नई दिल्ली: देश के करोड़ों किसानों और भीषण गर्मी से झुलस रहे आम जनमानस के लिए मौसम के मोर्चे से एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले करीब दो सप्ताह (15 दिनों) से महाराष्ट्र और उसके आस-पास के क्षेत्रों में सुस्त पड़ा दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर अपनी रफ्तार पकड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, वायुमंडलीय परिस्थितियां अब मानसून के आगे बढ़ने के लिए बेहद अनुकूल हो चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आगामी 23 जून के आसपास देश के एक बड़े हिस्से में मानसून की दस्तक देखने को मिलेगी, जिससे कृषि कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जहां एक तरफ देश का पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सा मूसलाधार बारिश से सराबोर है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर-मध्य भारत के कई राज्य अब भी भीषण लू (Heatwave) की चपेट में हैं।
23 जून से बदलेगा मौसम का मिजाज, इन राज्यों में आगे बढ़ेगा मानसून
मौसम विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, ठिठका हुआ मानसून अब तेजी से उत्तर और उत्तर-पूर्वी दिशा की ओर अग्रसर हो रहा है। आगामी 23 जून तक इसके महाराष्ट्र के शेष हिस्सों, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और इलाकों में दाखिल होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही, मध्य भारत के प्रमुख राज्य छत्तीसगढ़ में भी इसी अवधि के दौरान मानसून की विधिवत एंट्री हो सकती है।
आईएमडी के महानिदेशक के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नम हवाओं में आई तेजी और एक नए कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के सक्रिय होने के कारण मानसून के पैर अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस बदलाव के कारण मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों में छाए सूखे और उमस भरे मौसम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पूर्वोत्तर में आफत की बारिश: असम, मेघालय और बंगाल में ‘रेड अलर्ट’ जारी
एक तरफ जहां देश के कई हिस्से मानसून की पहली फुहार के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों में बादलों ने डेरा डाल रखा है। पिछले 24 घंटों के दौरान मेघालय में कुछ स्थानों पर ‘असाधारण रूप से भारी वर्षा’ दर्ज की गई है, जिसने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी ‘अत्यंत भारी से बहुत भारी’ बारिश रिकॉर्ड की गई है।
मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के लिए रेड अलर्ट (Red Alert) जारी किया है। इन राज्यों में 25 जून तक लगातार मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (Landslides) का खतरा बढ़ गया है। सिक्किम और उत्तरी बंगाल में भी सोमवार से ही भारी बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी दी गई है।
ऑरेंज अलर्ट: तेज हवाओं के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका
मानसून के इस नए स्पेल (दौर) के कारण केवल भारी बारिश ही नहीं, बल्कि तेज आंधी-तूफान का खतरा भी मंडरा रहा है। आईएमडी ने अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) जारी किया है। इन राज्यों में अगले 48 से 72 घंटों के दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली (Lightening) गिरने की तीव्र आशंका व्यक्त की गई है। मौसम विभाग ने इस दौरान लोगों को खुले में न जाने और बिजली के खंभों व पेड़ों से दूर रहने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त, उत्तर भारत के पर्वतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) होने के भी आसार जताए गए हैं।
यहाँ जारी रहेगा लू (Heatwave) का कहर, विदर्भ में रातें भी रहेंगी गर्म
मौसम का एक दूसरा और बेहद चिंताजनक पहलू देश के उत्तर-पश्चिम और मध्य भागों में देखने को मिल रहा है। जहां पूर्वोत्तर पानी-पानी है, वहीं विदर्भ (महाराष्ट्र), पूर्वी मध्य प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग अभी भी सूरज की तपिश और भीषण लू का सामना कर रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, इन क्षेत्रों में अगले चार से पांच दिनों तक हीटवेव की स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहेगी।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में अगले तीन दिनों तक, तेलंगाना में अगले दो दिनों तक और मध्य महाराष्ट्र व मराठवाड़ा के इलाकों में भी लू का असर देखा जाएगा। सबसे ज्यादा चिंता की बात विदर्भ को लेकर है, जहां मौसम विभाग ने ‘वार्म नाइट’ यानी रात के समय भी लू जैसी स्थिति बने रहने का अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि यहां के लोगों को रात में भी तपती गर्मी से निजात नहीं मिलने वाली है।
कैसा रहेगा तापमान का ग्राफ? जानिए अपने शहर का हाल
तापमान के उतार-चढ़ाव को लेकर मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि उत्तर-पश्चिम भारत (जिसमें दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी शामिल हैं) में 22 जून तक अधिकतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे फौरी राहत मिलेगी। हालांकि, इसके ठीक बाद यानी अगले तीन दिनों के दौरान तापमान में पुनः 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे गर्मी एक बार फिर तेवर दिखाएगी।
इसके विपरीत, महाराष्ट्र में 21 जून के बाद से अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट आने की उम्मीद है, क्योंकि वहां मानसून की दस्तक के साथ ही ठंडी हवाओं का दौर शुरू हो जाएगा। देश के बाकी हिस्सों (जैसे दक्षिण भारत और सुदूर पश्चिमी हिस्सों) में 27 जून तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े या महत्वपूर्ण बदलाव की गुंजाइश नहीं है।
धूल भरी आंधी और छिटपुट बारिश की संभावना
आगामी दो दिनों के दौरान रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में मौसम का एक अलग रूप देखने को मिलेगा, जहां तेज धूल भरी हवाएं और आंधी चलने की आशंका है। वहीं बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में जहां मानसून पूरी तरह नहीं पहुंचा है, वहां स्थानीय स्तर पर बनने वाले चक्रवाती तंत्र (Cyclonic Circulation) के कारण तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश और वज्रपात होने की संभावना जताई गई है।
कुल मिलाकर, भारतीय मौसम का यह हफ्ता बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। एक तरफ जहां मानसून की नई रफ्तार राहत लेकर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर और मध्य भारत को मानसूनी बादलों की फुहारों के लिए अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा।
