नई टिहरी (उत्तराखंड)। देवभूमि उत्तराखंड की आर्थिक रीढ़ कही जाने वाली ‘चारधाम यात्रा’ अब न केवल राज्य को राजस्व दिलाएगी, बल्कि पहाड़ों की महिलाओं के लिए आजीविका का सबसे बड़ा जरिया भी बनेगी। राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी पहल करते हुए चारधाम के मंदिरों में अर्पित होने वाले फूलों और पहाड़ों के प्राकृतिक उत्पादों के जरिए महिला सशक्तीकरण का नया रोडमैप तैयार किया है। इस योजना के तहत अब मंदिरों के फूलों से अगरबत्ती बनाई जाएगी और औषधीय गुणों से भरपूर ‘टिमरू’ से अंतरराष्ट्रीय स्तर का परफ्यूम तैयार किया जाएगा।
फूलों और टिमरू से आर्थिकी का नया मॉडल
बुधवार को टिहरी स्थित टीएचडीसी अतिथि गृह में पत्रकारों से वार्ता करते हुए राज्य महिला उद्यमिता विकास परिषद की उपाध्यक्ष (दायित्वधारी) विनोद उनियाल ने सरकार के इस विजन को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला टिमरू, जिसे अब तक केवल औषधीय या धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाता था, अब परफ्यूम (इत्र) उद्योग का आधार बनेगा।
योजना के मुख्य आकर्षण:
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वेस्ट टू वेल्थ: चारधाम के मंदिरों (बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए फूलों को एकत्र कर उन्हें महिला समूहों को सौंपा जाएगा, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाई जा सके।
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टिमरू का परफ्यूम: पहाड़ों के कांटों भरे झाड़ ‘टिमरू’ की सुगंध को अब बोतलों में बंद कर बाजार में उतारा जाएगा। इसका निर्माण महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा।
बजट और ‘लखपति दीदी’ अभियान
विनोद उनियाल ने केंद्र और राज्य सरकार के बजट की सराहना करते हुए इसे ‘स्व-रोजगारोन्मुखी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अब तक प्रदेश में लगभग ढाई लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत लाभान्वित किया जा चुका है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योग विभाग के माध्यम से महिलाओं की आजीविका संवर्धन के लिए कई नई योजनाएं पाइपलाइन में हैं, जो आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल देंगी।
पुरानी टिहरी की यादें और पर्यटन ग्राम
टिहरी बांध के कारण विस्थापित हुए लोगों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उनियाल ने एक भावनात्मक मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने के लिए ‘पुरानी टिहरी’ की एक भव्य प्रतिकृति (Replica) बनाने का प्रस्ताव जिलाधिकारी के समक्ष रखा गया है। इसके साथ ही, बांध प्रभावित ‘मरोड़ा’ गांव को ‘पर्यटन ग्राम’ की सूची में शामिल करने की जोरदार वकालत की गई है, ताकि वहां के युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर मिल सकें।
ओबीसी आरक्षण और क्षेत्रीय मांगें
राजनीतिक और सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उपाध्यक्ष ने संपूर्ण टिहरी जिले को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में शामिल करने की मांग दोहराई। उन्होंने बताया कि प्रतापनगर और थौलधार ब्लॉक को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री धामी ने पहले ही केंद्रीय ओबीसी आयोग को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है। जिले के संघर्षों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि टिहरी बांध के निर्माण में यहां के लोगों ने बहुत त्याग किया है, जिसके बदले उन्हें विशेष प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए।
सशक्त महिला, समृद्ध उत्तराखंड
राज्य महिला उद्यमिता विकास परिषद की उपाध्यक्ष का यह संबोधन केवल सरकारी दावों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें पहाड़ों की भौगोलिक परिस्थितियों को समझते हुए आर्थिकी को मजबूत करने का संकेत भी दिखा। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालु अब इन महिला समूहों द्वारा बनाए गए परफ्यूम और अगरबत्ती को ‘प्रसाद’ और ‘स्मृति चिह्न’ के रूप में ले जा सकेंगे, जिससे सीधे तौर पर स्थानीय महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।
रिवर्स पलायन की ओर एक कदम
उत्तराखंड सरकार का यह नवाचार न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाएगा, बल्कि पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने में भी मददगार साबित होगा। जब स्थानीय उत्पाद जैसे टिमरू और मंदिर के फूल व्यापार का जरिया बनेंगे, तो ग्रामीण क्षेत्रों में खुशहाली का नया संचार होगा। अब देखना यह होगा कि धरातल पर ये योजनाएं कितनी तेजी से उतरती हैं और ‘ब्रांड उत्तराखंड’ को वैश्विक पहचान दिलाने में कितनी सफल होती हैं।



