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उत्तराखंड मदरसा अपडेट: धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला, 400 मदरसों को मिली जिला स्तरीय मान्यता की राहत

The Hill India News
Last updated: April 30, 2026 2:07 pm
The Hill India News
Published: April 30, 2026
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देहरादून, उत्तराखंड: उत्तराखंड की धामी सरकार ने राज्य में संचालित मदरसों के लिए एक बड़ा और राहत भरा निर्णय लिया है। प्रदेश के 452 पंजीकृत मदरसों में से 400 मदरसों को राज्य सरकार ने मान्यता से संबंधित नियमों में बड़ी राहत दी है। कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद, अब कक्षा एक से कक्षा 8 तक का संचालन करने वाले मदरसों को राज्य के अन्य सामान्य स्कूलों की तरह जिला स्तरीय शिक्षा समिति या शासन द्वारा तय सक्षम अधिकारी से ही मान्यता प्राप्त हो जाएगी।

Contents
कैबिनेट ने दी अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में संशोधन को मंजूरीकिन मदरसों को मिलेगी छूट और किसे करना होगा रामनगर बोर्ड से संपर्क?अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की भूमिका और सुगम प्रक्रियासकारात्मक बदलाव और शिक्षा की मुख्यधारा

सरकार के इस कदम से सैकड़ों मदरसों के प्रबंधन को बड़ी प्रशासनिक सहूलियत मिलेगी, जिससे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े इन संस्थानों के संचालन में आने वाली तकनीकी अड़चनें दूर होंगी।


कैबिनेट ने दी अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में संशोधन को मंजूरी

उत्तराखंड के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अक्टूबर 2025 में ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम-2025‘ को अधिसूचित किया था। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाना और उनकी मान्यता से जुड़ी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सुगम बनाना था।

मूल अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, सभी अल्पसंख्यक संस्थाओं को विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर (उत्तराखंड बोर्ड) से संबद्धता लेना अनिवार्य किया गया था। लेकिन, राज्य के 400 से अधिक मदरसों ने सरकार से अनुरोध किया था कि कक्षा एक से आठ तक के संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर ही मान्यता की प्रक्रिया को रखा जाए। इन सभी पहलुओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे अब धामी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।


किन मदरसों को मिलेगी छूट और किसे करना होगा रामनगर बोर्ड से संपर्क?

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव, डॉ. पराग मधुकर धकाते ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि नए अध्यादेश और संशोधन के तहत स्पष्ट रूप से दो श्रेणियां तय की गई हैं:

  • कक्षा 1 से 8 तक के मदरसे: राज्य में रजिस्टर्ड कुल 452 मदरसों में से करीब 400 मदरसे ऐसे हैं, जहाँ केवल कक्षा एक से कक्षा आठ तक की पढ़ाई होती है। इन सभी मदरसों को अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति के माध्यम से ही मान्यता दे दी जाएगी। इससे समय की बचत होगी और दस्तावेजों का त्वरित निस्तारण संभव हो सकेगा।

  • कक्षा 9 से 12 तक के मदरसे: वहीं, प्रदेश में 52 मदरसे ऐसे हैं, जहाँ कक्षा 9 से लेकर 12 तक की उच्च माध्यमिक कक्षाएं संचालित होती हैं। इन संस्थानों को पहले की तरह ही विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से संबद्धता प्राप्त करना अनिवार्य होगा।


अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की भूमिका और सुगम प्रक्रिया

यह पूरा बदलाव एक अंब्रेला अथॉरिटी (अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण) के तहत किया जा रहा है। इस प्राधिकरण के माध्यम से सभी छह अल्पसंख्यक श्रेणियों के शैक्षणिक संस्थानों को एक ही छत के नीचे मान्यता देने की व्यवस्था की गई है।

अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही कक्षा 1 से 8 तक संचालित होने वाले मदरसों से मान्यता के आवेदन प्राप्त होंगे, उनका निस्तारण बिना किसी अनावश्यक विलंब के तत्काल प्रभाव से कर दिया जाएगा। सरकार का यह कदम शिक्षा के अधिकार और बुनियादी स्तर की स्कूली शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।


सकारात्मक बदलाव और शिक्षा की मुख्यधारा

उत्तराखंड में मदरसों के आधुनिकीकरण और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए यह बड़ा कदम है। जहां एक ओर उच्च कक्षाओं वाले मदरसों के लिए सख्त और उच्च स्तरीय बोर्ड से जुड़ना आवश्यक है, वहीं प्राथमिक और मिडिल स्तर के मदरसों के लिए जिला स्तर पर मान्यता की प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण (Decentralization) प्रबंधन को काफी आसान बनाएगा।

स्थानीय जानकारों और शिक्षाविदों का मानना है कि इस निर्णय से मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षिक माहौल और प्रमाणन प्राप्त होगा।

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