By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: ‘अपने घर में क्यों नहीं खिलाते?’ – सुप्रीम कोर्ट की आवारा कुत्तों को लेकर सख्त टिप्पणी, याचिका पर सुनवाई टली
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > ‘अपने घर में क्यों नहीं खिलाते?’ – सुप्रीम कोर्ट की आवारा कुत्तों को लेकर सख्त टिप्पणी, याचिका पर सुनवाई टली
देशफीचर्ड

‘अपने घर में क्यों नहीं खिलाते?’ – सुप्रीम कोर्ट की आवारा कुत्तों को लेकर सख्त टिप्पणी, याचिका पर सुनवाई टली

The Hill India News
Last updated: July 16, 2025 4:14 am
The Hill India News
Published: July 16, 2025
Share
SHARE

नई दिल्ली: देशभर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा – “अगर आप कुत्तों से इतना प्रेम करते हैं, तो उन्हें अपने घर में रखकर खिलाइए। सड़कों को इनके लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता।” यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें नोएडा निवासी ने शिकायत की थी कि कुत्तों को खाना खिलाने के कारण उन्हें परेशान किया जा रहा है।

Contents
कोर्ट की दो टूक – सड़कों को इंसानों के लिए भी खुला रहने दीजिएक्या कहा याचिकाकर्ता ने?🚴‍♂️ ‘एक बार सुबह साइकिल चला कर देखिए…’याचिका को अन्य समान मामलों के साथ जोड़ा गयाहाई कोर्ट भी दे चुका है सख्त निर्देशसामाजिक चिंता बनता जा रहा है आवारा कुत्तों का मामलासंतुलन की जरूरत – सुरक्षा भी, सहानुभूति भी

कोर्ट की दो टूक – सड़कों को इंसानों के लिए भी खुला रहने दीजिए

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा –

“हर गली और सड़क क्या इन ‘बड़े दिल वालों’ के लिए खुली छोड़ दी जाए? क्या इंसानों की कोई जगह नहीं बची? अगर इतना ही प्यार है, तो अपने घर में शेल्टर बनाकर खिलाइए।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों पर जानवरों को खाना खिलाना आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा के खिलाफ हो सकता है, खासकर जब सुबह वॉकर्स, साइकिल सवार और बच्चों पर हमलों की घटनाएं सामने आती हैं।


क्या कहा याचिकाकर्ता ने?

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि वह एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2023 के नियम 20 का पालन कर रहे हैं, जिसमें स्थानीय निकायों द्वारा आवारा जानवरों के लिए भोजन की व्यवस्था का उल्लेख है। वकील ने कहा कि ग्रेटर नोएडा में इसके लिए ज़ोन चिन्हित किए जा रहे हैं, लेकिन नोएडा में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने सुझाव दिया कि कम भीड़भाड़ वाली जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने के लिए निर्दिष्ट स्थान बनाए जाएं, जिससे आम नागरिकों को परेशानी न हो।


🚴‍♂️ ‘एक बार सुबह साइकिल चला कर देखिए…’

वकील की बात पर कोर्ट ने व्यंग्य करते हुए कहा,

“क्या आप सुबह साइकिल चलाते हैं? एक बार चलाकर देखिए, फिर पता चलेगा कि खतरा कैसा होता है।”

कोर्ट ने कहा कि सिर्फ टहलने वाले ही नहीं, साइकिल और दोपहिया वाहन चलाने वाले लोग भी खतरे में रहते हैं, जब आवारा कुत्ते अचानक हमला कर देते हैं।


याचिका को अन्य समान मामलों के साथ जोड़ा गया

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को इसी तरह के एक अन्य मामले के साथ जोड़कर सुनवाई स्थगित कर दी है। अब दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई की जाएगी।


हाई कोर्ट भी दे चुका है सख्त निर्देश

मार्च 2025 में इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि

“आवारा कुत्तों की सुरक्षा ज़रूरी है, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।”

हाई कोर्ट ने नगर निकायों को निर्देश दिया था कि जनता और पशु प्रेमियों – दोनों के हितों का संतुलन बनाया जाए।


सामाजिक चिंता बनता जा रहा है आवारा कुत्तों का मामला

देशभर से आए दिन ऐसी खबरें आती हैं, जहां आवारा कुत्तों के हमलों से बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को गंभीर चोटें आई हैं। कई मामलों में जान भी चली गई है।
वहीं, पशु अधिकारों की पैरवी करने वाले समूह मानते हैं कि प्रेम और करुणा का रास्ता भी खुला रहना चाहिए, लेकिन यह नियमों और स्थानों की स्पष्टता के साथ होना चाहिए।


संतुलन की जरूरत – सुरक्षा भी, सहानुभूति भी

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है कि जानवरों के अधिकार और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। इस दिशा में अब नीतिगत समाधान और स्थानीय प्रशासन की स्पष्ट भूमिका की ज़रूरत महसूस की जा रही है।

You Might Also Like

पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर जोरदार उछाल, दिल्ली-एनसीआर से पटना तक बढ़े रेट, आम जनता पर बढ़ा महंगाई का दबाव
LUCC चिट फंड घोटाला: अब तक 8 गिरफ्तार, 4 के खिलाफ LOC, 189 करोड़ की धोखाधड़ी की आशंका
‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को मिला राष्ट्रीय स्वरूप: शिवराज सिंह चौहान बोले, यह सरकारी योजना नहीं, जन आंदोलन है
पाकिस्तान की सीमा के मामले में बड़ी खबर, SSB के दो जवानों को किया गया सस्पेंड
पश्चिम बंगाल चुनाव: स्ट्रॉन्ग रूम में EVM से छेड़छाड़ के आरोपों पर सियासी संग्राम, ममता बनर्जी ने दी कड़ी चेतावनी
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
फीचर्डविदेशस्पोर्ट्स

तेहरान से वर्ल्ड कप तक: क्या अमेरिका-ईरान तनाव की कीमत चुका रही है ईरानी फुटबॉल टीम?

The Hill India News
The Hill India News
June 17, 2026
राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: फॉर्महाउस, बंगले और करोड़ों की संपत्ति के आरोपों में घिरे 6 अहम किरदार, एसआईटी जांच से बढ़ी हलचल
पेपर लीक से डेटा लीक तक: क्यों सवालों के घेरे में है टेलीग्राम? भारत समेत कई देशों ने दिखाई सख्ती, जानिए पूरा मामला
लखनऊ मेट्रो का महाविस्तार: 10 नए कॉरिडोर से बदलेगी राजधानी की तस्वीर, बाराबंकी से उन्नाव तक दौड़ेगी मेट्रो
किशाऊ बांध परियोजना का रास्ता साफ: अमित शाह के हस्तक्षेप से खत्म हुआ वर्षों पुराना विवाद, उत्तराखंड को बड़ी राहत
व्हाइट हाउस में ट्रंप पर हमले की बड़ी साजिश नाकाम, ड्रोन और स्नाइपर से जन्मदिन समारोह को दहलाने की थी तैयारी, मां की सूचना से पकड़े गए 5 आरोपी
उत्तराखंड में एसटी प्रमाण पत्रों पर बड़ा विवाद: राज्य गठन के बाद जारी सभी प्रमाण पत्रों की जांच की मांग, सरकारी लाभों की भी हो सकती है समीक्षा
उत्तराखंड: कर्णप्रयाग हिंसा के बाद हेमकुंड साहिब ट्रस्ट की बड़ी अपील, धर्म रक्षा के लिए हैं शस्त्र, दुरुपयोग से बचें श्रद्धालु
मेसी का महाविस्फोट: विश्व कप में रचा इतिहास, सबसे अधिक गोल करने वाले संयुक्त रूप से पहले खिलाड़ी बने
शिवसेना UBT में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी! आखिर क्यों उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने को तैयार दिख रहे हैं सांसद?
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?