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Uttarakhand: राज्यपाल ने किया ‘पुष्कर धामी: हिमालय की जीवंत ऊष्मा’ पुस्तक का विमोचन, कहा—“अनुशासन, विनम्रता और कर्तव्यपरायणता से गढ़ा एक नेतृत्व”

The Hill India News
Last updated: November 27, 2025 1:08 pm
The Hill India News
Published: November 27, 2025
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देहरादून, 27 नवंबर 2025। राजभवन में गुरुवार को एक गरिमामय समारोह के दौरान उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित दो पुस्तकों—‘पुष्कर धामी: हिमालय की जीवंत ऊष्मा’ (हिंदी) और ‘Pushkar Dhami: The Vibrant Heat of the Himalayas’ (अंग्रेजी)—का औपचारिक विमोचन किया। इन पुस्तकों का संकलन युवा लेखिका संभावना पंत ने किया है, जबकि प्रकाशन प्रभात पब्लिकेशन और रूपा पब्लिकेशन द्वारा किया गया है।

Contents
“दादा के आदर्श, मां की विनम्रता और पिता का अनुशासन—इन्हीं से तैयार हुआ पुष्कर”—राज्यपालमुख्यमंत्री धामी हुए भावुक, कहा—“मैं कुछ बनना नहीं चाहता था, लेकिन कुछ करना जरूर चाहता था”स्वामी चिदानंद सरस्वती: “राज्य में वही हो रहा है जो देश में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हो रहा है”आचार्य प्रमोद कृष्णम: “धामी जी समय की जरूरत के अनुरूप निर्णय लेते हैं”पुस्तक की लेखिका संभावना पंत ने बताया—“यह व्यक्ति नहीं, व्यक्तित्व की कहानी है”कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और वरिष्ठजन उपस्थितसमापन

कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे, जिनमें श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी शामिल रहे।

पुस्तक विमोचन का समारोह न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने मुख्यमंत्री धामी के व्यक्तिगत संघर्ष, नेतृत्व क्षमता और सार्वजनिक जीवन में उनकी योगदान गाथा को भी केंद्र में लाकर रख दिया।


“दादा के आदर्श, मां की विनम्रता और पिता का अनुशासन—इन्हीं से तैयार हुआ पुष्कर”—राज्यपाल

विमोचन समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने पुस्तक की लेखिका संभावना पंत की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने बड़ी संवेदनशीलता के साथ यह दिखाया है कि कैसे पहाड़ के कठोर जीवन, परिवार के संस्कारों और सेना के अनुशासन ने एक साधारण बालक को राज्य के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाया।

राज्यपाल ने कहा,
“इन पुस्तकों में यह स्पष्ट रूप से दिखता है कि दादा खेम सिंह के आदर्श, माता की विनम्रता और सैनिक पिता के दृढ़ अनुशासन ने मिलकर एक पुष्कर धामी का निर्माण किया। लेखिका ने इन जीवन प्रसंगों को जिस परिश्रम और संवेदनशीलता के साथ पिरोया है, वह प्रशंसनीय है।”

राज्यपाल ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने अपने नेतृत्व में उत्तराखंड को कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दिलाई हैं और राज्य को नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने आपदा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और बड़े आयोजनों के सफल संचालन का विशेष उल्लेख किया।

“सिलक्यारा हो, जोशीमठ हो या धराली से थराली—हर संकट के समय मुख्यमंत्री धामी सबसे पहले प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे। उनकी विनम्रता, अनुशासन और करुणा उनके व्यक्तित्व की मुख्य पहचान है।”


मुख्यमंत्री धामी हुए भावुक, कहा—“मैं कुछ बनना नहीं चाहता था, लेकिन कुछ करना जरूर चाहता था”

समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बचपन, परिवार और पहाड़ के जीवन संघर्षों को याद करते हुए भावुक होते नजर आए।
उन्होंने कहा कि बचपन की पगडंडियाँ, पहाड़ी नदी-नालों (गाड़-गदेरे) के अनुभव और एक सैनिक परिवार का अनुशासन उनके जीवन के आधार स्तम्भ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा,
“मैंने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि मैं कुछ बनूंगा, लेकिन मेरे अंदर हमेशा यह जीवंत ऊष्मा थी कि मैं कुछ करूंगा—समाज के लिए, राज्य के लिए।”

उन्होंने अपनी माता के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक सैनिक की पत्नी होने के नाते उन्होंने अकेले ही परिवार को संभाला, पहाड़ के कठिन जीवन में बच्चों को पाला और उन्हें संस्कार दिए।

मुख्यमंत्री ने पुस्तकों की लेखिका संभावना पंत, प्रकाशकों और सभी विशिष्ट अतिथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह पुस्तक सिर्फ उनके संघर्षों की कहानी नहीं, बल्कि पहाड़ के सामान्य लोगों की उस जीवनगाथा का प्रतिबिंब है, जिसे अक्सर उपेक्षित कर दिया जाता है।

स्वामी चिदानंद सरस्वती: “राज्य में वही हो रहा है जो देश में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हो रहा है”

परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रीय दृष्टिकोण और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनी नीतियों और कार्यशैली में बखूबी समाहित किया है।

उन्होंने कहा, “देश में जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव को नया आयाम दे रहे हैं, उत्तराखंड में उसी प्रकार का कार्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी कर रहे हैं।”

आचार्य प्रमोद कृष्णम: “धामी जी समय की जरूरत के अनुरूप निर्णय लेते हैं”

श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की नेतृत्व शैली कर्तव्यपरायणता और यथार्थवाद पर आधारित है।
उन्होंने कहा, “धामी जी समाज, राज्य और समय की जरूरतों के अनुरूप फैसले लेते हैं। उनके निर्णयों में दूरदर्शिता और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों झलकती हैं।”


पुस्तक की लेखिका संभावना पंत ने बताया—“यह व्यक्ति नहीं, व्यक्तित्व की कहानी है”

युवा लेखिका संभावना पंत ने पुस्तक के सार को साझा करते हुए कहा कि यह केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व की जीवनी नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, अनुशासित और दूरदर्शी मनुष्य की कहानी है, जो संघर्ष से निकला, सेवा में तपता गया और नेतृत्व में निखरता चला गया।

उन्होंने कहा कि पुस्तक में—

  • मुख्यमंत्री धामी के दादा के आदर्श,
  • सैनिक पिता का अनुशासन,
  • माता की विनम्रता,
  • बचपन के पहाड़ी अनुभव,
  • युवावस्था के संघर्ष,
  • और राज्य के मुख्य सेवक बनने की यात्रा—
    इन सबको विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और वरिष्ठजन उपस्थित

विमोचन समारोह में बड़ी संख्या में विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे, जिनमें—

  • कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी
  • राज्यसभा सांसद नरेश बंसल एवं कल्पना सैनी
  • विधायक सविता कपूर एवं बृजभूषण गैरोला
  • पद्मश्री बसंती बिष्ट
  • टपकेश्वर महादेव मंदिर के प्रमुख श्री किशन गिरी महाराज
    सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल थे।

समापन

राजभवन में हुआ यह पुस्तक विमोचन समारोह केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उत्तराखंड के वर्तमान नेतृत्व, उसके मूल्यों, संघर्षों और दृष्टि को समझने का एक जीवंत अवसर बना।
‘हिमालय की जीवंत ऊष्मा’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि पहाड़ की सादगी, संघर्ष, अनुशासन और अटूट इच्छाशक्ति का दस्तावेज है—जिससे एक ऐसा नेतृत्व जन्मा है, जिसने उत्तराखंड को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प लिया है।

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