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उत्तराखंड: हल्द्वानी में निजी स्कूलों पर प्रशासन का बड़ा शिकंजा, महंगी किताबें थोपने पर 46 स्कूलों को नोटिस

The Hill India News
Last updated: April 9, 2026 8:05 am
The Hill India News
Published: April 9, 2026
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हल्द्वानी: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर में निजी स्कूलों की मनमानी पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। अभिभावकों पर महंगी किताबें थोपने और नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में 46 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने इन स्कूलों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

दरअसल, पिछले कुछ समय से अभिभावकों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि निजी स्कूल उन्हें एनसीईआरटी की निर्धारित और सस्ती किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से जांच अभियान चलाया। जांच में जो तथ्य सामने आए, वे काफी चौंकाने वाले थे।

जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कई निजी स्कूलों और बुक सेलरों के बीच आपसी सांठगांठ चल रही थी। स्कूलों द्वारा अभिभावकों को विशेष दुकानों से ही किताबें और कॉपियां खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा था। कई मामलों में अभिभावकों को पर्चियां देकर तय दुकानों की ओर निर्देशित किया जाता था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह एक संगठित व्यवस्था के तहत किया जा रहा था। इस तरह की गतिविधियां न केवल नियमों के खिलाफ हैं, बल्कि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ाती हैं।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने बताया कि 46 निजी स्कूलों को जारी किए गए नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनका यह कृत्य शासन और सीबीएसई के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। सभी संबंधित स्कूलों को 11 अप्रैल 2026 तक शाम 5 बजे तक अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा जांच में यह भी पाया गया कि कई स्कूलों ने अपनी वेबसाइट पर अनिवार्य जानकारी, जैसे फीस संरचना, नियम और अन्य जरूरी विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं। यह भी शिक्षा विभाग के नियमों के खिलाफ है। प्रशासन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब नहीं दिया गया या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

संभावित कार्रवाई में स्कूलों की मान्यता रद्द करना, संबद्धता समाप्त करना और अन्य विधिक एवं प्रशासनिक कदम शामिल हो सकते हैं। इस सख्ती के बाद शहर के निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया है और कई स्कूल अब अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गए हैं।

अभिभावकों ने जिला प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी के कारण उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा था। अब प्रशासन की इस कार्रवाई से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की सख्ती बेहद जरूरी है, ताकि स्कूलों में पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों का शोषण न हो। एनसीईआरटी की किताबें जहां एक ओर गुणवत्तापूर्ण और सस्ती होती हैं, वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें कई गुना महंगी होती हैं, जिनका कोई स्पष्ट औचित्य नहीं होता।

कुल मिलाकर, हल्द्वानी में जिला प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन सकता है। यदि इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहती है, तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अभिभावकों को राहत मिलना तय है।

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