
नई दिल्ली: उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच अब ‘बारिश का ट्रिपल अटैक’ शुरू होने जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर में 23 और 27 जनवरी को हुई बरसात के बाद अब जनवरी के अंत और फरवरी की शुरुआत में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण 31 जनवरी से अगले तीन दिनों तक राजधानी समेत पूरे उत्तर पश्चिम भारत में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।
दिल्ली-NCR में ऑरेंज अलर्ट: बजट के दिन भी बरसेंगे बादल
राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद) में 30 जनवरी को आसमान में बादल छाए रहने और धुंध बने रहने के आसार हैं। लेकिन असली खेल 31 जनवरी की दोपहर से शुरू होगा। मौसम विभाग ने इन दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 31 जनवरी से 2 फरवरी के बीच दिल्ली में गरज-चमक के साथ बारिश के दो से तीन दौर देखने को मिल सकते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 1 फरवरी को जब देश का अंतरिम बजट पेश होगा, उस वक्त भी राजधानी में तेज हवाओं (30-40 किमी/घंटा) के साथ बारिश होने का अनुमान है। हालांकि, न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है, जो 11 से 13 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है, लेकिन बारिश के कारण गलन और ठिठुरन बरकरार रहेगी।
पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बौछारें: पूरे उत्तर भारत का हाल
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि हिमालयी क्षेत्रों में एक के बाद एक दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं। इसका असर न केवल पहाड़ों पर बल्कि मैदानी इलाकों में भी व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।

शीत लहर और कोहरे का डबल अटैक
भले ही न्यूनतम तापमान में मामूली सुधार की बात कही जा रही हो, लेकिन उत्तर भारत का मौसम अभी खुलने के आसार नहीं हैं। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में 1-2 फरवरी तक घना कोहरा छाया रहेगा। बारिश के साथ चलने वाली बर्फीली हवाएं ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) जैसी स्थिति पैदा कर सकती हैं। सुबह और शाम के वक्त गलन बढ़ने से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
समुद्र में भी हलचल: मछुआरों को चेतावनी
पश्चिमी विक्षोभ का असर केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में भी हलचल की चेतावनी दी है। मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे 29 जनवरी से 3 फरवरी तक समुद्र के गहरे इलाकों में न जाएं, क्योंकि खराब मौसम के कारण लहरों में तेजी आ सकती है।
खेती और स्वास्थ्य पर असर
लगातार हो रही बारिश और धूप न निकलने के कारण रबी की फसलों, खासकर गेहूं और सरसों पर इसका मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है। जहाँ हल्की बारिश फसलों के लिए अमृत समान है, वहीं ओलावृष्टि या तेज हवाओं के साथ भारी बारिश नुकसानदेह साबित हो सकती है। डॉक्टरों ने भी इस बदलते मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि तापमान में उतार-चढ़ाव से वायरल संक्रमण और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।
कुल मिलाकर, उत्तर भारत में अभी सर्दी से राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। Delhi NCR Rain Alert के बीच लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना मौसम को ध्यान में रखकर ही बनाएं। 31 जनवरी से शुरू होने वाला यह दौर फरवरी के पहले सप्ताह तक पूरे उत्तर-पश्चिम भारत को अपनी चपेट में रखेगा।



