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उत्तराखंडफीचर्ड

Uttarakhand: रामनगर के जंगल में महाराष्ट्र के युवक का कंकाल मिला, डेढ़ साल से था लापता; इलाके में सनसनी

The Hill India News
Last updated: November 3, 2025 12:58 pm
The Hill India News
Published: November 3, 2025
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रामनगर (उत्तराखंड): नैनीताल जिले के शांत और घने जंगलों में उस वक्त सनसनी फैल गई जब वन विभाग की टीम को पेड़ों के बीच मानव कंकाल का ढांचा दिखाई दिया। शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ कि यह कंकाल महाराष्ट्र के रहने वाले एक युवक का है, जो करीब डेढ़ साल पहले रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया था।

Contents
घटना की शुरुआत: जंगल में मिली असामान्य सूचनापहचान हुई मोबाइल के ज़रिएपरिवार को दी गई सूचना, फॉरेंसिक जांच जारीइलाके में फैली सनसनी और भयसंभावनाओं पर पुलिस की नज़रराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा ‘लॉस्ट पर्सन’ अलर्ट का महत्वजंगल की रहस्यमयी खामोशी में कई सवाल बाकी

पुलिस ने मौके से एक टूटा हुआ लैपटॉप, मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड और एक मेमोरी कार्ड बरामद किया है, जिससे युवक की पहचान संभव हो सकी। मामला अब आत्महत्या या किसी साजिश के रूप में जांच के घेरे में है।


घटना की शुरुआत: जंगल में मिली असामान्य सूचना

रामनगर कोतवाली पुलिस को रविवार को वन विभाग की ओर से सूचना मिली कि ग्राम टेढ़ा के जंगल में साल के पेड़ के नीचे कुछ असामान्य हड्डियां पड़ी हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम और फॉरेंसिक यूनिट मौके पर पहुंची। जांच में पाया गया कि यह मानव कंकाल है और आसपास की झाड़ियों में एक जबड़ा, कुछ कपड़े के टुकड़े और एक बैग के अवशेष भी मिले हैं।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने अनुमान जताया कि मृतक की मौत को एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। हड्डियों के पास से मिले जूतों के फीते पेड़ की डाल पर लटके हुए थे, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया कि युवक ने संभवतः खुदकुशी की हो।


पहचान हुई मोबाइल के ज़रिए

पुलिस को मौके से बरामद मोबाइल फोन में दो सिम कार्ड और एक मेमोरी कार्ड मिला। तकनीकी जांच में यह पता चला कि सिम कार्ड महाराष्ट्र के अहिल्या नगर निवासी प्रशांत सिल्के के नाम पर जारी किया गया था, जिसकी उम्र लगभग 21 वर्ष थी। मोबाइल की गैलरी में प्रशांत की तस्वीरें मिलने से पुलिस ने उसके परिवार से संपर्क किया।

गुरुग्राम के उद्योग विहार थाना क्षेत्र से पुष्टि हुई कि प्रशांत सिल्के को पिछले साल अप्रैल 2024 से लापता बताया गया था। उसके पिता ने तब गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी और बताया था कि वह नौकरी की तलाश में महाराष्ट्र से दिल्ली गया था, लेकिन अचानक उसका संपर्क टूट गया।


परिवार को दी गई सूचना, फॉरेंसिक जांच जारी

रामनगर कोतवाल सुशील कुमार ने बताया कि मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है और वे सोमवार शाम तक रामनगर पहुंचेंगे।
उन्होंने कहा,

“मौके से कई अहम सुराग मिले हैं। फॉरेंसिक टीम ने हड्डियों और बरामद वस्तुओं को जांच के लिए भेज दिया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।”

पुलिस ने फिलहाल अस्पष्ट मृत्यु (UD case) दर्ज किया है और आगे की जांच शुरू कर दी है।


इलाके में फैली सनसनी और भय

टेढ़ा गांव और आसपास के इलाकों में इस घटना के बाद से डर और अचरज का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जंगल का वह हिस्सा बहुत कम आबादी वाला और सुनसान है। कुछ लोगों का मानना है कि कोई बाहरी व्यक्ति उस इलाके तक तभी पहुंच सकता है जब वह रास्ता भटक जाए या जानबूझकर वहां जाए।

स्थानीय निवासी राकेश आर्या ने बताया,

“यह इलाका रात के समय बेहद सुनसान रहता है। यहां न तो मोबाइल नेटवर्क आता है और न ही लोग बेवजह घूमते हैं। किसी बाहरी व्यक्ति का वहां तक जाना अपने आप में सवाल खड़े करता है।”


संभावनाओं पर पुलिस की नज़र

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या प्रशांत की मौत आत्महत्या थी या किसी साजिश का नतीजा।
लैपटॉप और फोन की तकनीकी जांच से यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि लापता होने से पहले वह किससे संपर्क में था और आखिरी बार उसकी लोकेशन कहाँ थी।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, हड्डियों की स्थिति और आस-पास मिले पदार्थों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत काफी समय पहले हुई थी। मौके से बरामद वस्तुओं पर भी मिट्टी और नमी के गहरे निशान हैं, जिससे संकेत मिलता है कि शव लंबे समय तक खुले वातावरण में पड़ा रहा।


राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा ‘लॉस्ट पर्सन’ अलर्ट का महत्व

इस घटना ने एक बार फिर गुमशुदा व्यक्तियों की खोज प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। देशभर में हर साल करीब तीन लाख लोग लापता होते हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या युवा वर्ग की होती है।
कई बार ये लोग नौकरी, रिश्ते या मानसिक तनाव के कारण घर छोड़ देते हैं, लेकिन तकनीकी ट्रैकिंग या राज्यों के बीच समन्वय की कमी के कारण अधिकांश मामलों में परिवारों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार,

“लापता व्यक्तियों में से केवल 65 प्रतिशत को ही ढूंढा जा पाता है, जबकि बाकी मामलों की फाइलें अक्सर वर्षों तक अधूरी रह जाती हैं।”

प्रशांत सिल्के का मामला भी इसी दर्दनाक श्रेणी में आता है, जहाँ एक परिवार को अपने बेटे का पता डेढ़ साल बाद सिर्फ कंकाल के रूप में मिला।


जंगल की रहस्यमयी खामोशी में कई सवाल बाकी

रामनगर पुलिस अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और कॉल रिकॉर्ड डिटेल्स के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
लोगों के बीच अब भी यह सवाल गूंज रहा है कि एक युवा, जो बेहतर भविष्य की तलाश में दिल्ली गया था, वह सैकड़ों किलोमीटर दूर उत्तराखंड के जंगलों तक कैसे पहुंच गया? क्या यह किसी मानसिक तनाव की वजह से उठाया गया कदम था, या उसके साथ कोई अनहोनी हुई?जवाब फिलहाल जांच के दायरे में हैं।

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