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Uttarakhand: पूर्व CM कोश्यारी को ‘पद्मभूषण’ सम्मान, बोले- “कभी कामना नहीं की थी, यह किसान के बेटे का सम्मान है”

देहरादून | गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए देश के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस वर्ष की सूची में उत्तराखंड के लिए विशेष गौरव का विषय यह रहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण सम्मान के लिए चुना गया है। 25 जनवरी की शाम गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में 5 पद्मविभूषण और 13 पद्मभूषण सहित कुल 131 नामों को मंजूरी दी गई है।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का जताया आभार

सम्मान की घोषणा के बाद भगत सिंह कोश्यारी ने विनम्रता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैंने जीवन में कभी भी किसी सम्मान की कामना नहीं की थी। मैं एक छोटा सा कार्यकर्ता और किसान का बेटा हूँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझ जैसे साधारण व्यक्ति को इतना ऊंचा सम्मान देकर राष्ट्र सेवा के जज्बे को सराहा है।”

उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए आह्वान किया कि वर्ष 2047 तक भारत को ‘जगतगुरु’ और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हर नागरिक को अपने कर्तव्य का पालन पूरे मनोयोग से करना चाहिए।


भगत सिंह कोश्यारी: बागेश्वर के खेतों से राजभवन तक का सफर

भगत सिंह कोश्यारी का जीवन संघर्ष और सादगी की एक अनूठी मिसाल है। उनके अब तक के सफर को इन प्रमुख बिंदुओं में समझा जा सकता है:

साधारण परिवेश और शिक्षा

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के एक छोटे से गाँव में किसान परिवार में जन्मे कोश्यारी ने अभावों के बीच शिक्षा को अपना हथियार बनाया। उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की और कुछ समय तक शिक्षक के रूप में भी नई पीढ़ी को दिशा दी।

आपातकाल और राजनीतिक उदय

छात्र जीवन से ही सामाजिक सरोकारों से जुड़े कोश्यारी ने जनसंघ के माध्यम से राजनीति में कदम रखा। 1975 में आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और जेल भी गए। यही वह दौर था जिसने उन्हें एक प्रखर और जुझारू नेता के रूप में स्थापित किया।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन और मुख्यमंत्रित्व

पृथक उत्तराखंड राज्य के निर्माण में उनकी भूमिका ‘अग्रणी’ रही। राज्य गठन के बाद, उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली और एक नवगठित राज्य को प्रशासनिक स्थिरता प्रदान की। वे संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य भी रहे, जहाँ उन्होंने हमेशा पहाड़ की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

राज्यपाल के रूप में संवैधानिक दायित्व

महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य के राज्यपाल के रूप में उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय में संवैधानिक मर्यादाओं का पालन किया। राजनीति के साथ-साथ साहित्य में भी उनकी गहरी रुचि है; वे हिंदी और कुमाऊंनी भाषा के सशक्त लेखक हैं और पहाड़ी संस्कृति के संरक्षण के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।


पद्म पुरस्कार 2026 का सांख्यिकीय विवरण

इस वर्ष केंद्र सरकार ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया है:

पुरस्कार श्रेणी संख्या
पद्मविभूषण 05
पद्मभूषण 13
पद्मश्री 113
कुल पुरस्कार 131

जल्द ही राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले एक विशेष नागरिक सम्मान समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन सभी विजेताओं को सम्मानित करेंगी।

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