या में छोटे रॉकेट और ड्रोन दागने की रणनीति अपनाता है। इससे इजरायल का मशहूर एयर डिफेंस सिस्टम “आयरन डोम” भी दबाव में आ जाता है। लगातार हमलों से यह सिस्टम थक सकता है और आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।

4. ‘रदवान फोर्स’ की घुसपैठ क्षमता
हिज्बुल्लाह के पास एक विशेष यूनिट है जिसे “रदवान फोर्स” कहा जाता है। यह यूनिट सीमा पार कर इजरायल के अंदर घुसपैठ करने के लिए प्रशिक्षित है। इनका मकसद इजरायली बस्तियों पर कब्जा करना या लोगों को बंधक बनाना हो सकता है। यह खतरा पारंपरिक मिसाइल हमलों से कहीं ज्यादा जटिल और गंभीर है।

5. सटीक निशाना साधने वाली मिसाइलें
पहले हिज्बुल्लाह के पास साधारण रॉकेट होते थे, लेकिन अब उसने प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलें भी विकसित कर ली हैं। ये मिसाइलें बिजली संयंत्रों, सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को सटीक तरीके से निशाना बना सकती हैं। इससे इजरायल की रणनीतिक सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा होता है।

6. ईरान के साथ गहरा सैन्य गठजोड़
हिज्बुल्लाह को अक्सर ईरान का करीबी सहयोगी और उसकी “पहली रक्षा पंक्ति” माना जाता है। अगर भविष्य में इजरायल, ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करता है, तो हिज्बुल्लाह तुरंत जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इस तरह इजरायल को एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध का खतरा बना रहता है।

7. लगातार और तत्काल खतरे की भावना
ईरान का खतरा रणनीतिक और दीर्घकालिक माना जाता है, जबकि हिज्बुल्लाह का खतरा तत्काल और लगातार बना रहता है। उत्तरी इजरायल के नागरिकों के लिए यह एक रोजमर्रा का डर है, जहां किसी भी समय रॉकेट या ड्रोन हमला हो सकता है। यही वजह है कि इजरायल की सुरक्षा नीति में हिज्बुल्लाह को प्राथमिक खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

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