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उत्तराखंड: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 65 लाख की ठगी, जम्मू-कश्मीर से दो साइबर ठग गिरफ्तार

The Hill India News
Last updated: April 9, 2026 6:23 am
The Hill India News
Published: April 9, 2026
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देहरादून: देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को ठगने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एसटीएफ ने जम्मू-कश्मीर के बडगाम (श्रीनगर) से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देश के कई राज्यों में सक्रिय था और फर्जी पहचान तथा बैंक खातों के जरिए करोड़ों की ठगी को अंजाम दे रहा था।

मामला देहरादून निवासी 71 वर्षीय बुजुर्ग से जुड़ा है, जिन्होंने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 21 नवंबर 2025 को उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकम्युनिकेशन विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस में धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। इस झूठी जानकारी से बुजुर्ग को डराया गया और उन्हें दूसरे नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा गया।

इसके बाद दूसरे नंबर पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को सीबीआई या दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया और पीड़ित को बताया कि उनके नाम से दिल्ली में एक बैंक खाते के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही है। ठगों ने अपनी बात को विश्वसनीय बनाने के लिए व्हाट्सएप वीडियो कॉल का सहारा लिया। वीडियो कॉल के दौरान उन्होंने पुलिस की वर्दी पहनकर फर्जी दस्तावेज और गैर-जमानती वारंट दिखाया, जिससे बुजुर्ग बुरी तरह डर गए।

डर और दबाव में आकर बुजुर्ग ने ‘बैंक खातों के सत्यापन’ के नाम पर ठगों के बताए गए विभिन्न खातों में करीब 65 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। कुछ समय बाद जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ की साइबर टीम ने जांच शुरू की। तकनीकी विश्लेषण और डेटा की गहन पड़ताल के बाद पुलिस को आरोपियों के नेटवर्क के बारे में अहम जानकारी मिली। जांच में सामने आया कि यह गिरोह फर्जी बैंक खातों, मोबाइल सिम और एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकालता था।

जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि इस गिरोह के खिलाफ उत्तराखंड समेत देश के 7 राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं। इससे स्पष्ट हुआ कि यह एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क है, जो बड़े स्तर पर लोगों को निशाना बना रहा था।

एसटीएफ को सूचना मिली कि इस गिरोह के दो मुख्य सदस्य—शौकत हुसैन मलिक और बिलाल अहमद—जम्मू-कश्मीर के बडगाम क्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को स्थानीय स्तर पर कुछ विरोध का सामना भी करना पड़ा। बताया गया कि बड़ी संख्या में लोग थाना और न्यायालय परिसर में इकट्ठा हो गए थे, लेकिन पुलिस टीम ने संयम और सतर्कता से कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने उनका रिमांड हासिल किया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर लोगों को झांसे में लेते थे और बैंक खाते उपलब्ध कराकर संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम देते थे।

इस पूरे नेटवर्क में “म्यूल अकाउंट” यानी ऐसे बैंक खाते भी शामिल थे, जिनका इस्तेमाल केवल ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था। जांच में यह पाया गया कि इन खातों में कुछ ही महीनों के भीतर लाखों रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है।

उधर, उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में भी इसी तरह के साइबर अपराध के मामले सामने आए हैं। साइबर सेल की जांच में एक ऐसे म्यूल बैंक खाते का पता चला है, जिसका इस्तेमाल देशभर में धोखाधड़ी के कई मामलों में किया गया है। इस खाते से करीब 4,00,008 रुपये का लेन-देन हुआ है।

एक अन्य मामले में रुद्रपुर के आवास विकास क्षेत्र में एक संदिग्ध बैंक खाते की पहचान की गई है। जांच में सामने आया कि इस खाते के जरिए 3,63,000 रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस खाते से संबंधित न तो कोई मोबाइल नंबर दर्ज है और न ही खाताधारक की पूरी जानकारी उपलब्ध है। इससे बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को डराकर ठगी करता था। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें, जिसमें खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पैसे की मांग की जाए।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए इस तरह पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। यदि किसी को इस प्रकार का कॉल आता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।

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