By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने संविदा फार्मासिस्टों की नई याचिका को किया खारिज, ‘रेजुडिकाटा’ के सिद्धांत का दिया हवाला
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड हाईकोर्ट ने संविदा फार्मासिस्टों की नई याचिका को किया खारिज, ‘रेजुडिकाटा’ के सिद्धांत का दिया हवाला
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने संविदा फार्मासिस्टों की नई याचिका को किया खारिज, ‘रेजुडिकाटा’ के सिद्धांत का दिया हवाला

The Hill India News
Last updated: January 27, 2026 2:34 pm
The Hill India News
Published: January 27, 2026
Share
SHARE

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल, श्रीनगर में लंबे समय से कार्यरत संविदा फार्मासिस्टों को बड़ा कानूनी झटका दिया है। न्यायालय ने 14 वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों द्वारा दायर नई याचिका को सुनने से इनकार करते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति आलोक महरा की अवकाश कालीन एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि जब एक ही विषय पर न्यायालय पहले ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर चुका है और उन आदेशों के अनुपालन की समय-सीमा अभी शेष है, तो बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाना न्यायसंगत नहीं है।

Contents
क्या है पूरा मामला?‘रेजुडिकाटा’ के आधार पर याचिका खारिजनियमितीकरण नियमावली 2025 और सरकार का पक्षसंविदा कर्मचारियों के भविष्य पर क्या होगा असर?

क्या है पूरा मामला?

मामले की जड़ें वर्ष 2024 की एक भर्ती विज्ञप्ति से जुड़ी हैं। दरअसल, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 19 अक्टूबर 2024 को 73 फार्मासिस्टों के पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन को बेस अस्पताल श्रीनगर में 2011 से कार्यरत उपेंद्र बंगवाल व अन्य संविदा फार्मासिस्टों ने चुनौती दी थी। उनकी मुख्य चिंता यह थी कि नई भर्ती होने से उनकी वर्षों की सेवा और भविष्य के नियमितीकरण (Regularization) के अवसर समाप्त हो सकते हैं।

पूर्व में इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 12 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया था। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि वह छह माह के भीतर इन संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की पात्रता की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करे। साथ ही, अंतरिम राहत देते हुए कोर्ट ने कहा था कि जब तक समिति कोई अंतिम निर्णय नहीं ले लेती, तब तक इन कर्मचारियों की सेवा में कोई व्यवधान (Disturbance) पैदा नहीं किया जाएगा।

‘रेजुडिकाटा’ के आधार पर याचिका खारिज

मौजूदा सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आलोक महरा ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने फिर से उन्हीं मांगों को लेकर नई याचिका दायर की है जो पिछली याचिका में शामिल थीं। कानूनी शब्दावली में इसे ‘रेजुडिकाटा’ (Res Judicata) कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यदि किसी सक्षम न्यायालय ने किसी विषय पर अंतिम निर्णय दे दिया है, तो उसी पक्षकार द्वारा उन्हीं तथ्यों के आधार पर दोबारा मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि चूंकि पूर्व में दिए गए ‘6 महीने की सुरक्षा’ और ‘समीक्षा अवधि’ का समय अभी समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए वर्तमान में नई याचिका दायर करने का कोई ठोस या नया आधार (Cause of Action) मौजूद नहीं है।

नियमितीकरण नियमावली 2025 और सरकार का पक्ष

सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार की नई नियमितीकरण नियमावली का भी उल्लेख हुआ। राज्य सरकार ने 5 दिसंबर 2025 को अपनी नियमावली में संशोधन किया है। नए नियमों के प्रावधानों के अनुसार:

  1. केवल वे ही संविदा कर्मचारी नियमितीकरण के पात्र होंगे जिन्होंने 4 दिसंबर 2018 तक 10 साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली हो।

  2. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वे 2011 से कार्यरत हैं, अतः वे इस श्रेणी में आते हैं।

राज्य सरकार के अधिवक्ताओं ने अदालत को आश्वस्त किया कि याचियों के प्रत्यावेदन (Representations) अभी विभाग के विचाराधीन हैं। चयन प्रक्रिया को लेकर सरकार ने बताया कि 19 अक्टूबर 2024 के विज्ञापन के आधार पर भर्ती प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और सफल अभ्यर्थियों का परिणाम 17 जनवरी 2026 को पहले ही घोषित किया जा चुका है।

संविदा कर्मचारियों के भविष्य पर क्या होगा असर?

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल संविदा फार्मासिस्टों के पास विभाग की उस समिति की रिपोर्ट का इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, जिसे कोर्ट ने गठित करने का आदेश दिया था। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नई भर्ती प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन मौजूदा संविदा कर्मियों को दिसंबर 2025 में मिली अंतरिम सुरक्षा तब तक जारी रहेगी जब तक उनके नियमितीकरण पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला उत्तराखंड में संविदा पर तैनात हजारों अन्य कर्मचारियों के लिए भी नजीर बनेगा। सरकार के पास अब कुछ ही महीनों का समय बचा है जब उसे यह तय करना होगा कि 14 वर्षों से सेवा दे रहे इन कर्मचारियों को पक्की नौकरी दी जाए या उन्हें नई भर्ती के सफल अभ्यर्थियों के लिए रास्ता खाली करना होगा।

नैनीताल हाईकोर्ट का यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने और अनावश्यक मुकदमों की बाढ़ रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राहत पाने के लिए कानून की प्रक्रिया का सम्मान करना अनिवार्य है। अब सबकी नजरें उत्तराखंड शासन की उस समिति पर टिकी हैं, जिसे इन फार्मासिस्टों के 14 साल के संघर्ष और भविष्य का फैसला करना है।

You Might Also Like

वीर नारियों को परिवहन निगम की रोडवेज बसों में मिलेगी मुफ्त यात्रा की सुविधा
गोवा में 1200 करोड़ का ज़मीन घोटाला, ईडी की बड़ी कार्रवाई
हमास चीफ इस्माइल हानिया के मारे जानें के बाद, अब सीरिया में अमीर अली हाजीज़ादेह को ढेर करने का दावा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज पेश होंगे सुल्तानपुर कोर्ट में, मानहानि के मुकदमे से जुड़ा है मामला
उत्तराखंड: प्रतिनियुक्ति पर सख्ती के बावजूद नियमों की अनदेखी, वर्षों से मूल विभाग से बाहर जमे अफसरों पर उठे सवाल
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्डराजनीति

मांजलपुर उपचुनाव में BJP की शानदार जीत: सतीश पटेल ने 30 हजार से अधिक वोटों से कांग्रेस को हराया, गुजरात में कमल फिर खिला

The Hill India News
The Hill India News
August 3, 2026
ITR Refund का इंतजार खत्म कब होगा? जानिए इनकम टैक्स रिफंड की पूरी प्रक्रिया, कितने दिनों में मिलेगा पैसा और किन वजहों से हो सकती है देरी
पप्पू यादव के भगवा प्रदर्शन पर INDIA गठबंधन में दरार! सपा ने किया किनारा, राम मंदिर मुद्दे पर विपक्ष के अलग-अलग सुर आए सामने
NEET पेपर लीक आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ‘छात्रों को मिलेगा न्याय, लेकिन अपराधियों को नहीं मिलेगी कोई राहत’; FIR, पुलिस कार्रवाई और जांच पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
JPSC परीक्षा विवाद ने पकड़ा तूल: हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर, परीक्षा रद्द करने से लेकर CBI जांच तक उठीं बड़ी मांगें
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: क्या बदलेगा विरोध प्रदर्शन का केंद्र? केंद्र सरकार से मांगा जवाब
बृज भूषण शरण सिंह को बड़ी राहत: कोर्ट से बरी होने के बाद बोले— “अगर एक भी आरोप साबित होता तो खुद फांसी पर लटक जाता”
ऐतिहासिक फैसला! राष्ट्रपति मुर्मू ने एंटी-पेपर लीक कानून को दी मंजूरी, अब 2 महीने में जांच, 3 महीने में फैसला और 10 साल तक की जेल
गलत नंबर पर हो गया मोबाइल रिचार्ज? घबराएं नहीं! Airtel और Jio यूजर्स ऐसे वापस पा सकते हैं अपने पैसे, जानिए पूरा प्रोसेस
संसद के ‘भगवा प्रदर्शन’ पर कानूनी शिकंजा: राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?