भारत और जापान के बीच 22 सितंबर को होने वाला ऐतिहासिक टी-20 मुकाबला इन दिनों क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। पहली बार दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें किसी अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में आमने-सामने होंगी। इस ऐतिहासिक मुकाबले के बीच बिहार के रोहतास से ताल्लुक रखने वाले अभिषेक आनंद का नाम भी तेजी से सुर्खियों में है। खास बात यह है कि अभिषेक भारत में जन्मे हैं, IIT कानपुर से पढ़ाई कर चुके हैं और अब जापान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि, 22 सितंबर को भारत के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए जापान की घोषित 15 सदस्यीय टीम में उनका नाम शामिल नहीं है।
अभिषेक आनंद की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि यह सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं है। यह पढ़ाई, नौकरी, विदेश में नए माहौल के बीच अपने पसंदीदा खेल को जारी रखने और धीरे-धीरे उसी जुनून को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की कहानी है। जापान क्रिकेट एसोसिएशन की 2026 की राष्ट्रीय टीम सूची में अभिषेक का नाम शामिल है और एसोसिएशन के रिकॉर्ड के मुताबिक वह भारत में जन्मे 28 वर्षीय खिलाड़ी हैं।
22 सितंबर को भारत-जापान का ऐतिहासिक मुकाबला
भारत और जापान की टीमें 22 सितंबर 2026 को जापान के सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड, तोचिगी में टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में आमने-सामने होंगी। ICC के अनुसार दोनों टीमों के बीच यह पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबला होगा। भारत इस मुकाबले में 2026 टी-20 विश्व कप का चैंपियन होने के बाद उतर रहा है, जबकि जापान के लिए यह दुनिया की शीर्ष क्रिकेट टीमों में से एक के खिलाफ महत्वपूर्ण अनुभव हासिल करने का मौका है।
जापान में क्रिकेट अभी बेसबॉल और फुटबॉल जितना लोकप्रिय नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस खेल को लेकर गतिविधियां बढ़ी हैं। भारत के खिलाफ मुकाबले को जापानी क्रिकेट के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक जापान क्रिकेट एसोसिएशन लंबे समय से देश में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है और भारत के खिलाफ मुकाबला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण आयोजन है।
इसी ऐतिहासिक मुकाबले की वजह से जापान की राष्ट्रीय टीम से जुड़े भारतीय मूल के खिलाड़ी अभिषेक आनंद भी अचानक क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा में आ गए हैं।
कौन हैं अभिषेक आनंद?
अभिषेक आनंद बिहार के रोहतास जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने IIT कानपुर से केमिस्ट्री में पढ़ाई की। IIT कानपुर के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी अभिषेक आनंद का नाम जापान की पुरुष राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए चयनित पूर्व छात्र के तौर पर दर्ज है।
कॉलेज के दिनों में भी उनका क्रिकेट से गहरा जुड़ाव था। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने क्रिकेट खेलना जारी रखा और IIT कानपुर की क्रिकेट टीम की कप्तानी भी की। यानी क्रिकेट उनके लिए कोई अचानक शुरू हुआ शौक नहीं था, बल्कि कॉलेज के समय से ही यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उनके सामने करियर का अगला पड़ाव आया तो उन्होंने जापान जाने का फैसला किया। नौकरी के सिलसिले में टोक्यो पहुंचने के बाद भी उन्होंने क्रिकेट को अपने जीवन से दूर नहीं होने दिया। उन्होंने जापान में क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया और धीरे-धीरे स्थानीय क्रिकेट सर्किट में अपनी पहचान बनानी शुरू की।
नौकरी के लिए जापान पहुंचे, लेकिन क्रिकेट नहीं छोड़ा
अभिषेक की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि जापान जाना उनके क्रिकेट करियर की योजना का हिस्सा नहीं था। उन्हें नौकरी का अवसर मिला और वे जापान चले गए। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्होंने यह तय किया कि अपने पेशेवर करियर के साथ क्रिकेट को भी जारी रखा जाएगा।
जापान में क्लब क्रिकेट खेलने के दौरान उनके प्रदर्शन ने धीरे-धीरे चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों से प्रभाव छोड़ा। इसके बाद उनका सफर क्लब क्रिकेट से जापान के राष्ट्रीय क्रिकेट सेटअप तक पहुंचा।
IIT कानपुर की ओर से प्रकाशित उनके प्रोफाइल में भी उनके सफर को पढ़ाई से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने वाली असामान्य यात्रा के रूप में रेखांकित किया गया है।
2025 में किया T20I डेब्यू
अभिषेक आनंद ने 9 मई 2025 को कुक आइलैंड्स के खिलाफ जापान के लिए अपना T20I डेब्यू किया। जापान क्रिकेट एसोसिएशन के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनका डेब्यू इसी मुकाबले से दर्ज है। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर अब जापान की टीम के साथ आगे बढ़ चुका है।
हालिया उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अभिषेक जापान के लिए 18 T20I मैच खेल चुके हैं। इन मुकाबलों में उन्होंने 275 रन बनाए हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 55 रन है। गेंदबाजी में भी उनके नाम एक विकेट दर्ज है।
2026 में भी वह जापान की टीम के लिए खेल चुके हैं। जापान क्रिकेट एसोसिएशन के टूर्नामेंट रिकॉर्ड में थाईलैंड के खिलाफ एक मुकाबले में अभिषेक ने 28 गेंदों पर 43 रन की पारी खेली थी। यह बताता है कि राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के बाद भी वह लगातार जापानी क्रिकेट सेटअप का हिस्सा बने हुए हैं।
तीन साल जापान में रहने की योग्यता भी बनी आधार
अभिषेक ने जापान की राष्ट्रीय टीम में चयन की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा है कि टीम के लिए पात्रता हासिल करने के अलग-अलग रास्ते हैं। इनमें जापान में जन्म लेना, जापानी पासपोर्ट होना या लगातार तीन साल जापान में रहना शामिल है।
उनके मामले में जापान में लगातार तीन साल रहने की पात्रता पूरी हुई। लेकिन केवल पात्रता पूरी कर लेना ही राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसके बाद क्लब और स्थानीय क्रिकेट में प्रदर्शन तथा अनुशासन भी महत्वपूर्ण रहे।
यही वजह है कि नौकरी के साथ क्रिकेट जारी रखना उनके लिए निर्णायक साबित हुआ। उन्होंने स्थानीय क्रिकेट में प्रदर्शन किया और धीरे-धीरे राष्ट्रीय टीम के दरवाजे तक पहुंचे।
सिर्फ तीन साल में राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने पर खुद भी थे हैरान
अभिषेक के मुताबिक जब वह जापान पहुंचे थे तो उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी राष्ट्रीय टीम में जगह मिल जाएगी। उन्हें लगता था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में चार-पांच साल या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है।
लेकिन लगातार क्रिकेट खेलने और प्रदर्शन करने का फायदा उन्हें मिला और लगभग तीन साल में वह जापान की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन गए।
यह सफर इसलिए भी अलग है क्योंकि एक तरफ उनके पास IIT कानपुर की मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि थी, वहीं दूसरी तरफ क्रिकेट का जुनून भी लगातार बना रहा। उन्होंने इनमें से किसी एक को छोड़ने के बजाय दोनों को साथ लेकर चलने का रास्ता चुना।
जापान में क्रिकेट को बढ़ते हुए देखा
अभिषेक का कहना है कि जब से वह जापान पहुंचे हैं, तब से वहां क्रिकेट में बदलाव देखने को मिला है। पुरुष क्रिकेट के साथ-साथ महिला क्रिकेट में भी गतिविधियां बढ़ी हैं और खिलाड़ियों के लिए अवसर तैयार हो रहे हैं।
जापान क्रिकेट को लेकर उनकी उम्मीदें भी बड़ी हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में जापान क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
यह बदलाव सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। जापान क्रिकेट एसोसिएशन भी देश में खेल के विस्तार की दिशा में काम कर रहा है। भारत के खिलाफ 22 सितंबर का मुकाबला इसी प्रयास का एक बड़ा उदाहरण है। ICC ने भी इसे दोनों देशों के बीच पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबला बताते हुए जापानी क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में पेश किया है।
वैभव सूर्यवंशी और ईशान किशन से मिलने की इच्छा
भारत-जापान मुकाबले से पहले अभिषेक आनंद ने भारतीय खिलाड़ियों से मिलने की अपनी उत्सुकता भी जाहिर की है। खास तौर पर बिहार के युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को लेकर उनकी दिलचस्पी सामने आई है।
वैभव सूर्यवंशी कम उम्र में ही भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके हैं और आगामी भारतीय टीम के कार्यक्रमों में भी उनका नाम शामिल है। Reuters की 16 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 15 वर्षीय वैभव को भारत के आगामी टी-20 मुकाबलों के लिए टीम में शामिल किया गया है।
अभिषेक के लिए यह मुलाकात इसलिए भी खास हो सकती है क्योंकि दोनों का संबंध बिहार से है और दोनों ने क्रिकेट के जरिए अलग-अलग स्तर पर पहचान बनाई है।
वहीं, वह भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन से भी मिलने को लेकर उत्साहित हैं। भारत और जापान के मुकाबले से पहले इन खिलाड़ियों का जिक्र क्रिकेट प्रशंसकों के बीच खास चर्चा का विषय बना हुआ है।
भारत के खिलाफ मैच में नहीं खेलेंगे अभिषेक
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। अभिषेक आनंद जापान की राष्ट्रीय टीम के सदस्य जरूर हैं, लेकिन 22 सितंबर 2026 को भारत के खिलाफ होने वाले मुकाबले की घोषित 15 सदस्यीय टीम में उनका नाम नहीं है।
जापान क्रिकेट एसोसिएशन ने 2026 के लिए पुरुष राष्ट्रीय टीम की सूची में अभिषेक को शामिल किया है, लेकिन भारत के खिलाफ इस विशेष मुकाबले के लिए घोषित टीम अलग है। इसलिए भारत के खिलाफ मैदान पर अभिषेक को खेलते हुए देखने की संभावना इस मुकाबले की घोषित टीम के आधार पर नहीं है।
हालांकि, वह टीम के साथ रहकर इस ऐतिहासिक मुकाबले का हिस्सा बनना चाहते हैं और जापान को सपोर्ट करने की इच्छा जता चुके हैं।
दिलचस्प स्थिति—दिल भारत और क्रिकेट जापान के साथ
अभिषेक के लिए भारत-जापान मुकाबला एक अलग तरह का अनुभव होगा। उनका जन्म भारत में हुआ, उनका बचपन और शिक्षा भारत में हुई और IIT कानपुर से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। दूसरी ओर, उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर की पहचान अब जापान के साथ जुड़ी हुई है।
यही वजह है कि भारत और जापान के मुकाबले को लेकर उनकी स्थिति भी दिलचस्प है। वह खुद भारत से हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जापान का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने इस मुकाबले को लेकर कहा है कि वह टीम में शामिल नहीं होने के बावजूद जापान के साथ रहकर समर्थन करेंगे और भारत तथा जापान दोनों के लिए अपना जुड़ाव महसूस करते हैं।
एक बिहारी युवक की अलग पहचान
अभिषेक आनंद की कहानी इस मायने में भी खास है कि यह बताती है कि क्रिकेट का दायरा अब केवल भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या अन्य पारंपरिक क्रिकेट देशों तक सीमित नहीं है। दुनिया के ऐसे देशों में भी क्रिकेटर सामने आ रहे हैं जहां यह खेल अभी विकास के दौर में है।
बिहार के रोहतास से निकलकर IIT कानपुर तक पढ़ाई करना, फिर नौकरी के लिए जापान जाना और वहां क्लब क्रिकेट से शुरुआत करके राष्ट्रीय टीम तक पहुंचना—अभिषेक का सफर कई अलग-अलग पड़ावों से होकर गुजरा है।
उनकी कहानी में सबसे अहम बात यह है कि उन्होंने अपने करियर और क्रिकेट के बीच किसी एक को चुनने के बजाय दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की। नौकरी के साथ अभ्यास, क्लब क्रिकेट, स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन और फिर राष्ट्रीय टीम में जगह—यह पूरा सफर धीरे-धीरे तैयार हुआ।
भारत-जापान मुकाबले से बढ़ेगी जापानी क्रिकेट की चर्चा
22 सितंबर का भारत-जापान टी-20 मुकाबला केवल दो टीमों के बीच एक क्रिकेट मैच नहीं होगा। यह जापान में क्रिकेट को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर भी है। ICC के मुताबिक यह दोनों देशों की पुरुष टीमों के बीच पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला है और जापान के लिए भारत जैसी शीर्ष टीम के खिलाफ खेलने का अनुभव महत्वपूर्ण होगा।
इस मुकाबले की चर्चा के बीच अभिषेक आनंद का नाम सामने आना भी जापानी क्रिकेट की बदलती तस्वीर को दिखाता है। एक भारतीय मूल का खिलाड़ी जापान की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा है और उसी देश में क्रिकेट को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा बना हुआ है।
अभिषेक फिलहाल भारत के खिलाफ मुकाबले की टीम में शामिल नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी ने इस ऐतिहासिक मैच की चर्चा को एक अलग रंग जरूर दे दिया है। रोहतास से शुरू हुआ उनका सफर अब जापान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम तक पहुंच चुका है और भारत-जापान मुकाबले के बहाने एक बार फिर देश-दुनिया के क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें इस ‘बिहारी बाबू’ पर टिक गई हैं।
बिहार के रोहतास से जापान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम तक पहुंचने वाले अभिषेक आनंद की कहानी इस बात का उदाहरण है कि क्रिकेट का जुनून सीमाओं से आगे निकल सकता है। अब नजरें इस बात पर हैं कि जापानी क्रिकेट आने वाले वर्षों में किस तरह आगे बढ़ता है और अभिषेक आनंद उस सफर में आगे क्या भूमिका निभाते हैं।
