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Uttarakhand: गैरसैंण बजट सत्र में उक्रांद के ‘महाघेराव’ की तैयारी, 26 जिलों के ब्लूप्रिंट के साथ मैदान में आशीष नेगी

The Hill India News
Last updated: March 8, 2026 3:15 am
The Hill India News
Published: March 8, 2026
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चमोली/गैरसैंण: उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर ‘गैरसैंण’ का मुद्दा गर्माने लगा है। आगामी 9 मार्च से 13 मार्च तक ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में आयोजित होने वाले पांच दिवसीय बजट सत्र को लेकर राज्य की क्षेत्रीय शक्ति उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उक्रांद के युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी के नेतृत्व में दल ने विधानसभा घेराव की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

Contents
राष्ट्रीय दलों की जकड़न से मुक्ति का आह्वानउक्रांद का ‘विज़न-2027’: 26 जिले और नया परिसीमन“पहाड़ की ठंड और ऑक्सीजन” पर नेताओं को घेराबूथ स्तर पर संगठन की मजबूती: 3700 बूथों पर मैनेजमेंट टीम तैयारघेराव में शामिल होगा पूरा उत्तराखंडनिर्णायक मोड़ पर उत्तराखंड की राजनीति

इस घेराव को महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए उक्रांद के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। आशीष नेगी वर्तमान में चमोली के दुर्गम गांवों का भ्रमण कर जनसमर्थन जुटा रहे हैं और राष्ट्रीय दलों के खिलाफ ‘पहाड़ की पीड़ा’ को स्वर दे रहे हैं।

राष्ट्रीय दलों की जकड़न से मुक्ति का आह्वान

गांवों में जनसभाओं को संबोधित करते हुए आशीष नेगी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उत्तराखंड पिछले दो दशकों से भाजपा और कांग्रेस की “नूरा-कुश्ती” में फंसकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों दलों ने बारी-बारी से सत्ता सुख भोगा, लेकिन पहाड़ की बुनियादी समस्याओं—शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार—को जानबूझकर नजरअंदाज किया।

नेगी ने स्पष्ट किया कि गैरसैंण विधानसभा घेराव का मुख्य उद्देश्य सरकार को यह याद दिलाना है कि राज्य की अवधारणा ‘स्थायी राजधानी’ के बिना अधूरी है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि उक्रांद की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित कर दिया जाएगा।

उक्रांद का ‘विज़न-2027’: 26 जिले और नया परिसीमन

आशीष नेगी ने केवल विरोध ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विकास का एक वैकल्पिक मॉडल (ब्लूप्रिंट) भी जनता के सामने रखा है। उनके मुख्य प्रस्तावों में शामिल हैं:

  1. भौगोलिक आधार पर परिसीमन: उक्रांद का तर्क है कि परिसीमन केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि भूगोल के आधार पर होना चाहिए, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कम न हो। इससे विधायकों की संख्या 100 से अधिक हो जाएगी।

  2. 26 जनपदों का निर्माण: प्रशासनिक सुगमता के लिए उक्रांद ने 26 जिलों का खाका तैयार किया है।

  3. नई कमिश्नरी: बेहतर विकास नियोजन के लिए गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में एक-एक नई कमिश्नरी के गठन का प्रस्ताव।

  4. सख्त भू-कानून और मूल निवास: 2027 में सत्ता में आते ही जनभावनाओं के अनुरूप कठोर भू-कानून लागू करने का वादा।

“पहाड़ की ठंड और ऑक्सीजन” पर नेताओं को घेरा

नेगी ने सत्तापक्ष के उन विधायकों और मंत्रियों पर तंज कसा जो गैरसैंण में ठंड और ऑक्सीजन की कमी का बहाना बनाकर सत्र से बचते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा,

“हमारे नेताओं को गैरसैंण में ठंड लगती है, लेकिन उन्हें उन माताओं-बहनों की सुध नहीं है जो हाड़ कंपा देने वाली बर्फबारी में भी जंगलों से चारा लाती हैं और जंगली जानवरों के हमलों का शिकार होती हैं। जब तक सत्ता के गलियारे पहाड़ों की चोटियों पर नहीं बैठेंगे, तब तक देहरादून में बैठे अधिकारियों को पहाड़ का दर्द समझ नहीं आएगा।”

बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती: 3700 बूथों पर मैनेजमेंट टीम तैयार

आगामी गैरसैंण विधानसभा घेराव को सफल बनाने के लिए उक्रांद ने सांगठनिक स्तर पर अभूतपूर्व तैयारी की है। आशीष नेगी के अनुसार, उक्रांद अब केवल भावनाओं की राजनीति नहीं, बल्कि डेटा और प्रबंधन की राजनीति कर रहा है।

  • लक्ष्य: उत्तराखंड के कुल 11,524 विधानसभा बूथ।

  • वर्तमान स्थिति: 3,700 बूथों पर सक्रिय प्रबंधन टीम का गठन पूरा।

  • रणनीति: महिला और सैनिक प्रकोष्ठों को साथ लेकर गांव-गांव तक पहुंच।

घेराव में शामिल होगा पूरा उत्तराखंड

9 मार्च को होने वाले इस प्रदर्शन में केवल चमोली ही नहीं, बल्कि उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, उधम सिंह नगर, टिहरी और देहरादून समेत सभी 13 जनपदों से कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल होंगे। उक्रांद का मानना है कि वर्तमान भाजपा सरकार में शामिल अधिकांश मंत्री पूर्व में कांग्रेसी रहे हैं, जिससे नीतियों में कोई मौलिक बदलाव नहीं आया है।

आशीष नेगी ने जनता से अपील की है कि वे अपनी पहचान और अपने बच्चों के भविष्य के लिए इस घेराव में शामिल हों। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गैरसैंण को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो जनता उन्हें गद्दी छोड़ने पर मजबूर कर देगी।


निर्णायक मोड़ पर उत्तराखंड की राजनीति

जैसे-जैसे बजट सत्र की तारीख नजदीक आ रही है, गैरसैंण की फिजाओं में सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है। उक्रांद की सक्रियता और आशीष नेगी का युवाओं के बीच बढ़ता ग्राफ राष्ट्रीय दलों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। देखना यह होगा कि क्या यह ‘विधानसभा घेराव’ उत्तराखंड की राजनीति में स्थायी राजधानी और भू-कानून जैसे मुद्दों पर कोई निर्णायक बदलाव ला पाता है या नहीं।

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