By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तराखंड सूचना आयोग का ऐतिहासिक फैसला, अब सार्वजनिक होगी जजों के खिलाफ शिकायतों की स्थिति
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड सूचना आयोग का ऐतिहासिक फैसला, अब सार्वजनिक होगी जजों के खिलाफ शिकायतों की स्थिति
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड सूचना आयोग का ऐतिहासिक फैसला, अब सार्वजनिक होगी जजों के खिलाफ शिकायतों की स्थिति

The Hill India News
Last updated: January 12, 2026 12:40 pm
The Hill India News
Published: January 12, 2026
Share
SHARE

देहरादून: भारत के न्यायिक इतिहास में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक ऐसी नजीर पेश की गई है, जिसकी गूंज आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों में भी सुनाई देगी। उत्तराखंड सूचना आयोग ने एक युगांतरकारी निर्णय लेते हुए अधीनस्थ न्यायपालिका के अधिकारियों और न्यायाधीशों के विरुद्ध दर्ज शिकायतों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में पारित यह आदेश न केवल न्यायिक व्यवस्था की गोपनीयता के पारंपरिक पर्दें को हटाता है, बल्कि जनता के ‘जानने के अधिकार’ को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

Contents
क्या है पूरा मामला?गोपनीयता बनाम पारदर्शिता: आयोग में तीखी बहसफैसले की मुख्य बातें: नाम नहीं, पर आंकड़े होंगे सार्वजनिकन्यायिक सुधारों की दिशा में एक ‘नजीर’भविष्य का रोडमैप

क्या है पूरा मामला?

यह ऐतिहासिक घटनाक्रम भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी और प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता संजीव चतुर्वेदी द्वारा दायर एक अपील (संख्या 43293/2025-26) से उपजा है। संजीव चतुर्वेदी ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19(3) के तहत राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया था।

मई 2025 में दायर अपनी मूल आरटीआई में चतुर्वेदी ने अधीनस्थ न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और उनके विरुद्ध होने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को लेकर चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टता मांगी थी। उन्होंने जानना चाहा था कि उत्तराखंड में न्यायाधीशों पर कौन से सेवा और आचरण नियम लागू होते हैं और उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच का तंत्र क्या है।

गोपनीयता बनाम पारदर्शिता: आयोग में तीखी बहस

सुनवाई के दौरान नैनीताल हाईकोर्ट के लोक सूचना अधिकारी (PIO) ने कड़ा रुख अपनाते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया था। विभाग का तर्क था कि जजों के खिलाफ शिकायतें ‘गोपनीय प्रकृति’ की होती हैं और यह ‘तीसरे पक्ष’ (Third Party) की व्यक्तिगत जानकारी के दायरे में आती हैं। विभागीय अधिकारियों का यह भी कहना था कि ऐसी संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।

हालांकि, उत्तराखंड सूचना आयोग ने इन तर्कों को अपर्याप्त माना। आयोग ने स्पष्ट किया कि “गोपनीयता” का लेबल लगाकर जनहित से जुड़ी सूचनाओं को अनंत काल तक दबाया नहीं जा सकता। आयोग के अनुसार, न्यायपालिका में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह जानना आवश्यक है कि शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, ताकि संस्था की साख बनी रहे।

फैसले की मुख्य बातें: नाम नहीं, पर आंकड़े होंगे सार्वजनिक

मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने संतुलन साधते हुए एक व्यावहारिक आदेश पारित किया है। आयोग के निर्देशानुसार:

  1. सांख्यिकीय विवरण: 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच जजों के खिलाफ प्राप्त कुल शिकायतों की संख्या बतानी होगी।

  2. कार्रवाई का विवरण: कितनी शिकायतों पर अनुशासनात्मक या आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई, इसका स्पष्ट डेटा देना होगा।

  3. पहचान की सुरक्षा: किसी भी न्यायाधीश या अधिकारी की व्यक्तिगत पहचान, नाम या विशिष्ट विवरण को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, ताकि उनकी सुरक्षा और प्रतिष्ठा को आंच न आए।

  4. अनुमति की प्रक्रिया: लोक सूचना अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे एक माह के भीतर सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर अपीलकर्ता को प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराएं।

न्यायिक सुधारों की दिशा में एक ‘नजीर’

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक पारदर्शिता के लिहाज से यह फैसला देश में पहली बार किसी राज्य सूचना आयोग द्वारा लिया गया इतना बड़ा कदम है। अक्सर उच्च न्यायपालिका और अधीनस्थ न्यायपालिका की प्रशासनिक प्रक्रियाएं आरटीआई के दायरे से बाहर रखने की कोशिश की जाती रही हैं। लेकिन संजीव चतुर्वेदी की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में कोई भी संस्थान जांच और संतुलन (Checks and Balances) से ऊपर नहीं है।

इस आदेश से यह स्पष्ट होगा कि उत्तराखंड की निचली अदालतों में भ्रष्टाचार या कदाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का कितना पालन हो रहा है। यह निर्णय उन हजारों वादियों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो न्यायिक तंत्र में सुधार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

भविष्य का रोडमैप

सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को एक महीने की समय-सीमा दी है। यदि इस अवधि में जानकारी साझा की जाती है, तो यह आरटीआई के इतिहास में एक नया अध्याय होगा। यह आदेश न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे भारत की न्यायपालिका के लिए एक संदेश है कि पारदर्शिता से संस्था की गरिमा घटती नहीं, बल्कि और अधिक मजबूत होती है।

उत्तराखंड सूचना आयोग का यह फैसला राज्य में सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक साहसिक मील का पत्थर है। राधा रतूड़ी के नेतृत्व में आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य केवल कागजी जानकारी देना नहीं, बल्कि सत्ता और संस्थाओं को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है।

You Might Also Like

बिहार को रेलवे की बड़ी सौगात, पांच नई ट्रेनों की घोषणा; पटना से दिल्ली तक अमृत भारत एक्सप्रेस सेवा शुरू होगी
Uttrakhand : सतपुली-दुधारखाल रोड पर पिकअप दुर्घटनाग्रस्त, स्थानीय ग्रामीणों ने बचायी तीन लोगों की जान
नई दिल्ली : पांच विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनाव का कार्यक्रम
Uttarakhand: हरिद्वार में मासूम के ‘सौदागरों’ को सबक: अपहरण और मानव तस्करी के मामले में दो महिलाओं को 10-10 साल की कठोर कैद
उत्तराखंड में शिक्षा का डिजिटल युग: मुख्यमंत्री धामी ने किया वर्चुअल एवं स्मार्ट कक्षाओं के केन्द्रीयकृत स्टूडियो का शुभारंभ
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

मुख्यमंत्री आवास घेराव के बाद कांग्रेस पर कार्रवाई से सियासत गरमाई, मुकदमों और वाहन जब्ती के आरोप पर कांग्रेस का बड़ा ऐलान—“अन्याय के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे”

The Hill India News
The Hill India News
September 5, 2026
450 साल पुराने वर्ल्ड मैप को बदलने की तैयारी, UN में ‘Correct the Map’ प्रस्ताव पास; अब नक्शे पर असली आकार में दिखेगा अफ्रीका
हल्द्वानी के कथित ‘शुद्धिकरण’ पर बेंगलुरु में जीरो एफआईआर, खड़गे के आरोपों से गरमाई सियासत; राहुल गांधी पर भी दर्ज है मामला
श्रीकृष्ण के रंग में रंगा उत्तराखंड, मंदिरों में गूंजे जयकारे और शंखनाद; लक्सर से नैनीताल और टिहरी तक दिखी आस्था की अद्भुत छटा
नौ साल से खाली लोकायुक्त का पद, कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा; बीजेपी बोली- भ्रष्टाचार के खिलाफ धामी सरकार की कार्रवाई जारी
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर कार्रवाई से मचा सियासी घमासान, इकरा हसन को रोका गया; भारी पुलिस फोर्स तैनात
पेंशन लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत! CM धामी ने एक क्लिक में जारी किए ₹147 करोड़, करीब 10 लाख लोगों के खातों में पहुंची अगस्त की पेंशन
देश की पहली ऑल-इन-वन किसान एप ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया शुभारंभ
क्या बदल जाएगा दुनिया का नक्शा? संयुक्त राष्ट्र में आज ऐतिहासिक वोटिंग, अफ्रीका के असली आकार को लेकर उठी बड़ी बहस
रानीपोखरी में गूंजी मातृशक्ति की आवाज, कांग्रेस के संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने खुलकर उठाए सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा के मुद्दे
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?