By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तराखंड हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: परिवहन निगम एमडी को अवमानना नोटिस, एचएमटी रानीबाग मामले में भी बढ़ी हलचल
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: परिवहन निगम एमडी को अवमानना नोटिस, एचएमटी रानीबाग मामले में भी बढ़ी हलचल
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: परिवहन निगम एमडी को अवमानना नोटिस, एचएमटी रानीबाग मामले में भी बढ़ी हलचल

The Hill India News
Last updated: March 10, 2026 1:34 pm
The Hill India News
Published: March 10, 2026
Share
SHARE

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के सरकारी विभागों और निगमों में अदालती आदेशों की अनदेखी पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। मंगलवार को न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) के प्रबंध निदेशक (MD) के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हक में दिए गए आदेश का अनुपालन न करना गंभीर विषय है।

Contents
मामला 1: परिवहन निगम के रिटायर्ड कर्मियों के हक पर डाका, एमडी से जवाब तलबक्या है पूरा विवाद?कोर्ट का पिछला आदेश और निगम की हठधर्मितामामला 2: एचएमटी रानीबाग फैक्ट्री बंदी और श्रमिकों का संघर्ष2007 के वेतनमान और VRS का पेंचअब 25 मार्च पर टिकी निगाहेंन्यायिक सक्रियता और कर्मचारियों की उम्मीदें

मामला 1: परिवहन निगम के रिटायर्ड कर्मियों के हक पर डाका, एमडी से जवाब तलब

उत्तराखंड परिवहन निगम के दर्जनों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए न्याय की लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। लंबे समय से अपने ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों (Retiral Benefits) के लिए भटक रहे पूर्व कर्मचारियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने निगम प्रबंधन को आड़े हाथों लिया है।

क्या है पूरा विवाद?

मामले के अनुसार, हीरा लाल एवं अन्य कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि वे निगम के विभिन्न पदों से सेवानिवृत्त हुए हैं। नियमानुसार, सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद उनके समस्त देयकों का भुगतान होना चाहिए था। लेकिन, निगम ने न केवल उनके भुगतान रोके, बल्कि उनके बकाया देयकों से ‘रिकवरी’ (वसूली) के आदेश भी जारी कर दिए।

कर्मचारियों का तर्क है कि उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है और बुढ़ापे में जीवन यापन के लिए जमापूंजी का न मिलना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

कोर्ट का पिछला आदेश और निगम की हठधर्मिता

इससे पूर्व, हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए निगम के रिकवरी आदेश पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने निगम को सख्त निर्देश दिए थे कि:

  1. सभी रिटायर्ड कर्मचारियों के समस्त देयकों का तीन माह के भीतर भुगतान किया जाए।

  2. जो अवैध कटौतियां की गई हैं, उन्हें ब्याज सहित वापस किया जाए।

इस आदेश को चुनौती देने के लिए परिवहन निगम ने खण्डपीठ में विशेष अपील (Special Appeal) दायर की थी, जिसे खण्डपीठ ने खारिज करते हुए एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा। बावजूद इसके, एमडी परिवहन निगम ने आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिसके बाद अब कोर्ट ने 4 मई 2026 की तिथि नियत करते हुए एमडी को व्यक्तिगत रूप से जवाब देने को कहा है।


मामला 2: एचएमटी रानीबाग फैक्ट्री बंदी और श्रमिकों का संघर्ष

हाईकोर्ट में आज एक और महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हुई, जो कुमाऊं की पहचान रही ‘एचएमटी रानीबाग’ फैक्ट्री से जुड़ा है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने एचएमटी कामगार संघ द्वारा दायर 37 अपीलों पर सुनवाई की।

2007 के वेतनमान और VRS का पेंच

17 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने एचएमटी रानीबाग को बंद करने की अनुमति दी थी। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने नीतिगत निर्णय लिया था कि फैक्ट्री बंद करने से पहले कर्मचारियों को वर्ष 2007 में निर्धारित वेतनमान के आधार पर VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) पैकेज दिया जाएगा।

कामगार संघ का आरोप है कि एचएमटी प्रबंधन ने इस महत्वपूर्ण शर्त का उल्लंघन किया और कर्मचारियों को उचित लाभ दिए बिना ही फैक्ट्री के गेट पर ताला जड़ दिया।

अब 25 मार्च पर टिकी निगाहें

पूर्व में एकलपीठ ने श्रमिकों की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसे अब खण्डपीठ में चुनौती दी गई है। आज की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से समय मांगे जाने पर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 25 मार्च 2026 की तारीख तय की है। श्रमिक संघ ने कोर्ट से मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीघ्र निस्तारण की अपील की है।


न्यायिक सक्रियता और कर्मचारियों की उम्मीदें

उत्तराखंड हाईकोर्ट के ये दोनों फैसले राज्य के हजारों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़े हैं। परिवहन निगम के मामले में अवमानना नोटिस (Contempt Notice) जारी होना यह दर्शाता है कि न्यायालय अब प्रशासनिक सुस्ती को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

विशेषज्ञों का मत:

“जब उच्च न्यायालय की खण्डपीठ किसी आदेश की पुष्टि कर देती है, तो विभाग के पास उसे लागू न करने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता। परिवहन निगम द्वारा की जा रही देरी न केवल कानूनी प्रक्रिया का अपमान है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के भी खिलाफ है।”

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि चाहे वह परिवहन निगम हो या एचएमटी प्रबंधन, नीतिगत निर्णयों और न्यायिक आदेशों का पालन अनिवार्य है। जहाँ एक ओर परिवहन निगम के एमडी को मई में जवाब देना है, वहीं दूसरी ओर एचएमटी के हजारों श्रमिक मार्च के अंत में आने वाले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

राज्य के इन प्रमुख संस्थानों के विवादों का समाधान न केवल कानूनी जीत होगी, बल्कि यह उन बुजुर्ग कर्मचारियों के लिए भी एक बड़ी राहत होगी जो अपने जीवन भर की कमाई के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।

You Might Also Like

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य प्रदेश के बैतूल में हुई दुर्घटना में लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया
सपा के स्टार प्रचारक की पीट-पीटकर हत्या, अखिलेश यादव ने ट्वीट कर किया ये दावा
उत्तराखंड में अगले 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम, मौसम विभाग ने येलो अलर्ट किया जारी
उत्तराखण्ड के लिए ऐतिहासिक दिन: धामी-गडकरी बैठक में ₹7,000 करोड़ की सड़क परियोजनाओं को मिली महा-स्वीकृति, सीमांत क्षेत्रों और पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
बिहार में सत्ता परिवर्तन से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, नीतीश कुमार के करीबी अफसरों को केंद्र में प्रतिनियुक्ति
TAGGED:contempt noticeHMT RanibaghNainital Newsretired employee billTransport Corporation MDUttarakhand High Court
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्डराजनीति

मांजलपुर उपचुनाव में BJP की शानदार जीत: सतीश पटेल ने 30 हजार से अधिक वोटों से कांग्रेस को हराया, गुजरात में कमल फिर खिला

The Hill India News
The Hill India News
August 3, 2026
ITR Refund का इंतजार खत्म कब होगा? जानिए इनकम टैक्स रिफंड की पूरी प्रक्रिया, कितने दिनों में मिलेगा पैसा और किन वजहों से हो सकती है देरी
पप्पू यादव के भगवा प्रदर्शन पर INDIA गठबंधन में दरार! सपा ने किया किनारा, राम मंदिर मुद्दे पर विपक्ष के अलग-अलग सुर आए सामने
NEET पेपर लीक आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ‘छात्रों को मिलेगा न्याय, लेकिन अपराधियों को नहीं मिलेगी कोई राहत’; FIR, पुलिस कार्रवाई और जांच पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
JPSC परीक्षा विवाद ने पकड़ा तूल: हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर, परीक्षा रद्द करने से लेकर CBI जांच तक उठीं बड़ी मांगें
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: क्या बदलेगा विरोध प्रदर्शन का केंद्र? केंद्र सरकार से मांगा जवाब
बृज भूषण शरण सिंह को बड़ी राहत: कोर्ट से बरी होने के बाद बोले— “अगर एक भी आरोप साबित होता तो खुद फांसी पर लटक जाता”
ऐतिहासिक फैसला! राष्ट्रपति मुर्मू ने एंटी-पेपर लीक कानून को दी मंजूरी, अब 2 महीने में जांच, 3 महीने में फैसला और 10 साल तक की जेल
गलत नंबर पर हो गया मोबाइल रिचार्ज? घबराएं नहीं! Airtel और Jio यूजर्स ऐसे वापस पा सकते हैं अपने पैसे, जानिए पूरा प्रोसेस
संसद के ‘भगवा प्रदर्शन’ पर कानूनी शिकंजा: राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?